Bihar Student Protest News: बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को एक बार फिर छात्रों का आक्रोश सड़क पर देखने को मिला. वामदलों से जुड़े विभिन्न छात्र संगठनों के छात्र पांच सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे. छात्र युवा संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में निकले इस जुलूस का उद्देश्य मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना था. प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पहले से अलर्ट रहा और शहर के प्रमुख चौराहों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई.
छात्र रामगुलाम चौक से मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े
छात्र युवा संघर्ष मोर्चा की ओर से पांच सूत्री मांगों को लेकर पटना के रामगुलाम चौक से छात्रों का जुलूस निकाला गया. प्रदर्शनकारी छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी में थे. जुलूस के आगे बढ़ने के दौरान पुलिस ने छात्रों को गांधी मैदान के गेट संख्या 12 के पास रोकने की कोशिश की.
पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद भी छात्र वहां से पीछे नहीं हटे और डाकबंगला की ओर बढ़ गए. इसके बाद पुलिस ने डाकबंगला चौराहे के पास छात्रों को रोक दिया. प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर छात्रों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई.
जेपी गोलंबर और इनकम टैक्स चौराहे पर भारी पुलिस बल
छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. जेपी गोलंबर और इनकम टैक्स चौराहे पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया. इसके अलावा वाटर कैनन की गाड़ी भी मौके पर मंगाई गई थी.
पुलिस की कोशिश रही कि प्रदर्शनकारी छात्र आगे बढ़कर मुख्यमंत्री आवास की तरफ न जा सकें. डाकबंगला चौराहे के पास छात्रों को रोकने के बाद पुलिस ने स्थिति पर नजर बनाए रखी.
शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर विश्वविद्यालय अधिनियम तक की मांग
प्रदर्शन में शामिल छात्रों के हाथों में अलग-अलग बैनर और पोस्टर थे. इन पोस्टरों के जरिए छात्र अपनी मांगों को सामने रख रहे थे. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालयों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति करना शामिल है.
छात्रों की ओर से विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 को निरस्त करने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग भी की जा रही है. प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि शिक्षा से जुड़े फैसलों में छात्रों और शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
पुलिस कार्रवाई को लेकर भी छात्रों में नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए. छात्रा ने आरोप लगाया कि सीवान में पुलिस की ओर से एके-47 से फायरिंग की गई और बिहार के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों के आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया.
छात्रा ने जहानाबाद में कथित फायरिंग और प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाने का भी जिक्र किया. छात्रों की मांग है कि जिन पुलिस अधिकारियों पर आंदोलन के दौरान दमनात्मक कार्रवाई के आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए.
छात्रों ने पुलिस अधिकारियों के इस्तीफे और मुआवजे की मांग उठाई
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में प्रभावित हुए छात्रों को मुआवजा दिया जाना चाहिए. छात्रों ने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े लोगों को अलग-अलग जगहों पर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है.
छात्रों ने ऐसे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिन पर आंदोलनकारियों के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार या दमनात्मक कार्रवाई के आरोप हैं. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चाहे अधिकारी एसपी स्तर के हों या डीएसपी स्तर के, जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
छात्रों ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था में कथित बाजारीकरण का भी विरोध किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा को आम छात्रों की पहुंच में बनाए रखने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए.
पांच सूत्री मांगों को लेकर निकले इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की. वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से छात्रों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोकने के लिए लगातार निगरानी रखी गई.