Bihar News : बिहार स्वास्थ्य विभाग ने पीएमसीएच के पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह से जुड़े विवाद में अगला कदम उठाते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। विभाग ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति के समक्ष डॉ. सिंह को 13 जुलाई 2026 को उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले विभाग ने प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के आधार पर उन्हें पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार से हटा दिया था।


दरअसल, विवाद की शुरुआत 23 जून 2026 को हुई थी। उस दिन पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में पहले से निर्धारित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित होना था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कार्यक्रम के दौरान प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह न तो संस्थान में मौजूद थे और न ही उन्होंने अनुपस्थिति की कोई पूर्व सूचना विभाग को दी थी। विभाग का यह भी आरोप है कि उन्होंने अवकाश के लिए आवेदन नहीं दिया और न ही अपने स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को प्रभार सौंपा।


स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान कई बार डॉ. सिंह से मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने किसी कॉल का जवाब नहीं दिया। ऐसे में विभाग ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना। इसके बाद 25 जून 2026 को जारी आदेश के तहत उन्हें पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया। साथ ही उनका स्थानांतरण पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के मनोरोग विभाग में प्राध्यापक के पद पर कर दिया गया।


अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में विभाग के अपर सचिव मृणायक दास तथा निदेशक प्रमुख (प्रशासन) डॉ. प्रणय राज शरण सिन्हा को भी सदस्य बनाया गया है। विभाग ने आदेश जारी कर डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को 13 जुलाई 2026 को अपराह्न 3 बजे विशेष सचिव के कार्यालय कक्ष में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। जांच समिति उनके बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।


इधर, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह पहले ही मीडिया के सामने अपनी सफाई दे चुके हैं। उनका कहना है कि जिस दिन की घटना को लेकर उन पर कार्रवाई की गई, उस दौरान वे एक दुर्घटना में गंभीर रूप से जल गए थे। इसी कारण वे विभागीय अधिकारियों के फोन नहीं उठा सके। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य में थोड़ी राहत मिलने के बाद उन्होंने स्वयं कई बार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया था।


सरकारी वाहन के निजी क्लिनिक के बाहर खड़े होने के आरोपों पर भी डॉ. सिंह ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पैतृक आवास उनके निजी क्लिनिक के पास ही स्थित है। ऐसे में सरकारी वाहन उनके घर के बाहर ही खड़ा किया जाता था, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग ने उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया और बिना उनका पक्ष सुने सीधे कार्रवाई कर दी।


अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें औपचारिक रूप से सुनवाई का अवसर दिए जाने के बाद यह मामला नए चरण में पहुंच गया है। माना जा रहा है कि जांच समिति के समक्ष डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपने सभी दस्तावेज, चिकित्सा संबंधी प्रमाण और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही स्वास्थ्य विभाग आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लेगा। ऐसे में 13 जुलाई को होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।