Patna University ने शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के डिजिटल स्टूडियो में अब शिक्षकों के लेक्चर रिकॉर्ड किए जाने का कार्य शुरू हो गया है। आगामी नए शैक्षणिक सत्र से यूजी और पीजी के विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलने लगेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और व्यवस्थित ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे किसी भी समय अपने पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर सकें।


डिजिटल स्टूडियो के प्रभारी प्रो. Atul Aditya Pandey ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय में संचालित सभी स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए सिलेबस आधारित लेक्चर तैयार किए जा रहे हैं। जुलाई महीने से प्रत्येक विषय के पांच-पांच लेक्चर रिकॉर्ड कर विश्वविद्यालय के आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड किए जाएंगे। शुरुआती चरण में सेमेस्टर एक, दो और पांच के पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है।


विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिसंबर तक कुल 300 लेक्चर अपलोड करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन लेक्चरों के माध्यम से छात्र घर बैठे पढ़ाई कर सकेंगे और कठिन विषयों को बार-बार सुनकर बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। यह पहल विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जो किसी कारणवश नियमित कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो पाते हैं।


प्रो. पांडेय ने बताया कि इस परियोजना में सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी सहयोग लिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्षों से विषयवार शिक्षकों की सूची मांगी गई है, ताकि गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार किया जा सके। अनुभवी शिक्षकों के जुड़ने से छात्रों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।


डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी विशेष लेक्चर तैयार किए जा रहे हैं। हाल ही में वीर कुंवर सिंह जयंती के अवसर पर उनकी जीवनी से संबंधित व्याख्यान अपलोड किया गया। इस सामग्री को प्रो. Imtiyaz Hussain ने तैयार किया है। वहीं छात्रों के लिए महात्मा बुद्ध के जीवन और दर्शन पर आधारित सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। इसे दर्शनशास्त्र विभाग की डॉ. Amita Jaiswal और डॉ. Kiran Kumari के सहयोग से तैयार किया गया है।


सांस्कृतिक और साहित्यिक विषयों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थान दिया गया है। Rabindranath Tagore के संगीत प्रेम और उनके जीवन से जुड़े पहलुओं पर संगीत विभाग की डॉ. Neera Chaudhary और प्रो. Arvind Kumar ने विशेष सामग्री तैयार की है। इसके अलावा कला शिल्प महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. Rakhi Kumari के सहयोग से प्राचीन कलाकृतियों से संबंधित सामग्री भी चैनल पर अपलोड की गई है।


विश्वविद्यालय की यह पहल डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों को तकनीक आधारित शिक्षण प्रणाली से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे छात्रों की पढ़ाई और अधिक आसान, सुलभ और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।