Bihar News: पटना में भ्रष्टाचार के मामले में विशेष निगरानी अदालत ने भोजपुर के उदवंतनगर थाना के तत्कालीन अवर निरीक्षक रामाशंकर सिंह को दोषी करार देते हुए दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत उन पर कुल 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. मामला वर्ष 2011 में 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तारी से जुड़ा है.
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 29 जुलाई 2026 को विशेष न्यायालय निगरानी, पटना के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने रामाशंकर सिंह के खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 23/2011 में फैसला सुनाया. यह मामला विशेष वाद संख्या 21/2011 के तहत चल रहा था.
केस डायरी में मदद के बदले मांगी थी रिश्वत
मामला उदवंतनगर थाना कांड संख्या 74/2011 से जुड़ा था. परिवादी अजीत कुमार सिंह ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी कि तत्कालीन अवर निरीक्षक रामाशंकर सिंह ने केस की धाराओं को यथावत रखने और उसके अनुसार केस डायरी लिखने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी.
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की जांच की और रिश्वत की मांग की पुष्टि होने पर कार्रवाई की. इसके बाद 15 अप्रैल 2011 को रामाशंकर सिंह को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था.
15 साल पुराने मामले में अब आया फैसला
मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता पुलिस उपाधीक्षक गंगा राम ने समय पर जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था. सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई.
बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक निगरानी, पटना किशोर कुमार सिंह ने मामले में प्रभावी पैरवी की. साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने रामाशंकर सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया.
दोनों धाराओं में दो-दो साल की सजा
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत रामाशंकर सिंह को दो वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई. वहीं धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी दो वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई है.
अदालत के आदेश के अनुसार दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े कुल 12 मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है. मौजूदा मामले में भी अभियोजन की कार्रवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराया गया है.
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है. ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2000 से 2024 के बीच पिछले 25 वर्षों में औसतन 5.6 मामलों में ही सजा हो पाती थी, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 12 मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है.