BIHAR NEWS : बिहार की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल पटना रिंग रोड अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। वर्ष 2005 में जिस परियोजना की परिकल्पना की गई थी, वह करीब 21 वर्षों की लंबी योजना, सर्वेक्षण, मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद अब धरातल पर पूरी तरह उतरने की ओर बढ़ रही है। लगभग 150 किलोमीटर लंबी यह रिंग रोड केवल राजधानी पटना के ट्रैफिक का समाधान नहीं होगी, बल्कि पटना, वैशाली और सारण समेत पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास का नया आधार भी बनेगी।
सरकार की योजना के अनुसार पूरे रिंग रोड का निर्माण आठ चरणों में किया जा रहा है। कई चरणों का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष हिस्सों पर तेजी से निर्माण जारी है। अब परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण को भी मंजूरी मिलने के बाद इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है।
अंतिम चरण होगा सबसे अहम
रिंग रोड का आठवां और अंतिम खंड दीघवारा से सराय के बीच बनाया जाएगा। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस हिस्से पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह मार्ग गंगा नदी के उत्तरी हिस्से में वैशाली और सारण जिलों को सीधे जोड़ते हुए विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। खास बात यह है कि भूमि अधिग्रहण पर होने वाले खर्च का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बिहार सरकार वहन करेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस खंड के पूरा होने के बाद पटना और उत्तर बिहार के बीच सड़क संपर्क पहले से कहीं अधिक मजबूत और सुगम हो जाएगा।
कई महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ेगी रिंग रोड
प्रस्तावित पटना रिंग रोड कन्हौली, शेरपुर, सराय, कच्ची दरगाह, बिदुपुर, चकसिकंदर, दीघवारा और दीदारगंज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगी। इससे राजधानी के अंदर और बाहर आने-जाने वाले वाहनों को नया विकल्प मिलेगा।सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लंबी दूरी के ट्रक और भारी वाहन शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे पटना शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होगा।
जाम से मिलेगी बड़ी राहत
राजधानी पटना में हर साल वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण शहर में ट्रैफिक जाम एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। रिंग Road बनने के बाद बाहरी जिलों से आने वाले भारी वाहन शहर के अंदर प्रवेश करने के बजाय सीधे रिंग रोड का इस्तेमाल करेंगे। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आएगी बल्कि लोगों का यात्रा समय भी काफी कम होगा। ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण के स्तर में भी कमी आने की संभावना है।
विकास के नए दरवाजे खुलेंगे
विशेषज्ञों के अनुसार पटना रिंग रोड केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास का नया इंजन साबित हो सकती है। रिंग रोड के दोनों ओर औद्योगिक क्षेत्र, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक हब, व्यावसायिक केंद्र और नई आवासीय टाउनशिप विकसित होने की संभावनाएं हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी। भूमि की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ निवेशकों की रुचि भी बढ़ सकती है।
दिल्ली-NCR की तर्ज पर होगा विस्तार
जानकारों का मानना है कि रिंग रोड पूरी होने के बाद पटना का विस्तार दिल्ली-एनसीआर मॉडल की तरह आसपास के जिलों तक फैल सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण वैशाली, सारण और अन्य नजदीकी क्षेत्रों को राजधानी के विकास का सीधा लाभ मिलेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह रिंग रोड बिहार के 7 राष्ट्रीय राजमार्गों और 5 प्रमुख राज्य मार्गों को एक-दूसरे से जोड़ेगी। इससे पूरे राज्य की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और बिहार के परिवहन नेटवर्क को नई पहचान मिलेगी। पटना रिंग रोड के पूरा होने के बाद राजधानी की तस्वीर बदलने के साथ-साथ बिहार के विकास को भी एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।