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25-Jan-2026 11:57 AM
By First Bihar
ASP Abhinav Kumar : इन दिनों पटना में एक नीट छात्रा की गर्ल्स हॉस्टल में हुई संदिग्ध मौत ने बिहार की राजनीति, प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सामने आते ही सुर्खियों में आ गया और शुरुआती पुलिसिया दावों से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक की कहानी ने पूरे घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील और विवादास्पद बना दिया।
घटना के शुरुआती दिनों में पटना पुलिस ने साफ शब्दों में कहा था कि छात्रा के साथ रेप या किसी तरह के यौन उत्पीड़न के कोई सबूत नहीं मिले हैं। पटना सदर के एएसपी अभिनव कुमार ने सबसे पहले यह दावा किया था कि डॉक्टरों ने भी ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं की है। इसके बाद पटना के एसएसपी ने भी उसी बयान को दोहराया। पुलिस की ओर से लगातार यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मामला संदिग्ध जरूर है, लेकिन यौन हिंसा से जोड़ने का कोई ठोस आधार नहीं है।
हालांकि, 14 जनवरी को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया कि छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस एक पंक्ति ने न सिर्फ पुलिस के शुरुआती दावों पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि पटना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक पुलिस की जमकर आलोचना होने लगी और यह सवाल उठने लगे कि बिना अंतिम मेडिकल रिपोर्ट के इतनी जल्दबाजी में क्लीन चिट कैसे दी गई।
मामले ने जब तूल पकड़ा तो पुलिस प्रशासन को जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन करना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि शुरुआती बयान देने वाले एएसपी अभिनव कुमार को भी इसी एसआईटी का सदस्य बनाया गया। इससे विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठाए। फिलहाल एसआईटी अलग-अलग एंगल से मामले की जांच कर रही है, जिसमें हॉस्टल प्रबंधन, आसपास के लोगों, कॉल डिटेल्स और मेडिकल रिपोर्ट के हर पहलू को खंगाला जा रहा है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एएसपी अभिनव कुमार को लेकर विरोध तेज होता नजर आ रहा है। एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मीडिया की भीड़ उन्हें घेरकर सवाल पूछती दिखाई दे रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एएसपी सवालों का सीधा जवाब देने से बचते हुए वहां से निकल जाते हैं। इस दृश्य ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है और लोग पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
अगर अभिनव कुमार के प्रोफाइल पर नजर डालें तो वे एक तेज-तर्रार और पढ़े-लिखे अधिकारी माने जाते हैं। अभिनव ने वर्ष 2021 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। वे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने ऑल इंडिया 146वीं रैंक हासिल की थी। यह उनकी दूसरी कोशिश थी, जिसमें उन्हें सफलता मिली। खुद अभिनव का मानना है कि यूपीएससी में प्रीलिम्स सबसे कठिन चरण होता है, जबकि इंटरव्यू उन्हें सबसे आसान लगा था।
उनकी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर के जीडी मदर इंटरनेशनल स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वर्ष 2012 से 2017 के बीच उन्होंने बीटेक के साथ एमबीए की डिग्री भी हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में कदम रखा और करीब एक साल तक ट्रिबो होटल में बिजनेस एनालिसिस्ट के रूप में काम किया। इसके बाद वे कार्स 24 में डिप्टी मैनेजर के पद पर रहे, जहां उन्होंने बिजनेस विस्तार से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।
अच्छी नौकरी और करियर के बावजूद अभिनव के मन में सिविल सेवा में जाने की इच्छा बनी रही। उन्होंने दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले अटेम्प्ट में वे मेन्स परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने और कड़ी मेहनत की और दूसरे अटेम्प्ट में इंटरव्यू तक का सफर तय करते हुए आईपीएस बनने में कामयाब रहे। बारहवीं कक्षा में उन्होंने 79 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और कॉलेज में अपने डिपार्टमेंट के गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुके हैं।
अभिनव बताते हैं कि नौवीं कक्षा में ही उन्होंने यूपीएससी करने का सपना देख लिया था। वे महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं और बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता तथा दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत विचार रखते हैं। पुलिस सेवा को तकनीकी रूप से मजबूत करना और जनता तथा पुलिस के बीच की दूरी कम करना उनके प्रमुख लक्ष्य रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने आईपीएस को अपनी पहली प्राथमिकता दी थी।
अगस्त 2024 से सितंबर 2024 तक उन्होंने हैदराबाद में ट्रेनिंग ली और सितंबर 2024 से अब तक पटना में सदर एएसपी के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के इस मामले ने उनके करियर के शुरुआती दौर में ही उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की जांच और आने वाले निष्कर्ष पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि सच्चाई क्या है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
