PATNA: भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा), बिहार के अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह ने बिल्डरों से कहा है प्राधिकरण उनसे प्राप्त सुझाओं को काफी गंभीरता से लेता है और उसके आधार पर व्यवसाय सुगमता (ease of doing business) को ध्यान में रखकर अनेक कदम उठाये गए हैं। रेरा बिहार द्वारा बिल्डरों के हेतु आयोजित संवेदीकरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि निबंधन हेतु जमा किये जाने वाले दस्तावेजों की संख्या में काफी कमी की गयी है एवं फ़िल्टर सिस्टम को भी और सुदृढ़ किया गया है ताकि निबंधन के लिए आवेदन देते समय आसानी हो। उन्होंने बिल्डरों से कहा कि वे भी अपनी परियोजना शुरू करने से पहले ज़मीन के सारे कागज़ात की जांच कर लें ताकि उन्हें भविष्य में कोई परिशानी नहीं हो।
इस संवेदीकरण कार्यशाला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य वैसे बिल्डरों, जिनके प्रोजेक्ट का निबंधन अगस्त से दिसम्बर 2026 के बीच समाप्त होना है, को उनके प्रोजेक्ट के वर्तमान स्थिति से अवगत कराना था एवं उन्हें यह भी बताना था कि अगर प्रोजेक्ट समय से पूरा नहीं होता है तो उन्हें क्या कदम उठाने चाहिए ताकि घर खरीददारों को उनका फ्लैट मिल सके। इस कार्यशाला में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वरिष्ठ अधिकारी श्री विश्वजीत चौबे ने भी हिस्सा लिया और उनके संस्थान द्वारा विकसित किये गए नए तकनीक की जानकारी दी जिसका उपयोग कर राज्य के बिल्डर काफी कम समय में बहुमंजिला ईमारत का निर्माण कर सकते हैं। रेरा बिहार की जांच आयुक्त श्री संजय कुमार सिंह, सचिव श्री अनिमेष पाण्डेय, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री राजेश थदानी एवं क्रेडाई बिहार के संयुक्त सचिव श्री मनीष कुमार सहित बड़ी संख्या में बिल्डरों ने भाग लिया।
कार्यशाला में रेरा बिहार द्वारा दो प्रस्तुतीकरण दिए गए। पहला प्रस्तुतीकरण अगस्त से दिसम्बर 2026 के बीच समाप्त होने वाले निबंधित प्रोजेक्ट्स के वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया। इसमें से यह बात उभरकर सामने आई कि 20 प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जहाँ काम लगभग पूरा हो चूका है, वहीँ 11 प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जहाँ काम की गति को बढाकर उनको समय से पूरा किया जा सकता है। यह बात भी सामने आई कि 17 निबंधित प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जिनके निर्माण की गति संतोषप्रद नहीं है और इनके प्रमोटर्स को प्रोजेक्ट पूरा करने हेतु निबंधन अवधी विस्तार लेना पड़ेगा।
रेरा बिहार के दुसरे प्रस्तुतीकरण में प्रतिभागी बिल्डरों को प्राधिकार द्वारा जारी रैंकिंग में इस्तेमाल होने वाले मापदंडों की जानकारी दी गयी और उनसे कहा गया कि वे इसके बेहतरी हेतु अपने सुझाव प्राधिकरण को भेज सकते हैं। डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी श्री विश्वजीत चौबे ने अपने प्रस्तुतीकरण में उनके संस्थान द्वारा विकसित किये गए तकनीक की विस्तृत जानकारी दी एवं बिल्डर्स से कहा कि वे भी इस तकनीक का लाभ अपने काम के क्षेत्र में ले सकते हैं।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए रेरा जांच आयुक्त श्री संजय सिंह ने कहा कि वे अपनी निबंधित परियोजनाओं को समय से जरूर पूरा करें ताकि घर खरीददारों को उनका फ्लैट समय से मिले। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करने से रेरा बिहार द्वारा जारी रैंकिंग में भी उनका स्थान बढेगा और बाज़ार में भी इनकी साख बढ़ेगी।
रेरा बिहार के सचिव ने प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्य से अवगत कराया एवं विशेष कार्य पदाधिकारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं बिल्डरों के प्रश्नों का उत्तर दिया एवं उनके शंकाओं का समाधान किया।