Patna Ring Road Project : बिहार की राजधानी पटना को ट्रैफिक जाम की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया महत्वाकांक्षी पटना रिंग रोड प्रोजेक्ट अब गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियों में फंसता नजर आ रहा है। करीब 173.5 किलोमीटर लंबे इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कन्हौली से शेरपुर तक प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क का निर्माण पिछले दो महीनों से फाइलों में अटका हुआ है। इससे परियोजना की प्रगति पर सवाल खड़े होने लगे हैं।


पटना रिंग रोड को बिहार के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। इसका उद्देश्य राजधानी पटना के बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और उत्तर एवं दक्षिण बिहार को सीधे जोड़ना है। यह रिंग रोड पटना, वैशाली और सारण जिलों से होकर गुजरेगा तथा उत्तर प्रदेश, झारखंड और उत्तर बिहार से आने वाले भारी वाहनों को राजधानी के भीतर प्रवेश किए बिना उनके गंतव्य तक पहुंचने का रास्ता देगा।


जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण एजेंसी का चयन भी कर लिया है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण एजेंसी को अभी तक कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी नहीं किया जा सका है। नतीजतन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।


परियोजना के लिए कुल 177.07 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसके बदले प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों को मुआवजे के रूप में 254.37 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि अब तक मात्र 12.52 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया जा सका है। अधिकारियों के अनुसार 912 अवार्ड तैयार किए जा चुके हैं, लेकिन अधिकांश लाभार्थियों तक मुआवजे की राशि नहीं पहुंच पाई है।


भूमि अधिग्रहण में आ रही परेशानियों के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। कई मामलों में पारिवारिक बंटवारे, एक ही जमीन पर अनेक दावेदारों के होने और दस्तावेजी विवादों के कारण भुगतान प्रक्रिया अटक गई है। वहीं कई किसानों ने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग भी की है, जिससे प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।


इस परियोजना को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। बिहार में वर्तमान में जदयू और भाजपा की गठबंधन सरकार है, जिसे डबल इंजन सरकार कहा जाता है। इसके बावजूद राज्य की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल पटना रिंग रोड के धीमे पड़ने से विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है।


विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार की प्रशासनिक सुस्ती और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण यह परियोजना प्रभावित हो रही है। विपक्ष का कहना है कि डबल इंजन सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि भूमि अधिग्रहण जैसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण कुछ विलंब हो रहा है, जिसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।


इस बीच केंद्र सरकार ने परियोजना के लिए अपने हिस्से के 127 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। हालांकि यह राशि अभी संबंधित विभाग तक नहीं पहुंच सकी है। यही कारण है कि मुआवजा भुगतान और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी नहीं आ पा रही है।


उल्लेखनीय है कि 13 जनवरी 2026 को बिहार कैबिनेट ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। मंजूरी के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन लगभग चार महीने बाद भी फाइलें विभिन्न विभागों में अटकी हुई हैं। इससे परियोजना के निर्धारित समय पर पूरा होने की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि पटना रिंग रोड के निर्माण से राजधानी में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। साथ ही माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी। यह परियोजना बिहार के आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को समय पर पूरा करना है। यदि सरकार और प्रशासन जल्द आवश्यक कदम नहीं उठाते हैं, तो बिहार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट लंबी देरी का शिकार हो सकता है, जिसका असर लाखों लोगों की उम्मीदों और राज्य के विकास पर पड़ेगा।