Patna Police Encounter : पटना समेत पूरे बिहार में अपराध पर लगाम कसने के लिए पुलिस ने अब सख्त और आक्रामक रणनीति अपनाई है। आम छापेमारी और गिरफ्तारी से आगे बढ़ते हुए पटना पुलिस और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) अब सीधे मुठभेड़ों के जरिए कुख्यात अपराधियों को निशाना बना रही है। इसका ताजा उदाहरण शुक्रवार सुबह खगौल थाना क्षेत्र के लखपर में देखने को मिला, जहां इनामी अपराधी मैनेजर राय ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसके पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया।


बीते सात महीनों में हुई लगातार मुठभेड़ों ने यह साफ कर दिया है कि पुलिस अब पुरानी कार्यशैली से आगे निकल चुकी है। एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीमें योजनाबद्ध तरीके से ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई कर रही हैं, जो वर्षों से गिरफ्तारी से बचते आ रहे थे। इन अपराधियों पर न केवल इनाम घोषित था, बल्कि इनके नेटवर्क कई राज्यों तक फैले हुए थे। पुलिस ने राजस्थान, झारखंड और गुजरात जैसे राज्यों में दबिश देकर कई इनामी अपराधियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है।


आंकड़ों पर नजर डालें तो जून 2025 से 2 जनवरी 2026 के बीच पुलिस ने कुल 15 मुठभेड़ें कीं। इनमें एक माओवादी और एक बदमाश को ढेर किया गया, जबकि 14 अपराधियों के पैर में जवाबी कार्रवाई के दौरान गोली मारी गई। इन कार्रवाइयों का असर साफ दिख रहा है। अपराधियों में भय का माहौल बन गया है और कई गिरोह के सदस्य बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।


हाल के दिनों में पुलिस ने कई हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधियों को निशाना बनाया है। छपरा में एक चिकित्सक के अपहरण के असफल प्रयास के मामले में पुलिस ने 36 घंटे के भीतर दो अपराधियों को दबोच लिया। मुठभेड़ के दौरान दोनों के पैर में गोली मारी गई। इसी तरह गोपालगंज के प्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर में मुकुट और अन्य आभूषणों की चोरी के मामले में शामिल एक आरोपित को चार दिनों के भीतर गिरफ्तार किया गया। मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में भी गोली लगी।


घटनाक्रम की कड़ी में 11 जून को बिहटा थाना क्षेत्र के विष्णुपुरा गांव के पास पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहे हत्यारोपित इशु कुमार को पुलिस ने पैर में गोली मारी। 13 जून को खुसरूपुर थाना क्षेत्र में अपराधी अंगेश कुमार ने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। उसी दिन दानापुर हत्या मामले में एक आरोपित ने आत्मसमर्पण के बाद पिस्टल बरामदगी के दौरान फायरिंग कर दी, जिसमें उसके पैर में गोली लगी।


25 जून को जेपी गंगा पथ पर हत्याकांड समेत आठ मामलों में वांछित राजा ने एसटीएफ पर फायरिंग की। एसटीएफ ने जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली मार दी। 7 जुलाई को मालसलामी थाना क्षेत्र के पीरदमड़िया घाट के पास ईंट-भट्ठे के समीप मुठभेड़ में विकास उर्फ राजा को पुलिस ने ढेर कर दिया। 13 जुलाई को रानीतालाब थाना क्षेत्र में लूटपाट के मामले में गिरफ्तार आरोपित सूरज के पैर में गोली मारी गई।


6 अगस्त को कुख्यात अपराधी रोशन शर्मा को पकड़ने के लिए फुलवारीशरीफ में छापेमारी के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें रोशन के पैर में गोली लगी। 17 अगस्त को आलमगंज थाना क्षेत्र के बिस्कोमान गोलंबर के पास कुख्यात विजय सहनी के साथ मुठभेड़ में उसे भी पैर में गोली लगी। 16 नवंबर को खुसरूपुर थाना क्षेत्र के हरदास बिगहा स्टेशन जाने वाली सड़क पर इनामी अपराधी मिथुन कुमार के साथ मुठभेड़ हुई। 10 दिसंबर को जानीपुर थाना क्षेत्र में बैंककर्मी से रंगदारी मांगने और फायरिंग करने वाले आरोपित को मुठभेड़ में गोली लगी।


17 दिसंबर को छपरा में चिकित्सक अपहरण के असफल प्रयास के मामले में वांछित दो आरोपितों से मुठभेड़ हुई, दोनों के पैर में गोली मारी गई। 27 दिसंबर को गोपालगंज के थावे स्थित मां भवानी मंदिर में चोरी के एक आरोपित से मुठभेड़ हुई। 31 दिसंबर को बेगूसराय में इनामी माओवादी संगठन के जोनल सचिव को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। इसके बाद 2 जनवरी को खगौल में मैनेजर राय की गिरफ्तारी हुई।


पुलिस की नजर अब उन युवाओं पर भी है, जो अपराध की राह पर कदम रख रहे हैं। हाल ही में एक किशोर ने मामूली विवाद में हत्या कर दी थी। हथियार बरामदगी के दौरान उसने पुलिस पर फायरिंग की, जवाब में उसके पैर में गोली मारी गई। पुलिस का साफ संदेश है—अपराध करेंगे तो कार्रवाई तय है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से आम लोगों में भरोसा बढ़ा है और अपराधियों में दहशत का माहौल बना हुआ है।