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17-Mar-2026 10:46 PM
By First Bihar
PATNA: सरकारी विभागों के जिन पदाधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर होती है, सिर्फ उनके मामले ही लंबित रखे जाएं। कई बार किसी लोकसेवक पर विभागीय कार्रवाई शुरू होते ही उनकी प्रोन्नति से जुड़े मामले रोक दिए जाते हैं। यह न्यायोचित नहीं है। ये बातें मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव सतीश तिवारी ने सचिवालय एवं संलग्न कार्यालयों में पदास्थापित विशेष सचिव स्तर के पदाधिकारियों को अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया संबंधी उन्मुखीकरण कार्यशाला में बतौर मास्टर ट्रेनर कही।
मुख्य सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया पर आयोजित कार्यक्रम में श्री तिवारी ने कहा कि किसी भी सरकारी सेवक की प्रोन्नति का मामला तभी लंबित रखा जाएगा जब वह निलंबित हो या उसके खिलाफ आरोप पत्र निर्गत होने के साथ आनुशासनिक कार्रवाई का निर्णय लिया जा चुका हो। या फिर उपरोक्त सरकारी सेवक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला चल रहा हो। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आनुशासनिक कार्रवाई की बिंदुओं से पदाधिकारियों को अवगत होना चाहिए।
बिहार सरकारी सेवक नियमावली की जानकारी देते हुए महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधिक पुस्तक सभी पदाधिकारियों को दी गई है। बिहार सरकार ने अनुशासन और नियंत्रण के लिए वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील नियमावली 2005 बनाया है। संविधान के अनुच्छेद के तहत बनी नियमावली में केंद्र और राज्य सरकार को कार्यवाही का अधिकार दिया गया है। उन्होंने उपस्थित सभी पदाधिकारियों को डिसप्लीनरी एक्शन और डिस्प्लीनरी प्रोसेडिंग की प्रक्रियाओं से रूबरू कराया।
इसी क्रम में मास्टर ट्रेनर सतीश तिवारी ने कहा कि वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील नियमावली के अनुपालन के क्रम में तकनिकी प्रक्रिया का अनुपालन जरूरी है। अगर पदाधिकारी इस नियमावली का हुबहू पालन करेंगे तो तकनिकी और न्याय का पालन खुद-ब-खुद होगा। उन्होंने तकनीकी प्रक्रिया के अनुपालन में कुछ शब्दों के इस्तेमाल से बचने की नसीहत दी। कहा कि विभागीय कार्रवाई या कार्यवाही की बजाय आनुशासनिक कार्रवाई या कार्यवाही का प्रयोग किया जाय। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में आरोप के जांच की प्रक्रिया का अलग-अलग चरण होते हैं। सबसे पहला चरण आरोप पत्र का गठन, आरोप पत्र का आनुशासनिक प्राधिकार से अनुमोदन, आरोप पत्र के आधार पर आरोपी को बचाव कमेटी का गठन का अवसर दिया जाना, समीक्षा आदि शामिल है।
इन प्रक्रियाओं के पूरे होने के बाद नियम 17 के तहत विस्तृत जांच का निर्णय हो तो आनुशासनिक कार्रवाई का निर्णय लिया जा सकता है। मामलों में आनुशासनिक प्राधिकारी नियम सम्मत निष्कर्ष निकालेंगे। उन्होंने सरकारी सेवकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संविधान की धारा 311 की बारीकियों से रूबरू कराते हुए कहा कि किसी भी सरकारी सेवक को अपाइंटिंग अथॉरिटी का सबार्डिनेट एक साथ दो पनिशमेंट नहीं दे सकता। बरखास्तगी की कार्रवाई का अधिकार अपॉइंटिंग अथॉरिटी या सुपीरियर अथॉरिटी की होगी। दूसरे भाग में इन दोनों दंड के साथ पदावनति की प्रक्रिया शामिल है। यह तीनों दंड जांच के बाद दिए जाएंगे। इस अवसर पर सामान्य प्रशासन विभाग के ही संयुक्त सचिव शालिग्राम पांडेय बतौर मास्टर ट्रेनर और दूसरे पदाधिकारी मौजूद रहे।