PATNA: आरा में हुए सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है। सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के नेता भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। राजद नेता और परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार ने इसे लेकर सम्राट सरकार और उनकी पुलिस को घेरने का काम किया है। मीडिया से बातचीत करते हुए संजीव ने कहा कि बिहार में बात बेरोजगारी पर होनी चाहिए लेकिन बात 'ऑपरेशन लंगड़ा' और अपराधी को नेपाल और पाकिस्तान भेजने की हो रही है। बिहार में लगातार फेक एनकाउंटर हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भरत भूषण तिवारी ने फेसबुक पर लाइव करके दिखा दिया कि हथियार फेंकने के बाद भी उसकी पुलिस वालों ने हत्या कर दी। फेक एनकाउंट का वीडियो सामने आने के बाद ही लोग जागे। तब लोगों को भी पता चल गया कि क्राइम को छिपाने के लिए आए दिन बिहार में फेक एनकाउंटर हो रहा है। डॉ. संजीव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद भरत तिवारी को विक्षिप्त बोल रहे थे, उसके बावजूद पुलिस कर्मियों ने उसकी हत्या कर दी। कही कानून में है क्या कि किसी पागल को पकड़कर उसका मर्डर कर दीजिए?
संजीव ने मांग की है कि दोषी पुलिस कर्मियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। बकैती से सरकार नहीं चलती, इसके लिए ग्राउंड में काम करना पड़ता है। बिहार पुलिस नौटंकीबाजी कर रही है। ये सब भ्रष्टाचार में लिप्ट है। बिहार में बाबा-मामा-नाना वाला नौटंकी चल रहा है। डॉ. संजीव ने भी माना कि भरत तिवारी का अपनी बातों को रखने और विरोध करने का तरीका गलत था, लेकिन उसके लिए अलग कानून है। उसे आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार कर जेल भेज देते, उसे मारने की क्या जरूरत थी। यह बिलकुल गलत हुआ है। मर्डर करने वाले ने जघन्य अपराध किया है।
संजीव कुमर ने आगे कहा कि बिहार पुलिस ने प्लानिंग करके भरत तिवारी की हत्या की है। मानसिक रोगी का इनकाउंटर करना कही से उचित नहीं है। निर्दोष को पकड़कर आप हत्या कर रहे हैं, इससे दुखद कोई घटना नहीं हो सकती। इस घटना की मैं घोर निंदा करता हूं। वही राजद नेता बंटू सिंह ने भी इस घटना को लेकर सरकार और पुलिस पर जमकर हमला बोला। कहा कि यह एनकाउंटर नहीं हत्या है। सिस्टम के लिए उस लड़के ने एक क्रांति लिखी है, जो बिहार में सिस्टम के खिलाफ आगाज है।
बता दें कि भरत भूषण तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले थे। 28 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता की 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पिछले दो साल से वह फेसबुक पर लाइव आकर अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखता था और सरकार तक अपनी बातों को पहुंचाने की कोशिश करता था। इलाके में बाढ़, मिट्टी भराव और टूटी सड़कों को लेकर प्रशासन के खिलाफ लगातार वो आवाज उठा रहा था। कथित तौर पर प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज होकर उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह हाथ में अवैध हथियार लहराता हुआ नजर आया था। भोजपुर पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, शुरुआत में भरत भूषण को 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' पाया गया था और उन्हें काबू में करने का प्रयास किया जा रहा था।
पुलिस का आरोप है कि भरत ने उन पर लगातार रुक-रुककर फायरिंग की। आत्मरक्षा में एसटीएफ के जवानों ने उनके पैर और कमर के निचले हिस्से को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। घायल होने के बाद उन्हें PMCH रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने इसे 'फर्जी एनकाउंटर' करार दिया। फेसबुक लाइव के आखिरी वीडियो के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पुलिस की चेतावनी के बाद भरत भूषण तिवारी ने अपनी पिस्तौल फेंक दी थी और सरेंडर कर दिया था, लेकिन उसके बावजूद पुलिस ने उस निहत्थे युवक पर गोलियां दाग दीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए भोजपुर के एसपी ने थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया और मामले में 3 अलग-अलग FIR दर्ज किया गया। जिसमें भरत भूषण तिवारी के पिता और भाई को भी अवैध हथियार की जानकारी छुपाने और संरक्षण देने के आरोप में नामजद किया गया।
