PATNA: पटना में अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। एडमिशन फी, ट्यूशन फी, डेवलपमेंट फी, एनुअल फी, मिसलेनियस फी सहित मनमाने तरीके से कई तरह के शुल्क वसूलने वाले प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के अभिभावकों की ओर से लगातार मिल शिकायतों पर सख्त कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। 


पटना डीएम त्यागराजन एसएम ने कहा कि छात्र-छात्राओं के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आदेशों का उल्लंघन करने वाले प्राइवेट स्कूलों के मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि आदेश नहीं मानने वाले संचालक के स्कूल पर ताला भी लग सकता है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी अब नहीं चलगी। पटना के डीएम ने इसे लेकर आदेश जारी किये हैं।  


दरअसल पटना के प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ डीएम को लगातार शिकायतें मिल रही है। प्राइवेट स्कूलों पर मनमाने तरीके से प्रवेश शुल्क, ट्यूशन शुल्क, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क एवं अन्य शुल्कों की वसूली किये जाने की शिकायत जिला प्रशासन को मिली है। सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों, यूनिफॉर्म, जूतों, कॉपियों आदि की खरीद अपने निजी हित में करने पर अंकुश लगाने के लिए "बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019" पारित किया, जिससे कि निजी विद्यालयों में सुसज्जित, गुणवत्तापूर्ण एवं सर्वसुलभ शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किया जा सके। अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों में निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:-


1. शुल्क का निर्धारण एवं पारदर्शिता 

सभी निजी विद्यालयों द्वारा कक्षा/पाठ्यक्रम में नामांकन हेतु निर्धारित प्रवेश शुल्क, पुनर्नामांकन शुल्क, विकास शुल्क, मासिक अध्ययन शुल्क, वार्षिक शुल्क तथा पुस्तक, पाठ्य सामग्री, पोशाक, आवागमन का खर्च का निर्धारण किया जाएगा तथा आम लोगों की जानकारी के लिए सभी शुल्कों का ब्यौरा विद्यालय सूचना पट्ट/विद्यालय के वेबसाईट पर प्रकाशित किया जाएगा। 


निजी विद्यालय को पूर्व के शैक्षणिक वर्ष की तुलना में वर्तमान सत्र में अधिकतम 7% वृद्धि करने की शक्ति रहेगी, जिसका प्रकाशन किया जाना आवश्यक होगा। राज्य सरकार को समय-समय पर 7% की दर को पुनरीक्षित करने का अधिकार होगा। 7% से अधिक की वृद्धि के लिए शुल्क विनियमन समिति की मंजूरी आवश्यक होगी। विद्यालयों के कक्षावार पुस्तकों की सूची / ड्रेस की विशिष्टियों सूचना पट्ट पर प्रकाशित किया जाना होगा। अभिभावक बच्चों की पुस्तक एवं ड्रेस कहीं से भी खरीद करने के लिए स्वतंत्र होंगे। विद्यालय द्वारा स्थान विशेष से खरीद करने के लिए बाध्य करने वाले विद्यालय प्रशासनिक दण्ड के भागी होगे। 



2 शुल्क विनियमन समिति की शक्तियाँ किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर शुल्क विनियमन समिति के द्वारा जाँच किया जाएगा। शिकायतकर्ता को प्रमण्डलीय आयुक्त के समक्ष शिकायत करने का प्रावधान है। शुल्क में वृद्धि होने के 30 दिनों के अन्दर शिकायत दर्ज की जाएगी। मामले की सुनवाई सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन सिविल न्यायालय को निहित शक्तियों के अनुरूप होगा।


3. लेखाओं का विनियमन विद्यालयों द्वारा लेखा का संधारण किया जाएगा। प्रतयेक वित्तीय वर्ष में चार्टर्ड एकाउन्टेंट द्वारा लेखा का अंकेक्षण किया जाना होगा। 

4. शास्तियाँ अधिनियम की धारा-7 के अन्तर्गत प्रावधानों के उल्लंघन पर 1,00,000.00 रुपये प्रथम अपराध के लिए एवं आगामी प्रत्येक अपराध के लिए 2,00,000.00 रुपये दण्ड का प्रावधान किया गया है। निर्धारित दण्ड को ससमय जमा करने का प्रावधान किया गया है। 


सरकार के द्वारा निजी विद्यालयों के छात्रों के हित के लिए उपरोक्त प्रावधानों को लागू करने के लिए शुल्क विनियमन समिति का गठन किया गया है, जो निम्न प्रकार है:-

1. प्रमण्डलीय आयुक्त

2. क्षेत्रीय जिला उप निदेशक

सदस्य सचिव

सदस्य

सदस्य

सदस्य

3. प्रमण्डलीय मुख्यालय के जिला शिक्षा पदाधिकारी

अध्यक्ष

4. जिलों के निजी विद्यालयों से कुल दो प्रतिनिधि (प्रमण्डलीय आयुक्त द्वारा नामित)

5. दो अभिभावक प्रतिनिधि (प्रमण्डलीय आयुक्त द्वारा नामित)


पटना जिला के अन्तर्गत निजी विद्यालयों के छात्रों एवं अभिभावक के हितों को संरक्षित करने हेतु जिला शिक्षा पदाधिकारी, पटना को निदेश दिया जाता है कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 के प्रावधानों का अक्षरशः पालन कराना सुनिश्चित करेंगे।