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NEET student rape case : पटना में NEET छात्रा से गैंगरेप और मर्डर? पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा के बाद अब SIT की जांच शुरू, जानिए क्या है ताजा अपडेट

NEET student rape case : पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के साथ हुए रेप और हत्या मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने कई सनसनीखेज तथ्य उजागर किए हैं।

17-Jan-2026 09:17 AM

By First Bihar

NEET student rape case :  पटना के राजेंद्रनगर इलाके के हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा से हुई दरिंदगी और उसकी मौत मामले में नया मोड़ आ गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के शरीर पर चोटों के निशान इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि उसने लगभग डेढ़ से दो घंटे तक हमलावर से बचने की कोशिश की।


पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की मुख्य बातें

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई पोस्टमॉर्टम जांच में छात्रा के शरीर पर कई गंभीर और ताजा चोटें पाई गई हैं। रिपोर्ट में दर्ज है कि ये चोटें मौत से पहले की हैं और रेप के दौरान लगी हैं।


गर्दन और कंधे: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज है कि गर्दन और कंधे पर Crescentic Nail Abrasions यानी नाखून के घाव पाए गए। डॉक्टरों के अनुसार, यह निशान तब बनते हैं जब पीड़िता खुद को बचाने की कोशिश करती है और हमलावर उसे जबरन पकड़ने या खींचने की कोशिश करता है।


छाती और कंधे के नीचे: यहाँ Multiple Scratch Marks यानी खरोंच के निशान पाए गए। ये निशान बताते हैं कि छात्रा को लंबे समय तक दबाया गया या जमीन पर रगड़ा गया।


पीठ: पीठ पर नीले निशान (bruises) मिले हैं, जो बताते हैं कि उसे किसी कठोर सतह से रगड़ा गया। डॉक्टरों का कहना है कि ये चोटें केवल कुछ मिनट की नहीं, बल्कि लंबे समय तक संघर्ष का परिणाम हैं।


जननांग की जांच: सबसे अहम जांच में पाया गया कि प्राइवेट पार्ट में ताजा चोटें, गहरी रगड़ और ब्लीडिंग हुई है। मेडिकल बोर्ड की राय है कि ये चोटें forceful penetration का परिणाम हैं, और किसी भी तरह की सहमति से बनी नहीं हैं। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि छात्रा बेहोश नहीं थी, बल्कि उसने खुद को बचाने के लिए लगातार संघर्ष किया। चोटों और खरोंचों के पैटर्न के आधार पर डॉक्टरों ने यह भी माना कि हमले में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।


परिवार की आशंकाएं और आरोप

छात्रा के परिवार का आरोप है कि हॉस्टल संचालक ने FIR के बाद पैसे देने की पेशकश की। परिवार का सवाल है कि अगर मामला साफ था तो समझौते की जरूरत क्यों पड़ी। इसके अलावा, पोस्टमॉर्टम के शुरुआती संकेत गंभीर होने के बावजूद तीन संदिग्धों को छोड़ दिए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिवार का मानना है कि घटना में पीड़िता का कोई जानने वाला शामिल हो सकता है और पुलिस ने क्या पूरी गहराई से जांच की, इस पर संदेह है।


पुलिस और जांच दल की कार्रवाई

पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अब तक मिले सबूतों के आधार पर जांच जारी है। FSL की टीम ने सैंपल लिए हैं, जिनकी जांच अभी बाकी है। मृतका के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि डिलीट किए गए वीडियो या संदेश रिकवर किए जा सकें।छात्रा के हॉस्टल में आने और जाने तक का सीसीटीवी फुटेज भी लिया गया है। ASP सदर अभिनव के नेतृत्व में जांच दल  का गठन किया गया है। इसमें सचिवालय SDPO 1 डॉक्टर अनु, सचिवालय SDPO 2 साकेत कुमार, जक्कनपुर थानेदार ऋतुराज सिंह, कदमकुंआ थानेदार जनमेजय राय और महिला अधिकारी समेत सात लोग शामिल हैं। पत्रकारनगर की SHO रौशनी कुमारी को इस जांच से दूर रखा गया है।


DGP का संज्ञान और उच्च स्तरीय SIT

DGP विनय कुमार ने इस मामले पर हायर लेवल SIT का गठन किया है। ज़ोनल IG पटना जितेंद्र राणा को जांच का निर्देश दिया गया है। SIT के तहत अलग-अलग पहलुओं जैसे कॉल डिटेल्स, हॉस्टल एंट्री-एग्जिट और पीड़िता के जान-पहचान के कड़ियों की गहन जांच की जा रही है।


पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच के आधार पर यह स्पष्ट है कि छात्रा के साथ जबरदस्ती की गई और यह कोई क्षणिक घटना नहीं थी। शरीर पर फैली चोटें, खरोंच और नीले निशान साबित करते हैं कि यह लंबी और हिंसक घटना थी। रिपोर्ट में डॉक्टरों ने साफ कहा है कि यौन शोषण हुआ और मौत के अंतिम कारण की पुष्टि के लिए विसरा को सुरक्षित रखते हुए एम्स में भेजा गया है। परिवार और पुलिस दोनों के बीच उठ रहे सवाल और लंबित फोरेंसिक जांच इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना रहे हैं। अब सबकी निगाहें SIT की आगे की कार्रवाई पर हैं, ताकि सच सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।