इस घटना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने आरा-बक्सर हाईवे को जाम कर जमकर प्रदर्शन किया।वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे समेत सत्ताधारी दल के कई नेताओं ने भी पुलिस की इस कार्रवाई और कथित लापरवाही पर सवाल उठाते हुए सरकार से इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग कर दी। जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अब मुठभेड़ से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक जांच का मुख्य उद्देश्य घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना और जनता के बीच उठ रहे सभी सवालों का निष्पक्ष उत्तर देना है। जांच के दौरान पुलिस कार्रवाई, घटनास्थल की परिस्थितियां, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। सरकार के निर्णय के अनुसार, उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। न्यायिक जांच के दौरान संबंधित पुलिस अधिकारियों, प्रत्यक्षदर्शियों, स्थानीय ग्रामीणों तथा अन्य पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके साथ ही घटनास्थल से जुड़े सभी दस्तावेज, वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वही इस मामले पर बीजेपी नेता भी सवाल खड़े कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए अश्विनी चौबे ने कहा कि भरत तिवारी ने गरीबों के लिए लड़ाई लड़ी है। जो खून बहा है उस खून को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। भरत के परिजनों से मिलने के लिए जा रहा हूं। मुजफ्फरपुर के बाद भागलपुर, बेगूसराय और समस्तीपुर में कार्यक्रम में शामिल होना था। सारे यात्रा को स्थगित कर मृतक के परिजनों से मिलने के लिए आरा जा रहा हूं।
अश्विनी चौबे ने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि भरत तिवारी की हत्या षड्यंत्र के तहत की गयी है। इस मामले को लेकर सरकार जागरुक है, बिहार सरकार ने कुछ पुलिस पदाधिकारियों को सस्पेंड भी किया है। लेकिन आने वाले दिनों में उस हत्यारे को चिन्हित कर उसके बंदूक को छीन कर जेल में डालने का काम करेंगे। अश्विनी चौबे ने कहा कि पुलिसिया जुर्म को हम बढ़ने नहीं देंगे और लोकतंत्र की रक्षा करेंगे। लोकतंत्र को कभी समाप्त नहीं होने दूंगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक सामाजिक लड़का था। वह हमेशा समाज के गरीब, शोषित और वंचित वर्गों के हक के लिए आवाज उठाता था और उनकी लड़ाई लड़ता था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "भरत तिवारी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उसके खून का एक-एक कतरा खाली नहीं जाने दिया जाएगा। इस घटना ने हम सभी को झकझोर कर रख दिया है।"
मामले की गंभीरता को देखते हुए अश्विनी चौबे ने मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में तय अपने सभी आगामी राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। उन्होंने घोषणा की कि वे सीधे आरा के लिए रवाना हो रहे हैं, जहां वे मृतक भरत तिवारी के शोकाकुल परिवार वालों से मुलाकात करेंगे। चौबे ने कहा कि इस दुख की घड़ी में वे और उनकी पार्टी पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव न्याय दिलाया जाएगा।
बिहार की कानून-व्यवस्था और अपनी ही सरकार का बचाव करते हुए चौबे ने कहा कि हमारी सरकार पूरी तरह से न्यायप्रिय और संवेदनशील है। बिहार में एनडीए की सरकार एक अच्छी और सुशासन वाली सरकार है। घटना की जानकारी मिलते ही सरकार ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की है, जिसके तहत मामले में संलिप्त पाए गए चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं कर रही है।
अश्विनी चौबे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि केवल निलंबन ही अंतिम कार्रवाई नहीं है। इस पूरे हत्याकांड के पीछे जो भी असली चेहरे हैं, उन्हें बहुत जल्द चिन्हित किया जाएगा। जिस किसी के द्वारा भी इस जघन्य हत्याकांड की घटना को अंजाम दिया गया है या साजिश रची गई है, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हमारी सरकार अपराधियों को कड़ा सबक सिखाएगी और पीड़ित परिवार को पूरा इंसाफ मिलकर रहेगा।