BIHAR NEWS : बिहार की राजनीति में शनिवार को एक दिलचस्प और चर्चित घटनाक्रम देखने को मिला। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे, लेकिन यह मुलाकात नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
जानकारी के अनुसार, आरसीपी सिंह को मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश की अनुमति मिल गई थी, लेकिन उन्हें नीतीश कुमार से मिलने का अवसर नहीं मिला। वह कुछ समय तक आवास के बरामदे में बैठकर पूर्व मुख्यमंत्री का इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें यह संदेश दिया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री अन्य कार्यों में व्यस्त हैं और मुलाकात संभव नहीं हो पाएगी। इसके बाद आरसीपी सिंह वापस लौट गए। हलांकि, इससे पहले नीतीश अपने कमरे से निकले तो अचानक उनकी नजर RCP पर पड़ी। RCP ने प्रणाम किया। नीतीश ने आम कार्यकर्ता की तरह की इशारों में जवाब दिया और अंदर चले गए।
वहीं, RCP सिंह के समर्थक ने कहा कि MLC संजय गांधी और ललन सराफ ने हमें नीतीश कुमार जी से मिलने से रोका। इसके बाद RCP सिंह वापस लौट गए। इस दौरान उनके कार्यकर्ताओं ने दोनों MLC के खिलाफ नारेबाजी भी की।आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की मुलाकात नहीं होने की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गईं। खासकर ऐसे समय में जब कुछ महीने पहले ही आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने संबंधों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया था।
इस बीच जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का पुराना बयान भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। 13 फरवरी को पत्रकारों द्वारा आरसीपी सिंह को लेकर पूछे गए सवाल पर ललन सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि वह आरसीपी सिंह को नहीं जानते हैं।
ललन सिंह ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू की सीटें 74 से घटकर 42 हो गई थीं, जिसके लिए आरसीपी सिंह जिम्मेदार थे। उन्होंने कहा था कि 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता ने एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा था कि पार्टी को अब ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है। उनके लिए दरवाजा बंद है।
गौरतलब है कि इसी साल मकर सक्रांति के समय पटना में आयोजित एक चूड़ा-दही भोज कार्यक्रम में भी नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह एक ही मंच पर मौजूद थे। हालांकि उस दौरान दोनों नेताओं के बीच कोई औपचारिक मुलाकात नहीं हो सकी थी।
उस कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा था कि उनका और नीतीश कुमार का संबंध 25 वर्षों से अधिक पुराना है। उन्होंने कहा था कि दोनों नेताओं के बीच कोई दूरी नहीं है। जेडीयू में संभावित वापसी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा था कि खरमास समाप्त होने दीजिए, उसके बाद जवाब मिल जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरसीपी सिंह का मुख्यमंत्री आवास पहुंचना और फिर बिना मुलाकात लौट जाना कई सवाल खड़े करता है। एक ओर आरसीपी सिंह लगातार नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने रिश्तों की बात करते रहे हैं, वहीं जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता उनके प्रति सख्त रुख अपनाए हुए हैं।
आरसीपी सिंह लंबे समय तक जेडीयू के संगठन महासचिव और राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। बाद में वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी बने। हालांकि समय के साथ उनका और नीतीश कुमार का राजनीतिक संबंध कमजोर पड़ गया और उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए, लेकिन वहां भी उनकी सक्रिय भूमिका सीमित रही। बाद में उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई। हाल ही में विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी का विलय जन सुराज में कर दिया था।
अब पूर्व मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस असफल मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर आरसीपी सिंह की भूमिका और उनके भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह घटनाक्रम केवल एक औपचारिक मुलाकात की कोशिश थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है।