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02-Mar-2026 12:26 PM
By First Bihar
PUSU Election : पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के दौरान इस बार एक चौंकाने वाला और असामान्य मामला सामने आया। काउंटिंग के समय बड़ी संख्या में ऐसे बैलेट पेपर मिले, जिन पर मतदाताओं ने उम्मीदवारों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां लिख दी थीं। इतना ही नहीं, कई बैलेट पेपर में सभी उम्मीदवारों के नाम ऊपर से नीचे तक काट दिए गए थे, जिसके कारण उन्हें अमान्य घोषित करना पड़ा।
मतगणना में लगे कर्मियों के अनुसार, इस बार अभद्र टिप्पणियों वाले बैलेट पेपर की संख्या अपेक्षा से अधिक रही। कुछ पर्चियों पर चुनाव प्रक्रिया और छात्र राजनीति को लेकर नाराजगी भी जाहिर की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि जिन बैलेट पेपर पर किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट रूप से वोट नहीं दिया गया या सभी नाम काट दिए गए थे, उन्हें नियमों के तहत रद्द कर दिया गया।
अध्यक्ष और महासचिव पद पर इतने वोट
अध्यक्ष पद के लिए कुल 7658 वोट पड़े। इनमें से 7343 वोट वैध पाए गए, जबकि 315 बैलेट पेपर रद्द कर दिए गए। वहीं महासचिव पद के लिए 7688 वोट डाले गए, जिनमें 7178 वैध और 510 अमान्य घोषित किए गए। अधिकारियों का कहना है कि अमान्य मतों की संख्या इस बार सामान्य से अधिक रही, जिसका एक बड़ा कारण बैलेट पर लिखी गई टिप्पणियां और नाम काट देना रहा।
अधिकारियों ने क्या कहा?
काउंटिंग सेंटर पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में इस तरह की घटनाएं पहले बहुत कम देखने को मिली थीं। पहली बार इतने बड़े स्तर पर बैलेट पेपर पर आपत्तिजनक शब्द और टिप्पणियां लिखी हुई मिली हैं। एक कर्मी ने बताया कि कुछ बैलेट पर अपशब्द भी दर्ज थे, जिन्हें सार्वजनिक करना उचित नहीं है।
हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन अंदरखाने चर्चा है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर छात्रों के एक वर्ग में असंतोष रहा, जो इन बैलेट पेपर के माध्यम से सामने आया।
निर्दलीय उम्मीदवार का जलवा
छात्रसंघ चुनाव में सेंट्रल पैनल के उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार शिफत फैज ने जीत दर्ज की। उन्हें 1568 वोट मिले। खास बात यह रही कि उन्हें टीम ओसामा का समर्थन प्राप्त था। पिछले साल 2025 के छात्रसंघ चुनाव में भी महासचिव पद पर सलोनी राज ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 4274 वोट मिले थे और उनकी जीत के पीछे भी टीम ओसामा की रणनीति को अहम माना गया था।
साल 2025 में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने सेंट्रल पैनल के उपाध्यक्ष और महासचिव पद पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया था। उस समय उपाध्यक्ष पद पर धीरज कुमार ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने यह संदेश दिया है कि छात्र मुद्दों पर केंद्रित प्रचार और रणनीति असरदार साबित हो सकती है।
टीम ओसामा का नेतृत्व कर रहे ओसामा खुर्शीद ने कहा कि आम धारणा यह है कि सत्ताधारी दल से जुड़े या समर्थित उम्मीदवार ही जीत सकते हैं। लेकिन हमने साबित किया है कि अगर विद्यार्थियों के हित की बात की जाए और जमीनी मुद्दों को उठाया जाए, तो निर्दलीय उम्मीदवार भी मजबूत जीत दर्ज कर सकते हैं।
छात्र राजनीति पर उठे सवाल
बैलेट पेपर पर लिखी गई आपत्तिजनक टिप्पणियों और नाम काटने की घटनाओं ने छात्र राजनीति की दिशा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मतदान हुआ, वहीं दूसरी ओर मतदाताओं के एक वर्ग की नाराजगी भी साफ झलकी।
अब देखना होगा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या रणनीति बनाता है। फिलहाल, चुनाव परिणामों के साथ-साथ बैलेट पेपर पर दर्ज टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।