Bihar News : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 30वें स्थापना दिवस समारोह में जहां एक ओर पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर मंच से ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के कार्यशैली पर सवाल उठाकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। सबसे तीखी टिप्पणी पार्टी के उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने की, जिन्होंने खुले मंच से कहा कि यदि नेता कार्यकर्ताओं से नहीं मिलेंगे तो संगठन को मजबूत करना मुश्किल हो जाएगा।
पटना स्थित वीरचंद पटेल मार्ग के राजद प्रदेश कार्यालय में आयोजित समारोह के दौरान उदय नारायण चौधरी ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि- पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा बन रही है कि तेजस्वी यादव उनसे आसानी से नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाती। ऐसे में संगठनात्मक मजबूती की बात करना आसान नहीं होगा।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "लोग कहते हैं कि आप कार्यकर्ताओं से नहीं मिलते हैं। जब तक कार्यकर्ताओं से नहीं मिलिएगा, तब तक पार्टी कैसे मजबूत होगी? कार्यकर्ता इंतजार करते रहते हैं, लेकिन आपसे मुलाकात नहीं हो पाती।" उदय नारायण चौधरी की यह टिप्पणी उस समय आई जब मंच पर लालू प्रसाद यादव समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता मौजूद थे। उनके इस बयान को कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सार्वजनिक इजहार माना जा रहा है।
उदय नारायण चौधरी की बात को पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने भी अपने अंदाज में आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव की सबसे बड़ी ताकत उनकी जनता और कार्यकर्ताओं तक सीधी पहुंच थी। गरीब-गुरबा उनसे आसानी से मिल लेते थे और यही वजह थी कि संगठन की जड़ें मजबूत हुईं। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग तेजस्वी यादव से भी उसी तरह की सहजता और उपलब्धता की उम्मीद करते हैं।
स्थापना दिवस के मंच से आई इन टिप्पणियों को राजनीतिक जानकार महज सलाह नहीं, बल्कि संगठन के भीतर से उठ रही उस आवाज के रूप में देख रहे हैं जो नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी की ओर इशारा करती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक रूप से यह कहना कि कार्यकर्ताओं को समय देना जरूरी है, संगठन के लिए एक गंभीर संदेश माना जा रहा है।
हालांकि तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में इन टिप्पणियों का नाम लिए बिना जवाब देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि केवल नेतृत्व के भरोसे पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती, बल्कि मंच पर बैठे सभी नेताओं को भी मैदान में उतरकर पसीना बहाना होगा। उन्होंने अनुशासन, संयम, परिश्रम और एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की है।
इस दौरान लालू प्रसाद यादव ने भी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आप सभी लोगों से आह्वान है कि एक होकर पार्टी को मजबूत करिए। गरीबों के हक में लड़िए। हम लड़े हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे।"
हालांकि पूरे समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा उदय नारायण चौधरी की उस टिप्पणी की रही, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं से मुलाकात न होने का मुद्दा उठाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की यह सार्वजनिक नसीहत इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव इन संकेतों को किस तरह लेते हैं और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।