Bihar News : बिहार में सरकारी ठेकों में कथित भ्रष्टाचार के बहुचर्चित मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस पूरे प्रकरण में गिरफ्तार ठेकेदार रिशुश्री से पूछताछ को जांच एजेंसियां बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं। विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) अब उसे रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को अदालत में सात से दस दिनों की रिमांड की मांग करते हुए आवेदन दायर किया जा सकता है। इसके लिए पूछताछ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों की सूची भी तैयार की जा रही है।


गौरतलब है कि गिरफ्तारी के बाद रिशुश्री को न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया था। अब जांच एजेंसी का मानना है कि उसके पास मौजूद जानकारियां सरकारी ठेकों में हुए कथित भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क को उजागर कर सकती हैं।


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी ठेके हासिल करने के बदले रिशुश्री ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार के लाभ पहुंचाए। आरोप है कि कुछ अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं का खर्च उठाया गया, महंगे उपहार दिए गए तथा देश और विदेश में संपत्तियां खरीदने में भी मदद की गई।


इन्हीं आरोपों के आधार पर एसवीयू अब रिशुश्री के बैंक खातों, कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच करने की तैयारी में है। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि किन-किन अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया और इसके बदले में क्या सुविधाएं प्राप्त की गईं।


ईडी की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रिशुश्री को कई बार टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं पहले ही मिल जाती थीं। इन जानकारियों के आधार पर वह अपने करीबी ठेकेदारों और अधिकारियों को फायदा पहुंचाने में सफल रहता था। ऐसे में पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश होगी कि सरकारी गोपनीय सूचनाएं किस स्तर से लीक की जाती थीं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।


जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि रिशुश्री का प्रभाव केवल ठेके हासिल करने तक सीमित नहीं था। आरोप है कि उसने कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों को भी प्रभावित किया। अपने हितों के अनुरूप जिला स्तर पर पसंदीदा अधिकारियों की तैनाती कराई गई ताकि परियोजनाओं और ठेकों की स्वीकृति में किसी प्रकार की बाधा न आए। इसके बदले प्रभावशाली लोगों को बड़ी रकम दिए जाने के भी आरोप हैं।


एसवीयू की जांच में ईडी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। दरअसल, वर्तमान मामला मुख्य रूप से ईडी द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दर्ज किया गया था। ऐसे में जांच को आगे बढ़ाने के लिए एसवीयू ईडी से तकनीकी और दस्तावेजी सहयोग लेगी।


ईडी की छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए थे। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर की ट्रेवल एजेंसियों और बिहार के विभिन्न सरकारी अधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर मिली जानकारी भी जांच का आधार बनी हुई है।


रिशुश्री पिछले करीब दस वर्षों से बिहार में ठेकेदारी के कारोबार में सक्रिय बताया जाता है। इस दौरान उसने अपने तथा सहयोगियों के नाम पर कई कंपनियां संचालित कीं। अब जांच एजेंसियां इन कंपनियों के बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों की भी पड़ताल करेंगी। माना जा रहा है कि इस जांच में कई नए नाम सामने आ सकते हैं और भ्रष्टाचार के नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।


उल्लेखनीय है कि ईडी ने जुलाई 2025 में ही इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की थी। बाद में नवंबर 2025 में विस्तृत रिपोर्ट सौंपते हुए कई अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसके बाद अलग-अलग चरणों में कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। अब सभी की निगाहें एसवीयू की आगामी पूछताछ और रिशुश्री से मिलने वाली नई जानकारियों पर टिकी हैं।