Bihar News: पटना से पूर्णिया का सफर अब आने वाले समय में काफी आसान और तेज होने वाला है। पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मंजूरी मिलते ही इसके निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और बिहार में एक बड़े सड़क प्रोजेक्ट का काम जमीन पर उतरने लगेगा। करीब 245 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन एक्सप्रेसवे बिहार के सात जिलों को जोड़ते हुए राजधानी पटना को कोसी और सीमांचल क्षेत्र से सीधे जोड़ेगा।


इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद पटना से पूर्णिया की सड़क दूरी करीब 55 से 60 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। सबसे बड़ा फायदा सफर के समय में देखने को मिलेगा। अभी पटना से पूर्णिया पहुंचने में सड़क मार्ग से करीब छह घंटे तक लग जाते हैं। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यही दूरी लगभग तीन से चार घंटे में पूरी की जा सकेगी। यानी यात्रियों के कई घंटे बचेंगे और पटना से पूर्णिया के बीच आवागमन पहले की तुलना में काफी सुगम हो जाएगा।


प्रस्तावित पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे पटना, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया जिलों से होकर गुजरेगा। खास बात यह है कि इसे ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी इसका बड़ा हिस्सा नई जमीन पर बनाया जाएगा और एक्सप्रेसवे को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वाहनों को शहरों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से होकर न गुजरना पड़े। इससे तेज गति से यात्रा संभव होगी।


केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के हालिया बिहार दौरे के बाद इस परियोजना को लेकर उम्मीद और बढ़ी है। उन्होंने संकेत दिया कि एक्सप्रेसवे को जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है। परियोजना की वित्तीय मंजूरी पहले ही मिल चुकी है और जमीन चिह्नित करने का काम भी कई इलाकों में आगे बढ़ चुका है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जमीन अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।


इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 32 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल यानी HAM के तहत किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के तहत निजी निर्माण एजेंसी और केंद्र सरकार मिलकर खर्च वहन करेंगे। एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद टोल के जरिए निर्माण एजेंसी अपनी लागत की वसूली करेगी।


पटना में यह एक्सप्रेसवे रिंग रोड के सराय इलाके से शुरू होकर पूर्णिया तक जाएगा। रास्ते में यात्रियों की सुविधा और यातायात को सुचारू रखने के लिए कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे। परियोजना में 21 बड़े पुल, 100 से अधिक छोटे पुल, 11 रेलवे ओवरब्रिज और 300 से ज्यादा अंडरपास बनाए जाने की योजना है।


जमीन चिह्नित करने का काम वैशाली, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया में अंतिम चरण में बताया जा रहा है। ऐसे में कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद परियोजना की रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है।


पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सिर्फ यात्रा का समय कम करने वाली सड़क नहीं होगी, बल्कि इसका असर बिहार की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कोसी और सीमांचल के किसानों तथा कारोबारियों को अपने कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। मक्का, मखाना और अन्य कृषि उत्पादों की ढुलाई तेज होने से परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आ सकती है।


अगर परियोजना तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में पटना से पूर्णिया का सफर बिहार के सबसे तेज सड़क संपर्क वाले रूट में शामिल हो सकता है। राजधानी और सीमांचल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार, कारोबार, कृषि और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।