PATNA: बिहार में पिछले दस साल से शराबबंदी लागू है। महिलाओं की मांग पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे पूरे बिहार में लागू किया था। शराबबंदी कानून बनाए गये। जिस किसी ने इस कानून का पालन नहीं किया उन्हें जेल की हवा खानी पड़ गई। शराब को लेकर नियम कानून कड़े किये गये, जिसके बाद जेल जाने के डर से कई लोगों ने तो शराब पीना ही छोड़ दिया तो वही कुछ महंगे दाम पर इसे चोरी छीपे पीने लगे तो वही कुछ लोग सुखा नशा का आदि हो गये।
शराबबंदी के लागू होने के बाद बिहार में शराब से आने वाला राजस्व भी आना बंद हो गया। पिछले दस वर्षों से बिहार में शराबबंदी है तब से राजस्व आना बंद हो गया। जिसके कारण सरकारी खजाना तक खाली हो गया। सरकारी खजाना खाली होने आर्थिक संकट को देखते हुए जनसुराज पार्टी के संरक्षक प्रशांत किशोर ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने दावा किया है कि बिहार में अगले 3–4 महीनों के भीतर शराबबंदी हटा दी जाएगी। उन्होंने इसके पीछे राज्य के गंभीर आर्थिक संकट को वजह बताया है।
जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सहरसा में मीडिया से बातचीत के दौरान एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार का सरकारी खजाना लगभग खाली हो चुका है और राज्य में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
पीके ने कहा कि पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़े हैं, संविदाकर्मियों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है और ठेकेदारों के बकाए भी अटके हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चुनाव से पहले सरकार ने वोट खरीदने के लिए बड़े पैमाने पर राशि खर्च की, जिससे खजाने पर भारी दबाव पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला रोजगार योजना सहित विभिन्न योजनाओं में भारी खर्च के कारण वित्तीय स्थिति और खराब हो गई है। इसी कारण सरकार के पास वेतन और विकास कार्यों के लिए धन की कमी हो गई है।
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले 3–4 महीनों में बिहार में बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए शराबबंदी हटाने जैसे कदम उठा सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार वोट बैंक की राजनीति के कारण आर्थिक रूप से कमजोर हो गई है और अब इसका बोझ जनता पर डाला जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति को देखते हुए उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि एनडीए ने चुनाव में उन्हें एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर उन्होंने कहा कि जो भी नया सीएम बनेगा, उसके निर्णय की चाबी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में बिहार की नीतियां राज्य के बजाय अन्य राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जा सकती हैं, जिससे बिहार के युवाओं को बाहर जाकर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। गौरतलब है कि बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके प्रभाव और प्रभावशीलता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।