PATNA: पटना शहर से सटे पुनपुन और नौबतपुर में विकसित की जाने वाली पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप डेवलपमेंट प्लान 2047 के लिए होने वाले लैंड पूलिंग का किसान लगतार विरोध कर रहे हैं। पटना में आयोजित नगर विकास मंत्री और अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी लोगों ने इसका जोरदार विरोध किया। इस दौरान किसानों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प की स्थिति उत्पन्न हो गई। 


किसानों ने बिना सहमति जमीन लेने का आरोप सम्राट सरकार पर लगाया। नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, प्रधान सचिव विनय कुमार, पटना डीएम कुंदन कुमार, पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा सहित कई अधिकारियों के साथ जमीन मालिक सरकार के खिलाफ ही नारेबाजी और प्रदर्शन करने लगे। कहने लगे कि निकलो खेत खलिहानों से जंग लड़ों बेईमानों से..बिहार सरकार होश में आओ, अब मनमानी नहीं चलेगी। जमीन मालिकों का यह भी कहना था कि किसी भी कीमत पर हम अपनी जमीन सरकार को नहीं देंगे, भले ही अपनी जान हम दे देंगे। जमीन मालिकों ने मंत्री और अधिकारियो के सामने एक सूर में कहा कि सेटेलाइट टाउनशिप नहीं चाहिए। 


सरकार को टाउनशिप बनाने का फैसला वापस लेना होगा। सरकार का ई पॉलिसी नहीं चलेगा। ई सब नौटंकी क्यों हो रहा है। बता दें कि जब से सम्राट चौधरी की सरकार ने पाटलिपुत्र सहित 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित किये जाने की घोषणा की थी तब से जमीन मालिक और किसान लगातार धरना प्रदर्शन के माध्यम से इसका विरोध कर रहे हैं।  इनके विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने पटना में एक बैठक बुलाई जहां जमीन मालिकों को बातचीत करने के लिए आमंत्रित किया गया। सरकार के बुलावे पर जमीन मालिक और किसान बड़ी तादाद में बैठक में शामिल तो हुए लेकिन जमीन देने के सवाल पर गुस्सा हो गये। 


नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा और वहां मौजूद तमाम अधिकारियों के सामने ही किसानों और जमीन मालिकों ने सैटेलाइट टाउनशिप का जमकर विरोध करने लगे। कहने लगे कि किसी भी कीमत पर वो अपनी जमीन टाउनशिप डवलप करने के लिए नहीं देंगे। वहां मौजूद मंत्री नीतीश मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने उन्हें समझाने की पूरजोर कोशिश की लेकिन लोग उनकी बातें सुनने को तैयार नहीं हुए। भारी बवाल के बाद बिना कोई नतीजा निकले बैठक खत्म हो गई। 


बता दें कि पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को पटना से सटे पुनपुन और नौबतपुर क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। सरकार का उद्देश्य क्षेत्र में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना है, लेकिन प्रस्तावित लैंड पूलिंग को लेकर स्थानीय किसानों और जमीन मालिकों की आपत्तियां सामने आ रही हैं। अब सरकार और प्रभावित जमीन मालिकों के बीच सहमति बनाना बड़ी चुनौती है।