Bihar News : बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भीतर एक बार फिर नाराजगी के सुर तेज हो गए हैं। पार्टी के एमएलसी उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा  के निलंबन को लेकर अब पार्टी के ही विधायक ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इतना बढ़ गया कि विधायक ने खुलकर चुनौती देते हुए कहा कि अगर कार्रवाई ही करनी है तो हम तीनों विधायकों को भी पार्टी से हटा दीजिए। इस बयान के बाद पार्टी के अंदर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है।


रामपुकार सिन्हा के खिलाफ हुई कार्रवाई ने पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व के फैसलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जिस फैसले को पार्टी नेतृत्व अनुशासन के नजरिए से देख रहा है, उसी पर पार्टी के एक विधायक ने नाराजगी जताते हुए सवाल खड़ा कर दिया है। उनका विरोध केवल रामपुकार राय के निलंबन तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके जरिए पार्टी के भीतर फैसले लेने के तरीके पर भी असहमति सामने आ रही है।


विधायक का ‘हम तीनों को भी हटा दीजिए’ वाला बयान राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के कुछ नेताओं में नेतृत्व के फैसलों को लेकर असंतोष है। ऐसे में यदि कुशवाहा अपनी पार्टी के विधायक पर कोई निर्णय लेते हैं तो उनकी पार्टी का सत्ता से बेदखल होना तय है क्योंकि कुशवाहा की पार्टी में महज 4 विधायक है और उसमें तीन विधायक इनके फैसले के खिलाफ ही है लिहाजा यदि पार्टी नेतृव कोई एक्शन लेगी तो तीनों विधायकों पर लेगी और कुल 4 विधायक में से तीन विधायक एक तरफ है तो एक अकेले विधायक सिर्फ कुशवाहा की पत्नी बच जाती है ऐसे में यह विधायक किसी दुसरे दल में शामिल होते हैं तो कुशवाहा का सत्ता के केंद्र से हटना तय है।लिहाजा फिलहाल विवाद का केंद्र रामपुकार सिन्हा  के निलंबन और उस पर विधायक की तीखी प्रतिक्रिया है।


राष्ट्रीय लोक मोर्चा के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिहार की राजनीति में छोटे दलों के लिए संगठनात्मक एकजुटता और विधायकों के बीच तालमेल काफी मायने रखता है। ऐसे में अगर पार्टी के भीतर सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आते हैं, तो इसका असर संगठन की छवि पर पड़ सकता है। विरोधी दलों को भी सत्तापक्ष या सहयोगी खेमे के भीतर की ऐसी नाराजगी को राजनीतिक मुद्दा बनाने का मौका मिल सकता है।


रामपुकार सिन्हा  के निलंबन को लेकर उठे सवालों ने अब उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व और पार्टी में असहमति के लिए उपलब्ध जगह पर भी चर्चा शुरू कर दी है। किसी भी राजनीतिक दल में अनुशासन बनाए रखना नेतृत्व की जिम्मेदारी होती है, लेकिन कार्रवाई को लेकर नेताओं के बीच असहमति हो तो उसे किस तरह सुलझाया जाता है, यह भी संगठन की मजबूती तय करता है।


इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान विधायक के उस बयान पर है, जिसमें उन्होंने खुद समेत तीनों विधायकों को हटाने की बात कही। यह केवल नाराजगी जताने का तरीका है या नेतृत्व के सामने कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश, इसका जवाब आने वाले दिनों में पार्टी की प्रतिक्रिया से मिल सकता है।


फिलहाल रामपुकार सिन्हा के निलंबन को लेकर RLM में उठे इस विवाद ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उपेंद्र कुशवाहा इस नाराजगी पर क्या रुख अपनाते हैं और पार्टी के भीतर उठे सवालों का समाधान बातचीत से निकलता है या टकराव और बढ़ता है।