Patliputra Greenfield Satellite Township: पटना में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर जमीन मालिकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। टाउनशिप के प्रस्तावित क्षेत्र में आने वाली जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक अब हटा दी गई है। हालांकि, सरकार ने जमीन मालिकों को पूरी तरह खुली छूट नहीं दी है। जमीन बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा।

यानी अगर आपकी जमीन प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के दायरे में आती है और आप उसे बेचना चाहते हैं, तो सीधे रजिस्ट्री कराने के बजाय पहले संबंधित विभाग को इसकी सूचना देनी होगी। जमीन बेचने की वजह भी स्पष्ट करनी होगी। सरकार के इस फैसले से उन किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अपनी संपत्ति से जुड़ी आर्थिक या दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए जमीन बेचने में परेशानी हो रही थी।

जमीन बेचने से पहले सरकार को बताना होगा कारण

पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए चिन्हित क्षेत्र में जमीन के लेन-देन को लेकर अब प्रक्रिया स्पष्ट कर दी गई है। जमीन मालिक अगर अपनी जमीन बेचना या किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करना चाहता है, तो उसे पहले नगर विकास एवं आवास विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी।

इसके साथ ही जमीन की बिक्री या हस्तांतरण की वजह भी बतानी होगी। इसका मतलब यह हुआ कि जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी पूर्ण रोक हट गई है, लेकिन सरकार की निगरानी में लेन-देन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जमीन मालिकों के लिए यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए जमीन का सौदा करना परेशानी खड़ी कर सकता है।

क्यों लगाई गई थी जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक?

दरअसल, पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की घोषणा के बाद प्रस्तावित क्षेत्र की जमीन को लेकर बाजार में गतिविधियां तेज होने लगी थीं। बड़े स्तर पर विकसित होने वाली इस टाउनशिप के कारण भविष्य में जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए जमीन की खरीद-बिक्री में तेजी आने लगी थी।

सरकार को आशंका थी कि टाउनशिप की घोषणा के बाद कुछ लोग जमीन की सट्टेबाजी कर सकते हैं। बिचौलियों के सक्रिय होने और जमीन के कारोबार में अनियमितता की आशंका को देखते हुए संबंधित इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई थी।

हालांकि, इसका असर उन स्थानीय लोगों और किसानों पर भी पड़ा, जिन्हें अपनी जमीन किसी वास्तविक जरूरत के कारण बेचनी थी। कई जमीन मालिक आर्थिक जरूरत, पारिवारिक खर्च या अन्य जरूरी परिस्थितियों में अपनी संपत्ति का इस्तेमाल करना चाहते थे। रोक के कारण उनके लिए जमीन का लेन-देन मुश्किल हो गया था।

1 अगस्त की अधिसूचना के बाद बदली व्यवस्था

जमीन मालिकों की व्यावहारिक परेशानियों को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने 1 अगस्त को औपचारिक अधिसूचना जारी कर खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी। अब जमीन मालिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी जमीन का लेन-देन कर सकते हैं। हालांकि, बिक्री या हस्तांतरण से पहले विभाग को सूचना देना और उसके पीछे का कारण बताना जरूरी होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक तरफ वास्तविक जरूरत वाले जमीन मालिकों को राहत देना और दूसरी तरफ टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की अंधाधुंध सट्टेबाजी पर नजर रखना है।

81,730 एकड़ में विकसित होगी नई टाउनशिप

पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का प्रस्तावित आकार इसे बिहार की बड़ी शहरी विकास परियोजनाओं में शामिल करता है। योजना के अनुसार करीब 81,730 एकड़ क्षेत्र में इस टाउनशिप को विकसित किया जाना है।इसका क्षेत्रफल वर्तमान पटना शहर से भी बड़ा बताया जा रहा है। टाउनशिप में आधुनिक आवासीय क्षेत्र के साथ रोजगार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की योजना है।

प्रस्तावित योजना में करीब 35 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय उपयोग के लिए रखा जाना है। यहां नई रिहायशी बस्तियों के साथ बहुमंजिला आवासीय सोसाइटियों के विकास की संभावना है। वहीं करीब 6 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों और मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए प्रस्तावित है।

पार्क से लेकर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक की योजना

ग्रीनफील्ड टाउनशिप को केवल आवासीय इलाका बनाने के बजाय एक आधुनिक और योजनाबद्ध शहर के रूप में विकसित करने की तैयारी है। योजना में बेहतर सड़क और परिवहन नेटवर्क के साथ बड़े ग्रीन बेल्ट और पार्क विकसित करने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी सेंटर विकसित किए जाने की योजना है। शिक्षा के क्षेत्र में भी उच्च स्तर के संस्थानों को जगह देने का प्रस्ताव है। इससे भविष्य में इस इलाके में रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

ड्राफ्ट प्लान पर 60 दिन तक दे सकते हैं सुझाव

टाउनशिप के प्रस्तावित ड्राफ्ट प्लान को लेकर आम लोगों, किसानों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी गई हैं। बिहार शहरी आयोजना एवं विकास बोर्ड की ओर से इसके लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।इस अवधि में स्थानीय लोग टाउनशिप के प्रस्तावित प्लान को लेकर अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद योजना में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

ऐसे में फिलहाल पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के दायरे में आने वाले जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हट गई है, लेकिन लेन-देन से पहले विभाग को सूचना देना और बिक्री का कारण स्पष्ट करना जरूरी होगा। सरकार की यह व्यवस्था जमीन मालिकों को राहत देने के साथ-साथ टाउनशिप क्षेत्र में अनियंत्रित जमीन कारोबार पर निगरानी रखने के उद्देश्य से लागू की गई है।