Bihar News : राजधानी पटना में संपत्ति कर का दायरा बढ़ाने के लिए नगर निगम ने अभियान तेज कर दिया है। इसी बीच घर में कई बिजली मीटर होने, किराएदार रहने या पुश्तैनी मकान के बंटवारे से जुड़े सवालों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। क्या हर बिजली मीटर पर अलग प्रॉपर्टी टैक्स देना होगा? अगर मकान में किराएदार रहते हैं तो टैक्स कौन भरेगा? और भाइयों के बीच संपत्ति का बंटवारा हो चुका है तो कर का हिसाब कैसे तय होगा?


इन सवालों पर पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने स्थिति स्पष्ट की है। नगर निगम के अनुसार, बिजली मीटर की संख्या और संपत्ति की संख्या एक ही बात नहीं है। संपत्ति कर का निर्धारण संबंधित भवन, फ्लैट या कर योग्य इकाई के आधार पर किया जाएगा।


4.80 लाख बिजली उपभोक्ताओं ने नहीं जमा किया संपत्ति कर

पटना नगर निगम के राजस्व संवर्धन अभियान के तहत अब तक 4,80,437 बिजली उपभोक्ताओं ने स्वीकार किया है कि वे संपत्ति कर जमा नहीं करते और उनकी संपत्तियों का कर निर्धारण नहीं हुआ है। जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों के सूचीकरण के दौरान 4.60 लाख मकान चिह्नित किए गए हैं, जबकि निगम के रिकॉर्ड में करीब 3.10 लाख संपत्तियों का ही कर निर्धारण हुआ है।


नगर निगम का लक्ष्य भवन, भूखंड और अन्य कर योग्य संपत्तियों समेत पांच लाख से अधिक संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाना है। ऐसे में मकान मालिकों के लिए अपने भवन या फ्लैट का कर निर्धारण कराना जरूरी हो सकता है।


एक मकान में तीन बिजली मीटर हैं तो क्या तीन बार टैक्स लगेगा?

नगर निगम के स्पष्टीकरण के मुताबिक, किसी भवन में दो, तीन या उससे अधिक बिजली मीटर लगे होने मात्र से अलग-अलग संपत्ति कर नहीं लगेगा। यदि पूरा भवन एक ही संपत्ति है, तो उसका कर एक ही प्रॉपर्टी आइडी यानी पीआईडी पर निर्धारित किया जा सकता है।


हालांकि, यदि भवन में अलग-अलग फ्लैट या इकाइयां हैं, तो उनका संपत्ति कर एक ही पीआईडी या अलग-अलग पीआईडी के तहत निर्धारित किया जा सकता है। केवल अलग बिजली कनेक्शन होने से संपत्ति अलग नहीं मानी जाएगी।


किराएदार रहते हैं तो प्रॉपर्टी टैक्स कौन भरेगा?

कई मकान मालिकों का सवाल है कि यदि उनके घर में किराएदार रहते हैं और बिजली के कई मीटर लगे हैं, तो टैक्स की जिम्मेदारी किसकी होगी। नगर निगम के अनुसार, संपत्ति कर संबंधित संपत्ति या फ्लैट के निर्धारित कर के आधार पर देय होगा।


यदि किसी भवन में कई फ्लैट या इकाइयां हैं और उनका संपत्ति कर पहले से निर्धारित है, तो हर बिजली उपभोक्ता के नाम पर अलग से कर निर्धारण कराना आवश्यक नहीं होगा। कर का निर्धारण संपत्ति की स्थिति और लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा।


पुश्तैनी मकान का बंटवारा हो गया तो टैक्स कैसे लगेगा?

भाइयों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर भी नगर निगम ने स्पष्ट जवाब दिया है। यदि संपत्ति का विधिवत बंटवारा नहीं हुआ है, तो जिन लोगों के नाम पर संपत्ति दर्ज है, वे संपत्ति कर का भुगतान करेंगे।


वहीं, यदि बंटवारा कानूनी रूप से हो चुका है और प्रत्येक भाई का हिस्सा अलग संपत्ति के रूप में निर्धारित है, तो हर हिस्से का अलग-अलग संपत्ति कर निर्धारण कराना जरूरी होगा। यानी बंटवारे के बाद अलग-अलग हिस्सों की संपत्ति स्थिति के आधार पर टैक्स तय किया जा सकता है।


घर में दुकान भी है तो क्या अलग टैक्स देना होगा?

यदि किसी आवासीय मकान में रहने के साथ दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधि भी चल रही है, तो संपत्ति कर का निर्धारण पीआईडी के आधार पर होगा।


- दुकान और आवास के लिए अलग-अलग पीआईडी निर्धारित है, तो दोनों का अलग-अलग कर निर्धारण होगा।

- यदि एक ही पीआईडी में आवासीय और व्यावसायिक, दोनों तरह के उपयोग का उल्लेख करते हुए स्व-कर निर्धारण किया गया है, तो उसी पीआईडी के तहत संपत्ति कर निर्धारित किया जाएगा।


इसलिए मिश्रित उपयोग वाली संपत्ति के मालिकों को अपने कर रिकॉर्ड की स्थिति समझना जरूरी है।


सोसाइटी में रहने वालों से टैक्स कैसे लिया जाएगा?

पटना नगर निगम के अनुसार, सोसाइटी क्षेत्र की कर योग्य संपत्तियां भी संपत्ति कर के दायरे में आएंगी। प्रत्येक कर योग्य फ्लैट या संपत्ति का नियमानुसार कर निर्धारण कराना अनिवार्य होगा। यानी केवल सोसाइटी में रहने या सोसाइटी का हिस्सा होने से संपत्ति कर से छूट नहीं मिलेगी।


राजीव नगर की जमीन पर टैक्स वसूली का क्या होगा?

राजीव नगर की 1,024 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा मामला अभी अदालत में चल रहा है। इस क्षेत्र की संपत्तियों से संपत्ति कर वसूली के सवाल पर नगर निगम ने कहा है कि सक्षम प्राधिकार के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।


टैक्स वसूली से नागरिकों को क्या मिलेगा?

नगर निगम का कहना है कि संपत्ति कर शहरी निकायों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल नागरिक सुविधाओं, शहरी विकास और जनहित से जुड़े कार्यों में किया जाता है।


बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के बजट प्रावधानों के अनुसार, नगर निकायों के वित्तीय संसाधनों का कम से कम 25 प्रतिशत शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना है। नगर निगम के मुताबिक, राजस्व बढ़ाने का उद्देश्य केवल टैक्स वसूली नहीं, बल्कि अतिरिक्त संसाधनों से नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों को मजबूत करना भी है।