Bihar Politics: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की संगठनात्मक कमेटी भंग किए जाने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी की पूरी कमेटी को भंग किए जाने के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कमेटी में किन नेताओं को जगह मिलेगी और संगठन की नई तस्वीर कैसी होगी। इसी बीच RJD नेता भाई वीरेंद्र ने पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों और नेताओं की कार्यशैली को लेकर बड़ा बयान दिया है।
भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व पर विश्वास जताया था। लोगों के बयान और सलाह के आधार पर पूरे बिहार की राष्ट्रीय जनता दल की कमेटी को भंग कर दिया गया। अब इसके बाद आगे क्या होता है, यह नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा। उन्होंने साफ कहा कि नई कमेटी के गठन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी के नेता ही करेंगे।
'नेता पर विश्वास किया, कमेटी भंग हो गई'
भाई वीरेंद्र ने कहा कि कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अपने नेतृत्व पर भरोसा किया। उनके अनुसार, पार्टी के स्तर पर जो सुझाव और राय सामने आए, उसके बाद पूरे बिहार की RJD कमेटी को भंग कर दिया गया। अब पार्टी के सामने संगठन को नए सिरे से तैयार करने की चुनौती है।
कमेटी भंग होने के बाद पार्टी के अंदर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। पुराने पदाधिकारियों की जगह अब किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलेगी, इस पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर है। खास तौर पर उन नेताओं की निगाहें नई कमेटी पर टिकी हैं, जो लंबे समय से संगठन में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
भाई वीरेंद्र का तंज- 'कुछ लोगों को पैसा कमाने की भूख'
RJD नेता ने पार्टी और राजनीति में सक्रिय कुछ लोगों पर तीखा हमला भी बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को राजनीति में पैसा कमाने की भूख हो गई है। वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें 'छपास की बीमारी' हो गई है। हकीकत यह है कि- लत -लक्षण और बाय यह तीनों मरले पर जाए।भाई वीरेंद्र के इस बयान को पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। 'छपास की बीमारी' वाले बयान के जरिए उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा, जो लगातार मीडिया में बने रहने या अपने बयानों के जरिए सुर्खियां हासिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे लोगों को कैसे रोका जा सकता है। उनका कहना था कि जनता ऐसे लोगों को रोकना चाहती है, लेकिन अब देखना होगा कि संगठन की नई कमेटी में किन लोगों को शामिल किया जाता है।
नई कमेटी पर टिकी सबकी नजर
पूरी राज्य कमेटी भंग किए जाने के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा नई कमेटी को लेकर है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि नई टीम में पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिलेगा या संगठन में नए नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।नई कमेटी के गठन के साथ पार्टी संगठन में बदलाव की उम्मीद भी जताई जा रही है। माना जा रहा है कि नेतृत्व ऐसे चेहरों को जिम्मेदारी देना चाहेगा, जो संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में भूमिका निभा सकें।हालांकि, नई कमेटी में कौन-कौन शामिल होगा, इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। भाई वीरेंद्र ने भी इस सवाल का जवाब नेतृत्व पर छोड़ दिया।
'कमेटी कब बनेगी, इसका जवाब नेता देंगे'
नई कमेटी के गठन की समयसीमा को लेकर पूछे गए सवाल पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि कमेटी कब बनेगी, इसका जवाब पार्टी के नेता ही देंगे। यानी फिलहाल पार्टी कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के फैसले का इंतजार करना होगा। RJD की पूरी कमेटी भंग होने के बाद संगठन के भीतर नए समीकरण बनने की संभावना भी जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई टीम में किन नेताओं को जगह मिलती है और किन चेहरों को संगठन से बाहर रखा जाता है।
संगठन में बदलाव से क्या बदलेगा?
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि RJD का नया संगठनात्मक ढांचा किस तरह तैयार किया जाता है। कमेटी भंग करने के फैसले के बाद पार्टी के सामने केवल नए पदाधिकारियों का चयन ही चुनौती नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय, संगठन की सक्रियता और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करना भी अहम होगा।
भाई वीरेंद्र के बयान ने इस पूरी कवायद को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ जहां नई कमेटी को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्सुकता है, वहीं दूसरी तरफ राजनीति में 'पैसा कमाने की भूख' और 'छपास की बीमारी' जैसे उनके तीखे शब्दों ने नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें RJD नेतृत्व के अगले कदम पर हैं। नई कमेटी में कौन जगह बनाएगा, पुराने नेताओं की वापसी होगी या नए चेहरों को मौका मिलेगा—इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा।