PATNA:नीट (NEET-UG) पेपर लीक और परीक्षा में धांधली को लेकर देश भर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। विपक्ष और छात्र संगठन लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के नेतृत्व में छात्रों ने पटना के गांधी मैदान से राजभवन मार्च किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे। 


प्रदर्शनकारी छात्र को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। जब छात्र नहीं माने तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ गया। दोबारा बीजेपी दफ्तर में जब छात्र पथराव करने पहुंचे तब भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें खदेड़ दिया और स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भी लाठीचार्ज किया। 


आज दिनभर एक तरफ छात्रों का हंगामा होता रहा तो दूसरी ओर बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में ही भीड़ गये। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी डंडे चले और मारपीट हुई। पटना में आज हुए छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बिटिया रोहिणी आचार्य ने एनडीए सरकार पर जमकर हमला बोला। रोहिणी ने कहा कि दिल्ली के दमन की पुनर्रावृति आज पटना में देखने को मिला। 


रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि "आज पटना में अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सम्राट सरकार की पुलिस द्वारा किया गया बर्बर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ना और वॉटर कैनन का प्रयोग अत्यंत दुखद और निंदनीय है।"


रोहिणी आचार्य ने आगे कहा कि "लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों को अपनी आवाज उठाने तथा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। छात्रों की मांगों को सुनने , उनका समाधान निकालने के बजाय लाठी और पानी की बौछारों से छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।"


उन्होंने X पर आगे लिखा कि "भविष्य के निर्माताओं पर इस तरह का बर्बर बल प्रयोग किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। सरकार को तुरंत इस घटना पर संज्ञान लेते हुए दोषी पुलिस व् प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए और छात्रों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान करना चाहिए।"


इस ट्वीट से पहले रोहिणी ने एक और ट्वीट किया है, जिसमें वो लिखती हैं कि "जनता की ताकत से ताकतवर तानाशाहों के सिंहासन भी जमींदोज हो जाते हैं .. सत्ता का अहंकार हमेशा के लिए नहीं होता; जनता की अदालत ही सबसे बड़ी होती है..  इतिहास गवाह है कि जब जनता जवाब मांगने, हिसाब करने सड़क पर उतरती है, तो सबसे ताकतवर तानाशाहों के सिंहासन भी जमींदोज हो जाते हैं , इसलिए कान खोल कर सुन लो फासीवादी मोदी सरकार " वो वक्त भी जल्द ही आएगा जब  देश का आवाम ही तुम्हारे द्वारा चलावए गए हर  डंडे , किए गए हर जुल्म , की गयी हर दमन की कार्रवाई ,  हुई हर मौत का लोकतांत्रिक तरीके से हिसाब करेगा  .. न 'किसी' की प्रधानी बचेगी , न 'प्रधान' की काली कारस्तानी बचेगी .. बचेगा तो सिर्फ देश के युवाओं का भविष्य बचेगा , देश का संविधान बचेगा ,  देश में जम्हूरियत का अस्तित्व और रसूख बचेगा"  ..