Bihar News: पटना में बुधवार को राजभवन मार्च निकाल रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने कार्रवाई की. गांधी मैदान से निकला यह मार्च पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, शिक्षा के निजीकरण और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को खत्म करने के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ निकाला गया था. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया.
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के नेतृत्व में छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से राजभवन की ओर मार्च शुरू किया. प्रदर्शनकारी शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. आइसा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन और वहां पुलिस कार्रवाई के विरोध में भी यह मार्च आयोजित किया था.
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को खत्म करने की कोशिश का भी विरोध किया. आइसा का आरोप है कि इस कानून को खत्म करने से पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता कमजोर होगी. संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालयों को सरकारी कार्यालय की तरह नहीं चलाया जाना चाहिए और छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.
राजभवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया.
इससे पहले मंगलवार को पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ और कॉलेज कर्मचारी संघ की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में संयुक्त धरना दिया गया था. आइसा की पटना विश्वविद्यालय इकाई ने भी इसमें हिस्सा लिया था. धरने में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और छात्रों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे.
आइसा पटना विश्वविद्यालय की सचिव सबा आफरीन ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को खत्म करने की कोशिश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर सीधा हमला है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने की जगह नहीं, बल्कि बहस, संवाद और विचारों के विकास का केंद्र भी होता है.