Bihar News : बिहार की राजनीति में इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा में सरकार द्वारा की गई कटौती के बाद एक ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राबड़ी देवी द्वारा अपने आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद कई पुलिसकर्मी पिछले कई दिनों से सड़क किनारे और पुलिस वैन में रहकर अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं।


दरअसल, बिहार सरकार ने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया था। इस फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। सुरक्षा में कटौती से नाराज राबड़ी देवी ने अपने आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाने का निर्णय लिया और उन्हें आवास परिसर के भीतर रहने की अनुमति नहीं दी।


हालांकि, दूसरी तरफ पुलिस विभाग ने इन सुरक्षाकर्मियों को न तो नई पोस्टिंग दी है और न ही उन्हें वापस बैरक लौटने का कोई आदेश जारी किया है। परिणामस्वरूप सुरक्षा में तैनात अधिकारी और जवान अभी भी 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास के बाहर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। आवास के भीतर प्रवेश नहीं मिलने के कारण वे सड़क किनारे बैठकर या पुलिस वाहन में रहकर समय गुजार रहे हैं।


इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षाकर्मियों की स्थिति को बेहद असहज बना दिया है। वे एक ऐसे प्रशासनिक संकट के बीच फंस गए हैं, जहां एक तरफ विभाग का आदेश है तो दूसरी तरफ आवास परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद जवान अपने कर्तव्य से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।


फर्स्ट बिहार के संवाददाता प्रेम कुमार से बातचीत में एक तैनात सुरक्षाकर्मी ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए कहा कि वह विभागीय आदेश का पालन कर रहा है। उसके अनुसार, विभाग ने जहां ड्यूटी लगाई है, वहीं वह तैनात रहेगा। सुरक्षा कर्मी ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक विवाद पर टिप्पणी करना उसका काम नहीं है और वह केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।


सुरक्षाकर्मी ने बताया कि अभी तक विभाग की ओर से कोई नया निर्देश नहीं मिला है। जब तक नया आदेश नहीं आता, तब तक वह और उसके साथी वहीं तैनात रहेंगे। उन्होंने कहा कि आवास के अंदर रहने दिया जाए या नहीं, इससे उनकी ड्यूटी प्रभावित नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर वे सड़क किनारे बैठकर भी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।


सबसे बड़ी बात यह है कि इन सुरक्षाकर्मियों की दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। पुलिस वैन ही उनके लिए अस्थायी ठिकाना बन गई है। सड़क किनारे  बैठकर वे आराम करते हैं, भोजन करते हैं और ड्यूटी के दौरान जरूरी कामकाज निपटाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर विभाग इस स्थिति का स्थायी समाधान कब निकालेगा।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनने से बचाया जाना चाहिए। सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि राजनीतिक फैसलों और उनके विरोध का असर सीधे उन पर पड़ता दिखाई दे रहा है।


फिलहाल राबड़ी आवास के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी आदेश और समाधान दोनों का इंतजार कर रहे हैं। एक तरफ सरकार का निर्देश है कि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, तो दूसरी तरफ आवास परिसर में उनके लिए जगह नहीं है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन जवानों को झेलनी पड़ रही है, जो बिना किसी शिकायत के अपनी ड्यूटी निभाने में जुटे हुए हैं। यह मामला अब केवल सुरक्षा कटौती का नहीं, बल्कि उन सुरक्षाकर्मियों की कार्य परिस्थितियों का भी बन गया है, जो राजनीतिक खींचतान के बीच फंस गए हैं।