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Bihar Water Metro : पटना में अप्रैल से दौड़ेगी वाटर मेट्रो, देश का दूसरा शहर बनेगा राजधानी बिहार; लोगों को मिलेगी यह सुविधाएं

"पटना में अप्रैल से शुरू हो रही वाटर मेट्रो, कोच्चि के बाद देश का दूसरा शहर बनेगा। दीघा से कंगनघाट तक इलेक्ट्रिक बोट सेवा, किराया 50 से 100 रुपये और टूरिज्म विभाग चलाएगा।"

Bihar Water Metro : पटना में अप्रैल से दौड़ेगी वाटर मेट्रो, देश का दूसरा शहर बनेगा राजधानी बिहार; लोगों को मिलेगी यह सुविधाएं

27-Jan-2026 08:32 AM

By First Bihar

Bihar Water Metro : बिहार की राजधानी पटना के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। अप्रैल महीने से पटना में वाटर मेट्रो सेवा की शुरुआत होने जा रही है। कोच्चि के बाद पटना देश का दूसरा ऐसा शहर होगा, जहां आधुनिक वाटर मेट्रो चलाई जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न सिर्फ राजधानी की यातायात व्यवस्था को नया विकल्प मिलेगा, बल्कि पर्यटन, पर्यावरण और नदी परिवहन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।


पटना वाटर मेट्रो को चलाने की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। यह मेट्रो पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। पहले चरण में वाटर मेट्रो को दीघा घाट से कंगनघाट तक चलाया जाएगा। इस रूट पर दीघा घाट, गांधी घाट, गाय घाट और कंगनघाट को प्रमुख स्टॉपेज बनाया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए दीघा, गांधी घाट और कंगनघाट पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है।


किराया और समय सारिणी

वाटर मेट्रो के किराए को आम लोगों की पहुंच में रखा गया है। न्यूनतम किराया 50 रुपये और अधिकतम किराया 100 रुपये तय किया गया है। यात्री बिहार टूरिज्म की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए टिकट बुक कर सकेंगे। इसके अलावा जल्द ही एक मोबाइल एप भी लॉन्च किया जाएगा, जिससे ऑनलाइन टिकट बुकिंग और आसान हो जाएगी। वाटर मेट्रो का संचालन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा।


क्षमता और लागत

प्रत्येक वाटर मेट्रो बोट में लगभग 100 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे। इस परियोजना की कुल लागत करीब 908 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बोट की कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये है। बोट को आधुनिक सुरक्षा मानकों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इस बोट का नाम MV-Gomadharkonwar रखा गया है।


भविष्य की बड़ी योजना

पटना वाटर मेट्रो सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में इसे सोनपुर और वैशाली जैसे जिलों से भी नदी मार्ग के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे गंगा नदी के दोनों किनारों के इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इस प्रोजेक्ट में कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड तकनीकी सहयोग दे रही है, जो पहले ही देश की पहली वाटर मेट्रो को सफलतापूर्वक संचालित कर चुकी है।


पर्यावरण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

वाटर मेट्रो के संचालन से बिहार में प्रदूषण नियंत्रण को बड़ी मदद मिलेगी, क्योंकि यह डीजल या पेट्रोल पर नहीं, बल्कि बिजली से चलेगी। साथ ही, इससे नदी पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। बिहार में गंगा नदी 12 जिलों, गंडक 7 जिलों और बूढ़ी गंडक 5 जिलों से होकर गुजरती है। ऐसे में जल परिवहन के माध्यम से जिलों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी।


आम लोगों को होगा फायदा

वाटर मेट्रो से न सिर्फ यात्रियों को आने-जाने का एक नया, सस्ता और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा, बल्कि भविष्य में माल ढुलाई के लिए भी यह एक बेहतर साधन साबित हो सकता है। सड़क यातायात पर दबाव कम होगा और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।


कुल मिलाकर, पटना वाटर मेट्रो परियोजना बिहार के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह न केवल राजधानी की पहचान को नई ऊंचाई देगी, बल्कि बिहार को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की ओर भी ले जाएगी।

Bihar Water Metro : बिहार की राजधानी पटना के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। अप्रैल महीने से पटना में वाटर मेट्रो सेवा की शुरुआत होने जा रही है। कोच्चि के बाद पटना देश का दूसरा ऐसा शहर होगा, जहां आधुनिक वाटर मेट्रो चलाई जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न सिर्फ राजधानी की यातायात व्यवस्था को नया विकल्प मिलेगा, बल्कि पर्यटन, पर्यावरण और नदी परिवहन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।


पटना वाटर मेट्रो को चलाने की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। यह मेट्रो पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। पहले चरण में वाटर मेट्रो को दीघा घाट से कंगनघाट तक चलाया जाएगा। इस रूट पर दीघा घाट, गांधी घाट, गाय घाट और कंगनघाट को प्रमुख स्टॉपेज बनाया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए दीघा, गांधी घाट और कंगनघाट पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है।


किराया और समय सारिणी

वाटर मेट्रो के किराए को आम लोगों की पहुंच में रखा गया है। न्यूनतम किराया 50 रुपये और अधिकतम किराया 100 रुपये तय किया गया है। यात्री बिहार टूरिज्म की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए टिकट बुक कर सकेंगे। इसके अलावा जल्द ही एक मोबाइल एप भी लॉन्च किया जाएगा, जिससे ऑनलाइन टिकट बुकिंग और आसान हो जाएगी। वाटर मेट्रो का संचालन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा।


क्षमता और लागत

प्रत्येक वाटर मेट्रो बोट में लगभग 100 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे। इस परियोजना की कुल लागत करीब 908 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बोट की कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये है। बोट को आधुनिक सुरक्षा मानकों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इस बोट का नाम MV-Gomadharkonwar रखा गया है।


भविष्य की बड़ी योजना

पटना वाटर मेट्रो सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में इसे सोनपुर और वैशाली जैसे जिलों से भी नदी मार्ग के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे गंगा नदी के दोनों किनारों के इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इस प्रोजेक्ट में कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड तकनीकी सहयोग दे रही है, जो पहले ही देश की पहली वाटर मेट्रो को सफलतापूर्वक संचालित कर चुकी है।


पर्यावरण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

वाटर मेट्रो के संचालन से बिहार में प्रदूषण नियंत्रण को बड़ी मदद मिलेगी, क्योंकि यह डीजल या पेट्रोल पर नहीं, बल्कि बिजली से चलेगी। साथ ही, इससे नदी पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। बिहार में गंगा नदी 12 जिलों, गंडक 7 जिलों और बूढ़ी गंडक 5 जिलों से होकर गुजरती है। ऐसे में जल परिवहन के माध्यम से जिलों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी।


आम लोगों को होगा फायदा

वाटर मेट्रो से न सिर्फ यात्रियों को आने-जाने का एक नया, सस्ता और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा, बल्कि भविष्य में माल ढुलाई के लिए भी यह एक बेहतर साधन साबित हो सकता है। सड़क यातायात पर दबाव कम होगा और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।


कुल मिलाकर, पटना वाटर मेट्रो परियोजना बिहार के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह न केवल राजधानी की पहचान को नई ऊंचाई देगी, बल्कि बिहार को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की ओर भी ले जाएगी।