PATNA : डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने सोने की बड़ी खेप बरामद की है। ये सोने की खेप देश में तीन प्रमुख शहरों से बरामद हुई है। इन शहरों से 101.7 किलोग्राम गोल्ड की बरामदगी की गई है। डीआरआई ने इन सोने की तस्करी करते हुए 10 लोगों को अरेस्ट किया है। जिसमें से सूडानी नागरिक हैं। ये लोग सोने की इस खेप को नेपाल बॉर्डर से तस्करी करके  विभिन्न शहरों में ले जाया जा रहा था। 


दरअसल, डीआरआई को यह सुचना मिली थी कि कुछ लोग नेपाल बॉडर के जरिए अवैध  तरीके से सोने की तस्करी कर रहे हैं।  इसके बाद टीम अलर्ट हुई और जब संघन जांच - पड़ताल तो यह मालूम चला कि ये लोग मुख्य रूप से देश के तीन शहरों में अवैध धंधा कर रहे हैं। जिसके बाद डीआरआई की टीम ने  पटना, मुंबई और पुणे में छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया। 


डीआरआई  ने पटना रेलवे स्टेशन से 37 किलोग्राम, मुंबई के रेलवे स्टेशन से 38 किलोग्राम गोल्ड बरामद किया गया। बाकी का सोना मुंबई में अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मिला। साथ ही पुणे से भी बस में ले जाया जा रहा 5.6 किलोग्राम सोना जब्त किया गया। जब्त सोने की कुल कीमत 51 करोड़ रुपये बताई जा रही है।


डीआरआई ने बताया कि गोल्ड को अधिकतर पेस्ट के रूप में भारत-नेपाल सीमा के जरिए तस्करी कर पटना लाया गया है। इसके बाद यहां से रेल और हवाई मार्ग के जरिए मुंबई समेत देश के अलग - अलग शहरों में पहंचाया जा रहा था। डीआरआई के अधिकारियों ने बताया कि, इससे पहले भी इस मामले में   तीन सूडानी नागरिकों को पकड़ा गया था। वे पटना जंक्शन से मुंबई जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे। उनके पास 40 पैकेटों में 37.126 किलोग्राम वजन वाले सोने का पेस्ट बरामद किया गया। ये उन्होंने स्लीवलेस जैकेट के अंदर छुपा रखा था।


आपको बताते चलें कि, स्थानीय हैंडलर की सहायता से सुडानी बिहार-नेपाल बॉडर के माध्यम से सोने की तस्करी कर रहा है। सोना तस्कर अपने काम करने के तरीके लगातार बदल रहे हैं. डीआरआई सूत्रों का कहना है कि सुडानी नागरिक विशेष रूप स्लीवलेस जैकेट बनाया था। जिसमें कई जेबें थी और वे इससे शर्ट के ऊपर से नहीं बल्कि शर्ट के नीचे पहने हुये था। दरअसल में डीआरआई ने पहले भारत में विदेशी मूल के सोने की तस्करी के विभिन्न नए तौर-तरीकों का पता लगाया है, जैसे कि देश के उत्तर पूर्वी हिस्से से तस्करी या तो रसद कंपनी के कूरियर मार्ग के माध्यम से या वाहनों में या बस, ट्रेन, उड़ान आदि द्वारा छिपाने के तरीकों का उपयोग करके. लेकिन अब वे तरीके बदल लिये।