भोजपुर/पटना: बिहार से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व राज्यसभा सांसद और एसआईएस (SIS) समूह के संस्थापक रवींद्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) के निधन की खबर है। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर है। आरके सिन्हा ने पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कारोबार की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पहचान बिहार के उन लोगों में होती थी, जिन्होंने सीमित संसाधनों से शुरुआत कर एक बड़े कारोबारी समूह की स्थापना की।


आरके सिन्हा भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे थे। वह 2014 से 2020 तक बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सांसद रहे। राजनीति के साथ-साथ सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने एसआईएस समूह की स्थापना कर निजी सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़े उद्यम की नींव रखी थी।


पत्रकारिता से शुरू हुआ था सफर

रवींद्र किशोर सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को बिहार के बक्सर में हुआ था। उन्होंने राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई की। इसके बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और अपराध तथा राजनीतिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग की। वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बतौर पत्रकार उनके अनुभव ने उनके करियर को एक नई दिशा दी।पत्रकारिता के दौरान ही उनकी मुलाकात कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों और सामाजिक विचारकों से हुई। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों का भी उनके जीवन पर प्रभाव पड़ा। आगे चलकर उन्होंने पत्रकारिता से आगे बढ़कर उद्यमिता की दुनिया में कदम रखा और एक ऐसा कारोबार खड़ा किया, जिसने देश के निजी सुरक्षा क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई।


1974 में रखी SIS समूह की नींव

आरके सिन्हा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एसआईएस समूह की स्थापना को गिना जाता है। उन्होंने वर्ष 1974 में पटना से सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की शुरुआत की थी। इसके पीछे एक प्रमुख उद्देश्य पूर्व सैनिकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन समय के साथ कंपनी ने अपना विस्तार किया।


एसआईएस समूह ने निजी सुरक्षा सेवाओं और उससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों में अपनी पहचान बनाई। कंपनी का कारोबार भारत के बाहर भी फैला। आरके सिन्हा की कारोबारी यात्रा को अक्सर इस बात के उदाहरण के रूप में देखा जाता है कि किसी विचार को निरंतर मेहनत और बेहतर प्रबंधन के जरिए बड़े उद्यम में बदला जा सकता है।


भाजपा से जुड़ाव, फिर राज्यसभा तक पहुंचे

आरके सिन्हा का राजनीतिक सफर भी काफी महत्वपूर्ण रहा। वह जनसंघ के दौर से ही राजनीति में सक्रिय थे और बाद में भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा। सांसद के रूप में उन्होंने संसद की विभिन्न समितियों में भी काम किया।राजनीति, पत्रकारिता और कारोबार के अलावा सामाजिक गतिविधियों में भी उनकी रुचि रही। रोजगार सृजन, युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी पहलों में एसआईएस समूह की भूमिका का भी उल्लेख किया जाता है।


बिहार की राजनीति और कारोबार जगत में बनाई अलग पहचान

आरके सिन्हा का सफर कई मायनों में अलग रहा। उन्होंने पत्रकारिता से शुरुआत की, निजी सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा कारोबारी समूह खड़ा किया और फिर संसद तक पहुंचे। यही वजह है कि उनका नाम बिहार के उन प्रमुख लोगों में लिया जाता रहा, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।उनके निधन की खबर के बाद अब राजनीतिक और कारोबारी जगत की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी। हालांकि, खबर प्रकाशित करने से पहले निधन की आधिकारिक पुष्टि और अंतिम संस्कार से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।