Bihar News : राजधानी पटना में एक युवक के कथित अपहरण के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। न्यू करबिगहिया इलाके में परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर आगजनी की, पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपहृत युवक की सकुशल बरामदगी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था और सरकार के अपराध नियंत्रण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, लापता युवक की पहचान न्यू करबिगहिया कब्रिस्तान गली निवासी बंटी कुमार (33 वर्ष) के रूप में हुई है। बंटी इलाके में किराना दुकान चलाता है। परिवार का आरोप है कि सोमवार देर रात पटना जंक्शन के पास दही खरीदने के दौरान कुछ बदमाशों ने पहले उसके साथ मारपीट की और फिर ब्लैक रंग की स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर उसका अपहरण कर लिया। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें कथित तौर पर पूरी वारदात कैद हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजधानी के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक में युवक का अपहरण हो जाता है, सीसीटीवी फुटेज भी सामने आता है, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस उसे बरामद नहीं कर पाती। आखिर राजधानी में अगर कोई व्यक्ति सुरक्षित नहीं है तो आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
बंटी की बहन गुड़िया देवी ने आरोप लगाया कि उनके भाई ने इलाके में कथित देह व्यापार के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका दावा है कि इसी कारण सुनियोजित तरीके से उसका अपहरण कराया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी तक पुलिस की ओर से नहीं की गई है, लेकिन परिवार लगातार इसी एंगल से जांच की मांग कर रहा है। घटना के बाद परिजनों ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि शुरुआती घंटों में पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी रही। परिवार का कहना है कि यदि शिकायत मिलते ही तेजी से कार्रवाई की जाती तो शायद अब तक बंटी का सुराग मिल चुका होता। इसी नाराजगी ने धीरे-धीरे बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया।
मंगलवार को पहले कोतवाली थाना परिसर में हंगामा हुआ और उसके बाद न्यू करबिगहिया इलाके में सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर टायर जलाए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। आगजनी के कारण इलाके में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन लोग युवक की बरामदगी से पहले पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
इस दौरान बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए इलाके में लागू आदर्श आचार संहिता का भी हवाला दिया गया और प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी गई, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिखा। यह भी सवाल उठ रहा है कि जब चुनाव को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होने के दावे किए जा रहे हैं, तब राजधानी के बीचों-बीच इस तरह की घटना कैसे हो गई? क्या पुलिस की प्राथमिकताएं बदल गई हैं या अपराधियों में कानून का डर कम हो चुका है?
इधर पुलिस ने मामले में बजरंगी और रोहित नाम के दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य इनपुट के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। कई टीमों के साथ विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी सक्रिय किया गया है और संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। हालांकि पुलिस की यह दलील लोगों के गुस्से को शांत नहीं कर पा रही है। परिजनों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है, लेकिन बंटी अब तक नहीं मिला है। हर गुजरता घंटा परिवार की चिंता और बढ़ा रहा है।
राजधानी पटना में हुई यह घटना सिर्फ एक अपहरण का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह सरकार के उस दावे की भी परीक्षा बन गई है जिसमें अपराध पर नियंत्रण और बेहतर कानून-व्यवस्था की बात कही जाती है। जब राजधानी में दिनदहाड़े या देर रात किसी व्यक्ति को कथित तौर पर अगवा कर लिया जाता है और कई घंटे बाद भी पुलिस उसे बरामद नहीं कर पाती, तब आम नागरिकों का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ी चुनौती अपहृत युवक बंटी कुमार को सकुशल बरामद करना है। यदि जल्द सफलता नहीं मिलती है तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है तथा यह मामला राजनीतिक रूप भी ले सकता है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के सामने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ही नहीं, बल्कि जनता का भरोसा वापस जीतने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।