Bihar News : पटना में अगर आपका घर सिर्फ रहने के लिए नहीं, बल्कि दुकान, ऑफिस, संस्थान या किसी दूसरी व्यावसायिक गतिविधि का ठिकाना भी बन चुका है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राजधानी में आवासीय इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की नजर अब और सख्त होने वाली है। सर्वे के दौरान 50 हजार से अधिक ऐसी नई संपत्तियां चिह्नित की गई हैं, जहां आवासीय उपयोग के बजाय किसी न किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है। इसी के आधार पर पटना नगर निगम आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक इस्तेमाल की जा रही संपत्तियों की पहचान और जांच कर रहा है। नए मामलों के सामने आने के बाद कार्रवाई का दायरा पहले से काफी बढ़ गया है। ऐसे में घर के किसी हिस्से में दुकान, ऑफिस या संस्थान चलाने वाले संपत्तिधारकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
नगर निगम इससे पहले ही 27,395 संपत्तिधारकों को नोटिस जारी कर चुका है। हालांकि नोटिस मिलने के बाद निर्धारित तारीखों पर अब तक करीब 4,100 लोग ही संबंधित अंचल कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रख पाए हैं। यानी बड़ी संख्या में ऐसे संपत्तिधारक अभी भी हैं, जिनके मामलों पर आगे कार्रवाई या जांच की प्रक्रिया बाकी है।
इसी बीच नए सर्वे में 50 हजार से ज्यादा संपत्तियों के चिह्नित होने से नगर निगम के सामने मामलों का दायरा और बड़ा हो गया है। अब पुराने नोटिस वाले मामलों के साथ इन नए मामलों की भी जांच की जाएगी। नगर निगम प्रशासन यह देखेगा कि संबंधित संपत्ति में किस तरह की गतिविधि चल रही है और वह मौजूदा नियमों के अनुरूप है या नहीं।
इस पूरे मामले में राहत की उम्मीद भी बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 25 अगस्त को पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति को पूरे मामले का अध्ययन कर व्यावहारिक और जनहितकारी समाधान सुझाना है। अब संपत्तिधारकों की नजर समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
नगर निगम ने सभी छह अंचलों के कार्यपालक पदाधिकारियों से अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें नोटिस पाने वाले संपत्तिधारकों की संख्या, अपना पक्ष रखने के लिए पहुंचे लोगों की जानकारी और आगे कार्रवाई के लिए चिह्नित संपत्तियों का विवरण शामिल होगा। इसके आधार पर नगर निगम चरणबद्ध तरीके से आगे की कार्रवाई करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि आवासीय क्षेत्र में हर तरह की व्यावसायिक गतिविधि पर रोक नहीं है। पटना मास्टर प्लान-2031 और बिहार भवन उपविधि-2014 के प्रावधानों को देखकर यह तय किया जाएगा कि कौन-सी गतिविधि नियमों के दायरे में है और किसके लिए अनुमति जरूरी है।
मास्टर प्लान के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में 41 प्रकार की गतिविधियां निर्धारित नियमों के तहत की जा सकती हैं। वहीं 19 अन्य गतिविधियों के लिए संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना जरूरी है। बिना अनुमति ऐसी गतिविधियां चलाने पर कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा 18 प्रकार की गतिविधियों को आवासीय क्षेत्र में प्रतिबंधित किया गया है।
पटना के 24 आवासीय कॉलोनियां भी नगर निगम की निगरानी में हैं। इनमें बिहार सरकार की 11, केंद्र सरकार की तीन और निजी क्षेत्र की 10 कॉलोनियां शामिल हैं। मास्टर प्लान-2031 में पटना के कुल क्षेत्रफल का करीब 47.55 प्रतिशत यानी 49.56 वर्ग किलोमीटर हिस्सा आवासीय क्षेत्र के रूप में दर्ज है।
ऐसे में आने वाले दिनों में नगर निगम की जांच सिर्फ पुराने नोटिस तक सीमित रहने वाली नहीं है। 50 हजार से अधिक नए मामलों के सामने आने के बाद कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा हो चुका है। हालांकि अंतिम फैसला हर संपत्ति की प्रकृति, वहां संचालित गतिविधि और लागू नियमों के आधार पर ही होगा। इसलिए घर से कारोबार या ऑफिस चलाने वाले लोगों के लिए अब यह जानना जरूरी हो गया है कि उनकी गतिविधि नियमों के दायरे में आती है या इसके लिए अलग अनुमति की जरूरत है।