Bihar News : बिहार में चर्चित टेंडर घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने टेंडर कारोबारी रिशु श्री के बेहद करीबी सहयोगी और कथित डमी डायरेक्टर संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि संतोष की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में ऐसे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनसे करोड़ों रुपये के टेंडर, रिश्वतखोरी, फर्जी बिलिंग और बेनामी संपत्तियों के नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।


SVU के अनुसार संतोष कुमार को पटना के मीठापुर इलाके से गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि वह पिछले करीब 15 वर्षों से रिशु श्री के साथ जुड़ा हुआ था और उसके कारोबारी एवं वित्तीय मामलों में अहम भूमिका निभाता था। पूछताछ के दौरान संतोष ने कई ऐसी जानकारियां दी हैं, जिनके आधार पर जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है। अब एजेंसी उसे रिमांड पर लेकर और गहराई से पूछताछ करने की तैयारी में है।


रिश्वत पहुंचाने और बेनामी संपत्ति खरीदने का आरोप

जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक संतोष कुमार ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह कथित तौर पर विभिन्न अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाने और रिशु श्री के लिए बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में सहयोग करता था। एजेंसी का दावा है कि वह पूरे नेटवर्क में पैसों के लेन-देन और निवेश की रणनीति तैयार करने में भी शामिल था। SVU का मानना है कि संतोष सिर्फ एक कर्मचारी नहीं था, बल्कि वह रिशु श्री के आर्थिक नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो कई संवेदनशील वित्तीय गतिविधियों की निगरानी करता था।


फर्जी खर्च दिखाकर निकाली जाती थी नकदी

जांच में यह भी सामने आया है कि रिशु श्री से जुड़ी कंपनी ‘मातृस्वा कंस्ट्रक्शन’ में कई बार फर्जी खर्च दिखाकर खातों से बड़ी रकम निकाली जाती थी। अधिकारियों का आरोप है कि कंपनी के रिकॉर्ड में खर्च को वास्तविक से अधिक दिखाया जाता था, जिससे नकद राशि निकालने का रास्ता तैयार हो जाता था। जांच एजेंसी का दावा है कि निकाली गई यह रकम बाद में विभिन्न स्तरों पर कथित तौर पर रिश्वत देने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। फिलहाल एजेंसी इन वित्तीय लेन-देन के दस्तावेजों की जांच कर रही है।


ईंधन के फर्जी बिलों का इस्तेमाल

SVU की जांच में यह भी पता चला है कि वाहनों के ईंधन से जुड़े फर्जी बिल तैयार कर कंपनी के खर्च को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता था। इससे कंपनी के खातों से अतिरिक्त धनराशि निकालने में मदद मिलती थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह तरीका लंबे समय तक नकदी जुटाने के लिए अपनाया गया। अब एजेंसी संबंधित बिलों और भुगतान रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।


125 करोड़ रुपये के टेंडर पर सवाल

जांच के दौरान 125 करोड़ रुपये के एक बड़े सरकारी टेंडर को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। आरोप है कि जल संसाधन विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का टेंडर पहले अहमदाबाद की एक कंपनी को दिलाया गया और बाद में उसे सब-कॉन्ट्रैक्ट के जरिए रिशु श्री की कंपनी को सौंप दिया गया। बताया जा रहा है कि यह परियोजना सुपौल जिले के बीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर से संबंधित थी। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि टेंडर प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया था।


2010 से रिशु श्री के साथ था संतोष

SVU के मुताबिक संतोष कुमार और रिशु श्री का संबंध वर्ष 2010 से है। शुरुआती दिनों में रिशु छोटे स्तर पर कारोबार करता था, लेकिन समय के साथ उसका नेटवर्क बढ़ता गया। इसी दौरान संतोष भी उसके साथ लगातार जुड़ा रहा।जांच में यह बात सामने आई है कि बाद में संतोष को रिशु श्री से जुड़ी कई कंपनियों में डायरेक्टर बनाया गया था। एजेंसी इन कंपनियों की वित्तीय गतिविधियों की भी जांच कर रही है।


IAS संजीव हंस का नाम भी जांच के दायरे में

इस पूरे मामले में तत्कालीन जल संसाधन विभाग के सचिव रहे IAS अधिकारी संजीव हंस का नाम भी जांच के केंद्र में बताया जा रहा है। SVU द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर कई पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा। फिलहाल एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगाल रही है।


मोबाइल फोन से मिले महत्वपूर्ण दस्तावेज

जांच एजेंसी का दावा है कि मुख्य आरोपी रिशु श्री के मोबाइल फोन से कई गोपनीय सरकारी दस्तावेज बरामद हुए हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि ये दस्तावेज उसके पास कैसे पहुंचे और इन्हें किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा जांच में पवन कुमार नामक एक व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है, जिस पर कथित कमीशन और भुगतान का रिकॉर्ड रखने का आरोप है।


महिला को भुगतान का भी आरोप

SVU ने जांच के दौरान एक और गंभीर दावा किया है। एजेंसी के अनुसार एक महिला को चुप कराने के लिए कथित तौर पर 20 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। जांचकर्ता इस लेन-देन की भी पड़ताल कर रहे हैं और इससे जुड़े बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।


संतोष कुमार की गिरफ्तारी को पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ से टेंडर आवंटन, रिश्वतखोरी और बेनामी निवेश से जुड़े कथित नेटवर्क के बारे में और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल पूरे मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।