पटनाः बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे के बाद पूरी रात नदी किनारे अफरातफरी का माहौल रहा। भोज खाने के लिए निकले लोगों से भरी नाव अचानक नदी में पलट गई और देखते ही देखते कई जिंदगियां पानी में समा गईं। हादसे में अब तक 13 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। लेकिन त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई है। ग्रामीणों को अब भी आशंका है कि नाव पर सवार कुछ लोग लापता हो सकते हैं। यही वजह है कि बुधवार की सुबह एक बार फिर नदी में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जाएगा।

इस दर्दनाक हादसे के बाद अब राघोपुर में दो चीजों पर सबकी नजर है। पहली, नदी में चलने वाला सुबह का सर्च ऑपरेशन और दूसरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का राघोपुर दौरा। तेजस्वी यादव आज हादसे वाली जगह पहुंचेंगे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात करेंगे।

रात के अंधेरे में थमी तलाश, सुबह फिर नदी में उतरेंगे गोताखोर

हादसा मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे हुआ। बताया गया कि बच्चे और ग्रामीण नाव पर सवार होकर पास के गांव में भोज खाने जा रहे थे। इसी दौरान नाव नदी में पलट गई। अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आईं। नदी में कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था और तेज बहाव ने बचाव दल की चुनौती और बढ़ा दी।

हादसे की सूचना मिलते ही SDRF की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों को भी खोजबीन में लगाया गया। कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी।रात में सीमित रोशनी के बीच तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन नदी के अंदर काफी दूर तक खोजबीन करना संभव नहीं था। अब बुधवार की सुबह उजाला होते ही सर्च ऑपरेशन को फिर से तेज किया जाएगा। SDRF और स्थानीय गोताखोर नदी के अलग-अलग हिस्सों में तलाश करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि नाव पर करीब 30 लोग सवार थे। ऐसे में प्रशासन की ओर से बरामद शवों और सुरक्षित निकाले गए लोगों की संख्या का मिलान भी किया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने लोग अब भी लापता हैं।

13 बच्चों की मौत ने बढ़ाया दर्द

हादसे की सबसे ज्यादा दर्दनाक बात यह है कि मृतकों में अधिकांश बच्चे हैं। वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि अब तक 13 बच्चों की मौत हुई है। मृत बच्चों की उम्र 15 वर्ष या उससे कम बताई गई है। किसी परिवार ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि कुछ घंटे पहले घर से भोज खाने निकला उनका बच्चा अब कभी वापस नहीं आएगा। हादसे के बाद नदी किनारे पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कोई अपने बेटे को खोज रहा है तो कोई भाई और किसी को अपने बच्चे के वापस लौटने का इंतजार है।

आज राघोपुर पहुंचेंगे तेजस्वी यादव

इस दर्दनाक हादसे के बीच बुधवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राघोपुर पहुंचेंगे। वह हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात करेंगे और पीड़ितों का हाल जानेंगे। तेजस्वी यादव ने दिल्ली से जारी वीडियो बयान में हादसे पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से बात की है और उन्हें घटना में कई लोगों की मौत की जानकारी मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि नाव पर करीब 30 लोग सवार थे। तेजस्वी यादव का राघोपुर दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब इलाके में कई परिवार अपनों की तलाश में नदी किनारे डटे हुए हैं। ऐसे में उनका दौरा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनका दुख साझा करने के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मुआवजे का ऐलान, लेकिन परिवारों का सवाल- अपनों का क्या हुआ?

हादसे के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देने की घोषणा के बीच प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल मुआवजा नहीं, बल्कि अपनों की तलाश है। नदी किनारे खड़े परिवारों की निगाहें सुबह होने का इंतजार कर रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि उजाला होने के बाद रेस्क्यू टीम नदी के उन हिस्सों तक पहुंच सकेगी, जहां रात के अंधेरे में तलाश संभव नहीं हो पाई।

अब सुबह के सर्च ऑपरेशन पर टिकी नजर

राघोपुर में अब अगली सुबह बेहद अहम होने वाली है। SDRF की टीमें, स्थानीय गोताखोर और प्रशासन के अधिकारी फिर से नदी में उतरेंगे। तलाशी अभियान में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या कोई और व्यक्ति नदी में फंसा है या हादसे के बाद कहीं बह गया है।

एक तरफ नदी में तलाश जारी रहेगी और दूसरी तरफ तेजस्वी यादव राघोपुर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलेंगे। यानी बुधवार को राघोपुर में एक साथ दो तस्वीरें देखने को मिलेंगी—नदी में अपनों को खोजती रेस्क्यू टीमें और किनारे अपने लोगों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार।

रात के अंधेरे में शुरू हुई यह त्रासदी अब सुबह की रोशनी में भी खत्म होगी या कोई और दर्दनाक सच सामने आएगा, इसका जवाब तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ही मिलेगा। फिलहाल राघोपुर की निगाहें नदी पर टिकी हैं और हर परिवार अपने किसी अपने के वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है।