ASP Abhinav Kumar : इन दिनों पटना में एक नीट छात्रा की गर्ल्स हॉस्टल में हुई संदिग्ध मौत ने बिहार की राजनीति, प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सामने आते ही सुर्खियों में आ गया और शुरुआती पुलिसिया दावों से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक की कहानी ने पूरे घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील और विवादास्पद बना दिया।
घटना के शुरुआती दिनों में पटना पुलिस ने साफ शब्दों में कहा था कि छात्रा के साथ रेप या किसी तरह के यौन उत्पीड़न के कोई सबूत नहीं मिले हैं। पटना सदर के एएसपी अभिनव कुमार ने सबसे पहले यह दावा किया था कि डॉक्टरों ने भी ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं की है। इसके बाद पटना के एसएसपी ने भी उसी बयान को दोहराया। पुलिस की ओर से लगातार यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मामला संदिग्ध जरूर है, लेकिन यौन हिंसा से जोड़ने का कोई ठोस आधार नहीं है।
हालांकि, 14 जनवरी को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया कि छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस एक पंक्ति ने न सिर्फ पुलिस के शुरुआती दावों पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि पटना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक पुलिस की जमकर आलोचना होने लगी और यह सवाल उठने लगे कि बिना अंतिम मेडिकल रिपोर्ट के इतनी जल्दबाजी में क्लीन चिट कैसे दी गई।
मामले ने जब तूल पकड़ा तो पुलिस प्रशासन को जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन करना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि शुरुआती बयान देने वाले एएसपी अभिनव कुमार को भी इसी एसआईटी का सदस्य बनाया गया। इससे विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठाए। फिलहाल एसआईटी अलग-अलग एंगल से मामले की जांच कर रही है, जिसमें हॉस्टल प्रबंधन, आसपास के लोगों, कॉल डिटेल्स और मेडिकल रिपोर्ट के हर पहलू को खंगाला जा रहा है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एएसपी अभिनव कुमार को लेकर विरोध तेज होता नजर आ रहा है। एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मीडिया की भीड़ उन्हें घेरकर सवाल पूछती दिखाई दे रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एएसपी सवालों का सीधा जवाब देने से बचते हुए वहां से निकल जाते हैं। इस दृश्य ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है और लोग पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
अगर अभिनव कुमार के प्रोफाइल पर नजर डालें तो वे एक तेज-तर्रार और पढ़े-लिखे अधिकारी माने जाते हैं। अभिनव ने वर्ष 2021 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। वे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने ऑल इंडिया 146वीं रैंक हासिल की थी। यह उनकी दूसरी कोशिश थी, जिसमें उन्हें सफलता मिली। खुद अभिनव का मानना है कि यूपीएससी में प्रीलिम्स सबसे कठिन चरण होता है, जबकि इंटरव्यू उन्हें सबसे आसान लगा था।
उनकी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर के जीडी मदर इंटरनेशनल स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वर्ष 2012 से 2017 के बीच उन्होंने बीटेक के साथ एमबीए की डिग्री भी हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में कदम रखा और करीब एक साल तक ट्रिबो होटल में बिजनेस एनालिसिस्ट के रूप में काम किया। इसके बाद वे कार्स 24 में डिप्टी मैनेजर के पद पर रहे, जहां उन्होंने बिजनेस विस्तार से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।
अच्छी नौकरी और करियर के बावजूद अभिनव के मन में सिविल सेवा में जाने की इच्छा बनी रही। उन्होंने दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले अटेम्प्ट में वे मेन्स परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने और कड़ी मेहनत की और दूसरे अटेम्प्ट में इंटरव्यू तक का सफर तय करते हुए आईपीएस बनने में कामयाब रहे। बारहवीं कक्षा में उन्होंने 79 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और कॉलेज में अपने डिपार्टमेंट के गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुके हैं।
अभिनव बताते हैं कि नौवीं कक्षा में ही उन्होंने यूपीएससी करने का सपना देख लिया था। वे महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं और बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता तथा दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत विचार रखते हैं। पुलिस सेवा को तकनीकी रूप से मजबूत करना और जनता तथा पुलिस के बीच की दूरी कम करना उनके प्रमुख लक्ष्य रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने आईपीएस को अपनी पहली प्राथमिकता दी थी।
अगस्त 2024 से सितंबर 2024 तक उन्होंने हैदराबाद में ट्रेनिंग ली और सितंबर 2024 से अब तक पटना में सदर एएसपी के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के इस मामले ने उनके करियर के शुरुआती दौर में ही उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की जांच और आने वाले निष्कर्ष पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि सच्चाई क्या है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।