Bihar Tender Scam : बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में अब जांच की सुई तेजी से आगे बढ़ रही है। करोड़ों रुपये के सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच गिरफ्तार ठेकेदार रिशु श्री उर्फ रंजन सिन्हा को विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया है। माना जा रहा है कि इस दौरान होने वाली पूछताछ में कई ऐसे राज सामने आ सकते हैं, जो बिहार की नौकरशाही और सरकारी ठेकों की व्यवस्था को लेकर बड़े खुलासे कर सकते हैं।


मंगलवार को निगरानी अदालत ने बेऊर जेल में बंद रिशु श्री को पांच दिनों के लिए SVU की हिरासत में देने की अनुमति दी। अदालत के आदेश के बाद SVU की टीम सीधे बेऊर जेल पहुंची और वहां से उसे अपने कार्यालय लेकर गई, जहां उससे लगातार पूछताछ की जाएगी।


सात दिन की मांग, पांच दिन की मंजूरी

विशेष निगरानी इकाई ने अदालत से रिशु श्री की सात दिनों की रिमांड मांगी थी। जांच एजेंसी का तर्क था कि घोटाले की परतें खोलने और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए लंबी पूछताछ जरूरी है। हालांकि रिशु श्री के वकील डॉ. अभिषेक प्रियदर्शी ने इस मांग का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पांच दिनों की रिमांड मंजूर कर दी। अब जांच एजेंसी का पूरा फोकस इस बात पर है कि आखिर सरकारी विभागों में टेंडर हासिल करने के लिए किन-किन लोगों का नेटवर्क सक्रिय था और रिशु श्री को किस स्तर तक संरक्षण मिलता रहा।


अधिकारियों से मिलीभगत के आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार टेंडर घोटाले की जड़ें कई सरकारी विभागों तक फैली हुई हैं। आरोप है कि रिशु श्री ने प्रभावशाली अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर सरकारी ठेकों की प्रक्रिया को प्रभावित किया। जांचकर्ताओं का मानना है कि पूछताछ के दौरान उन अधिकारियों और बिचौलियों के नाम सामने आ सकते हैं, जो लंबे समय से इस नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं। SVU अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि सरकारी टेंडरों को मैनेज करने, प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने और कमीशन के लेन-देन का पूरा तंत्र कैसे काम करता था।


घर से गिरफ्तारी, फिर जेल

रिशु श्री को विशेष निगरानी इकाई ने 28 मई को पटना के मीठापुर स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और तब से वह बेऊर जेल में बंद था। अब रिमांड मिलने के बाद जांच एजेंसी को उससे सीधे पूछताछ करने का अवसर मिला है। जांच अधिकारियों का मानना है कि उसके पास मौजूद जानकारी घोटाले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर कर सकती है। इसी वजह से उसकी रिमांड को इस मामले में बेहद अहम माना जा रहा है।


ED की जांच में भी हुए थे कई दावे

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी पहले से जांच कर चुका है। वर्ष 2024 में ED ने रिशु श्री के आवास और कंपनी कार्यालय पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान कई डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन, दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद किए गए थे।


इसके बाद जुलाई 2024 से अक्टूबर 2024 के बीच ED ने पीएमएलए के तहत उसका बयान दर्ज किया था। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार उस दौरान यह दावा सामने आया था कि सरकारी विभागों में ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर बड़े अधिकारियों को कमीशन दिया जाता था। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।


सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

एक तरफ SVU की पूछताछ जारी है, वहीं दूसरी ओर रिशु श्री को सुप्रीम कोर्ट से आंशिक राहत भी मिली है। शीर्ष अदालत ने ED को निर्देश दिया है कि वह अगले चार सप्ताह तक इस मामले में उसे गिरफ्तार न करे। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने उसे पटना हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति देते हुए कहा है कि हाईकोर्ट निर्धारित अवधि के भीतर उसकी याचिका पर विचार करे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।


अब सबकी नजर SVU की पूछताछ पर

बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में अब सबसे ज्यादा नजरें SVU की पूछताछ पर टिकी हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पांच दिनों की रिमांड के दौरान कई अहम दस्तावेजी और मौखिक जानकारियां सामने आएंगी। यदि पूछताछ में बड़े अधिकारियों, बिचौलियों या राजनीतिक संपर्कों से जुड़े नए तथ्य निकलते हैं, तो आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। फिलहाल बिहार की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यही चर्चा है कि रिशु श्री की पूछताछ इस घोटाले की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।