Indian Railway : भारतीय रेलवे अब टिकट बुकिंग सिस्टम में ऐसा बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिससे यात्रियों को त्योहारों और छुट्टियों के सीजन में राहत मिलने वाली है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि तत्काल टिकट बुक करते समय वेबसाइट हैंग हो जाती है, ऐप स्लो चलने लगता है या पेमेंट फेल हो जाता है। लेकिन अब रेलवे क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से पूरे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को हाईटेक बनाने जा रही है।


रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक नया सिस्टम अगस्त 2026 से शुरू हो सकता है। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने भी इस प्रोजेक्ट को अगस्त के पहले सप्ताह तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। रेलवे का दावा है कि यह भारतीय रेल के इतिहास का सबसे बड़ा डिजिटल बदलाव साबित होगा।


अभी स्थिति यह है कि जैसे ही तत्काल टिकट की बुकिंग शुरू होती है, लाखों लोग एक साथ लॉगिन कर लेते हैं। ऐसे में सर्वर पर भारी दबाव पड़ता है और वेबसाइट का रिस्पॉन्स काफी धीमा हो जाता है। कई बार टिकट बुक होने से पहले ही पेमेंट फेल हो जाता है। लेकिन नए सिस्टम में रेलवे की टिकट बुकिंग क्षमता को काफी बढ़ाया जाएगा। फिलहाल रेलवे प्रति मिनट लगभग 25 हजार टिकट बुक कर पाती है, जबकि नई तकनीक आने के बाद यह क्षमता बढ़कर 5 लाख टिकट प्रति मिनट से ज्यादा हो जाएगी।


रेलवे का नया क्लाउड आधारित सिस्टम एक साथ करीब दो करोड़ एक्टिव यूजर्स को संभाल सकेगा। इसका मतलब यह हुआ कि चाहे त्योहार का समय हो या गर्मी की छुट्टियां, वेबसाइट और ऐप पहले की तरह बार-बार क्रैश नहीं होंगे। यात्रियों को टिकट बुकिंग के दौरान तेज और स्मूद अनुभव मिलेगा।


इस सिस्टम की सबसे खास बात इसका एआई आधारित फीचर होगा। अब अगर कोई यात्री वेटिंग टिकट बुक करेगा, तो उसी समय स्क्रीन पर यह जानकारी दिखाई दे जाएगी कि टिकट कंफर्म होने की कितनी संभावना है। यानी यात्रियों को अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि टिकट कंफर्म होगा या नहीं।


इतना ही नहीं, अगर किसी ट्रेन में सीट उपलब्ध नहीं होगी तो सिस्टम खुद दूसरी ट्रेन का सुझाव देगा। यात्री को यह भी बताया जाएगा कि किस ट्रेन में सीट खाली है या किसमें कंफर्म टिकट मिलने की संभावना ज्यादा है। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और बार-बार अलग-अलग ट्रेन चेक करने की परेशानी भी खत्म होगी।


रेलवे दलालों और फर्जी बुकिंग पर भी बड़ी कार्रवाई करने जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कई एजेंट बॉट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके सेकंडों में टिकट बुक कर लेते हैं, जिससे आम यात्रियों को तत्काल टिकट नहीं मिल पाता। अब रेलवे एडवांस्ड एआई तकनीक से ऐसे बॉट्स को पहचानकर ब्लॉक करेगी। इससे असली यात्रियों को फायदा मिलेगा और टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।


रेलवे का कहना है कि नए सिस्टम में लॉगिन से लेकर पेमेंट तक की पूरी प्रक्रिया बेहद तेज होगी। अभी तत्काल टिकट बुकिंग के शुरुआती दो मिनट में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक पेमेंट फेलियर हो जाते हैं। लेकिन नई तकनीक आने के बाद इसे 99.9 प्रतिशत सफलता दर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।


कुल मिलाकर देखा जाए तो आने वाले महीनों में रेलवे का टिकट बुकिंग सिस्टम पूरी तरह बदलने वाला है। यात्रियों को तेज बुकिंग, कम वेटिंग, कम सर्वर समस्या और ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी। त्योहारों में तत्काल टिकट पाने की भागदौड़ और तनाव भी काफी हद तक कम हो सकता है।