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27-Jan-2026 08:52 AM
By First Bihar
Patna Shambhu Hostel Case : बिहार की राजधानी पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की छात्रा के साथ हुई कथित दरिंदगी के मामले में जांच की कमान अब सीआईडी (CID) ने संभाल ली है। इस बीच एफएसएल (FSL) की टीम ने अपनी जांच में पीड़िता के कपड़ों पर स्पर्म मिलने की पुष्टि की है, जिससे पुलिस द्वारा पहले दिए गए आत्महत्या या दवा के ओवरडोज के दावे की पोल खुल गई है।
सीआईडी और एफएसएल की टीम भारी पुलिस बल के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। जांच टीम का नेतृत्व एफएसएल डायरेक्टर विपिन कुमार चौधरी कर रहे थे। टीम ने हॉस्टल के उस कमरे और रास्तों की जांच की, जहां यह वारदात हुई बताई जा रही है। साथ ही उन्होंने हॉस्टल के तीसरे गेट की भी जांच की, जिस पर पहले विवाद था। रिपोर्ट के अनुसार अब उस गेट पर ताला लगा मिला है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी गेट के जरिए आरोपी मनीष कुमार के परिवार वालों को खाने-पीने का सामान पहुंचाया जाता था और सीसीटीवी कैमरों की कमी का फायदा उठाकर आरोपी पक्ष का आना-जाना जारी रहता था।
हॉस्टल में अपनी बेटियों का सामान लेने आए अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा गया। वैशाली से आए एक अभिभावक बालेश्वर राव ने प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ‘खाकी और खादी’ (पुलिस और नेता) की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा कांड संभव नहीं है। उन्होंने सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बेटियां सुरक्षित ही नहीं हैं, तो उन्हें पढ़ाकर क्या होगा।
घटना के बाद हॉस्टल में रह रही छात्राओं के बीच दहशत का माहौल है। छात्रा वंदना और उजाला ने बताया कि अब वे यहां सुरक्षित महसूस नहीं करतीं और परीक्षा के समय होने के बावजूद उन्हें डर के साये में हॉस्टल छोड़ना पड़ रहा है। छात्राओं का कहना है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए।
इस मामले में लापरवाही और साक्ष्यों को नजरअंदाज करने के आरोप में चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाना प्रभारी हेमंत झा को सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस ने शुरू में यह दावा किया था कि छात्रा ने नींद की दवाइयां खाई थीं, लेकिन मेडिकल साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट ने केस की दिशा बदल दी है।
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Patna Shambhu Hostel Case : बिहार की राजधानी पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की छात्रा के साथ हुई कथित दरिंदगी के मामले में जांच की कमान अब सीआईडी (CID) ने संभाल ली है। इस बीच एफएसएल (FSL) की टीम ने अपनी जांच में पीड़िता के कपड़ों पर स्पर्म मिलने की पुष्टि की है, जिससे पुलिस द्वारा पहले दिए गए आत्महत्या या दवा के ओवरडोज के दावे की पोल खुल गई है।
सीआईडी और एफएसएल की टीम भारी पुलिस बल के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। जांच टीम का नेतृत्व एफएसएल डायरेक्टर विपिन कुमार चौधरी कर रहे थे। टीम ने हॉस्टल के उस कमरे और रास्तों की जांच की, जहां यह वारदात हुई बताई जा रही है। साथ ही उन्होंने हॉस्टल के तीसरे गेट की भी जांच की, जिस पर पहले विवाद था। रिपोर्ट के अनुसार अब उस गेट पर ताला लगा मिला है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी गेट के जरिए आरोपी मनीष कुमार के परिवार वालों को खाने-पीने का सामान पहुंचाया जाता था और सीसीटीवी कैमरों की कमी का फायदा उठाकर आरोपी पक्ष का आना-जाना जारी रहता था।
हॉस्टल में अपनी बेटियों का सामान लेने आए अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा गया। वैशाली से आए एक अभिभावक बालेश्वर राव ने प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ‘खाकी और खादी’ (पुलिस और नेता) की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा कांड संभव नहीं है। उन्होंने सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बेटियां सुरक्षित ही नहीं हैं, तो उन्हें पढ़ाकर क्या होगा।
घटना के बाद हॉस्टल में रह रही छात्राओं के बीच दहशत का माहौल है। छात्रा वंदना और उजाला ने बताया कि अब वे यहां सुरक्षित महसूस नहीं करतीं और परीक्षा के समय होने के बावजूद उन्हें डर के साये में हॉस्टल छोड़ना पड़ रहा है। छात्राओं का कहना है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए।
इस मामले में लापरवाही और साक्ष्यों को नजरअंदाज करने के आरोप में चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाना प्रभारी हेमंत झा को सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस ने शुरू में यह दावा किया था कि छात्रा ने नींद की दवाइयां खाई थीं, लेकिन मेडिकल साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट ने केस की दिशा बदल दी है।
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