पटना: बिहार की राजनीति में एक नया पता जुड़ गया है, लेकिन इसके साथ पुराने विवाद भी फिर सुर्खियों में आ गए हैं। करीब दो दशक तक 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रहने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अब अपने निजी आवास, कौटिल्य नगर शिफ्ट हो गई हैं। यह सिर्फ पता बदलने की खबर नहीं है, बल्कि उस आलीशान बंगले की भी चर्चा है, जिस पर वर्षों से राजनीतिक विवाद होता रहा है।


कौटिल्य नगर में करीब 5 हजार वर्ग फीट जमीन पर बना यह विशाल बंगला एक बार फिर इसलिए चर्चा में है क्योंकि दिवंगत भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अपनी किताब 'लालू लीला' में इस जमीन के आवंटन और प्लॉट खरीद की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे।


'एक प्लॉट का नियम, लेकिन पांच प्लॉट का बंगला?'

सुशील मोदी ने अपनी किताब में दावा किया था कि जिस जमीन पर आज लालू परिवार का आलीशान आवास खड़ा है, वहां तक पहुंचने का रास्ता सामान्य नहीं था। उनके अनुसार यह जमीन मूल रूप से वेटनरी कॉलेज की थी। वर्ष 1987 में सरकार ने लगभग 15 एकड़ जमीन बिहार सांसद एवं विधान मंडलीय सदस्य सहकारी समिति को इस उद्देश्य से दी थी कि जिन सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों का पटना में अपना घर नहीं है, उन्हें एक-एक प्लॉट आवंटित किया जाए।


इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सहकारी समिति के बायलॉज में स्पष्ट नियम बनाया गया था कि किसी भी सदस्य को एक से अधिक प्लॉट नहीं मिलेगा। अगर कोई सदस्य अपना प्लॉट छोड़ना चाहे तो वह सीधे किसी अन्य व्यक्ति को नहीं बेच सकता, बल्कि पहले उसे सहकारी समिति को सरेंडर करना होगा ताकि प्रतीक्षा सूची में शामिल किसी अन्य जनप्रतिनिधि को वह प्लॉट मिल सके। लेकिन सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि इन नियमों को दरकिनार कर लालू प्रसाद यादव और उनके करीबी नेताओं ने व्यवस्था का फायदा उठाया।


'जब मुख्यमंत्री ही बन गए लाभार्थी'

'लालू लीला' में लिखा गया है कि 1992 में लालू प्रसाद यादव को प्लॉट संख्या 208 आवंटित हुआ। उस समय वह बिहार के मुख्यमंत्री थे। किताब के मुताबिक, सहकारी समिति के चेयरमैन उस वक्त लालू यादव के करीबी नेता जयप्रकाश नारायण यादव थे। सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि सत्ता और समिति के प्रभाव का इस्तेमाल कर बाद में अतिरिक्त प्लॉट भी हासिल किए गए।


किताब के मुताबिक ऐसे जुड़ते गए प्लॉट

सुशील मोदी ने अपनी पुस्तक में दावा किया कि वर्तमान बंगले के लिए अलग-अलग समय में कुल पांच प्लॉट एक साथ जोड़े गए।

पहला प्लॉट:
प्लॉट संख्या 208 वर्ष 1992 में लालू प्रसाद यादव को आवंटित हुआ। इसके बाद वर्ष 2010 में तत्कालीन एमएलसी बादशाह प्रसाद आजाद से प्लॉट संख्या 207 अपने नाम कराया गया।

दूसरा प्लॉट:
जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं, तब 7 नवंबर 2002 को पूर्व मंत्री सुधा श्रीवास्तव से प्लॉट संख्या 151 महज 72 हजार रुपये में अपने नाम कराने का दावा किताब में किया गया है। सुशील मोदी का आरोप था कि उस समय इस प्लॉट पर पहले से बाउंड्री वॉल और बोरिंग जैसी सुविधाएं मौजूद थीं।

तीसरा प्लॉट:
इसके बाद 1 सितंबर 2003 को राबड़ी देवी ने कथित तौर पर प्लॉट संख्या 151 मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी को देकर बदले में महत्वपूर्ण लोकेशन वाला प्लॉट संख्या 209 मात्र 37 हजार रुपये में अपने नाम कराया।

चौथा प्लॉट:
किताब के अनुसार, 2006 में तत्कालीन आरजेडी सांसद और कोषाध्यक्ष प्रेमचंद गुप्ता को प्लॉट संख्या 211 आवंटित किया गया, लेकिन आरोप यह भी लगाया गया कि आवंटन की औपचारिक स्वीकृति से पहले ही रजिस्ट्री और निर्माण कार्य शुरू हो चुका था।

पांचवां प्लॉट:
सुशील मोदी ने दावा किया कि प्लॉट संख्या 210, जिसे मूल रूप से सामुदायिक भवन के लिए आरक्षित रखा गया था, उसे बाद में साधु यादव को आवंटित कर दिया गया ताकि पूरे परिसर का इस्तेमाल लालू परिवार की सुविधा के अनुसार किया जा सके।

आज कैसा दिखता है नया बंगला?

अब यही जमीन एक भव्य निजी आवास का रूप ले चुकी है। बंगले में परिवार के लिए पांच मास्टर बेडरूम, बड़े हॉल, आधुनिक किचन, विशाल बालकनी और आलीशान इंटीरियर बनाया गया है। सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों के लिए अलग आवासीय व्यवस्था भी की गई है। कार्यकर्ताओं की आवाजाही को देखते हुए बाहरी हिस्से में अलग शौचालय और बैठने की व्यवस्था बनाई गई है।

फिलहाल परिसर का गार्डन पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक यहां भविष्य में लैंडस्केपिंग, फूलों के पौधे, फलदार पेड़ और हरी घास लगाई जाएगी। बंगले की सुरक्षा व्यवस्था भी अभी अंतिम चरण में है। ऊंची बाउंड्री वॉल, सीसीटीवी कैमरे और मुख्य गेट का काम पूरा किया जा रहा है। आवास के सामने बड़ा गौशाला भी बनाया गया है।

पुराने आरोप, नई चर्चा

राबड़ी देवी के इस नए घर में शिफ्ट होने के साथ ही सुशील मोदी की किताब 'लालू लीला' में किए गए दावे फिर चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, यह उल्लेख करना जरूरी है कि ये सभी आरोप दिवंगत सुशील मोदी द्वारा अपनी पुस्तक में किए गए दावे हैं। इन आरोपों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू प्रसाद यादव पहले भी राजनीतिक रूप से असहमति जता चुके हैं और इन दावों को निराधार बताते रहे हैं।

फिलहाल लालू परिवार अपने नए आशियाने में पहुंच चुका है, लेकिन कौटिल्य नगर की यह हवेली एक बार फिर बिहार की राजनीति में सवालों और सियासी बहस का केंद्र बन गई है। पता भले बदल गया हो, लेकिन जमीन आवंटन से जुड़े पुराने विवाद और उन पर उठते राजनीतिक सवाल आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।