Bihar Rapid Rail : पटना से मुजफ्फरपुर जाने वालों के लिए आने वाले वर्षों में सफर का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। अगर प्रस्तावित रैपिड रेल परियोजना जमीन पर उतरती है, तो दोनों शहरों के बीच करीब 80 से 120 किलोमीटर की दूरी एक घंटे के भीतर तय करने का लक्ष्य है। दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर बिहार में भी सेमी हाई स्पीड रीजनल रेल सेवा विकसित करने की दिशा में कवायद तेज हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआती तकनीकी तैयारी का काम शुरू कर दिया गया है।


पटना-मुजफ्फरपुर के बीच हाजीपुर के रास्ते प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) को वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (AAR) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। NCRTC की टीम ने करीब एक सप्ताह पहले इस दिशा में काम शुरू किया है। शुरुआती चरण में टीम यह पता लगाएगी कि प्रस्तावित कॉरिडोर पर किन इलाकों से सबसे अधिक यात्री मिल सकते हैं और लोगों की यात्रा की जरूरत किस दिशा में ज्यादा है।


यात्रियों की संभावित संख्या और यात्रा पैटर्न के अध्ययन के बाद रूट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि रास्ते में कहां-कहां स्टेशन बनाए जाएं और किन स्थानों पर ट्रेन का ठहराव यात्रियों के लिए ज्यादा उपयोगी होगा। यानी फिलहाल परियोजना का फोकस केवल रेल लाइन बिछाने पर नहीं, बल्कि ऐसे कॉरिडोर के निर्माण पर है, जिसका अधिक से अधिक लोग इस्तेमाल कर सकें।


प्रस्तावित आरआरटीएस सामान्य पैसेंजर ट्रेन या मेट्रो से अलग व्यवस्था होगी। सेमी हाई स्पीड रेल आधारित इस सेवा का उद्देश्य पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख शहरों को तेज और सुविधाजनक क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है। इसके लिए अलग आरआरटीएस कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक और औसत परिचालन गति करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की क्षमता बताई जा रही है। ऐसे में 80 से 120 किलोमीटर तक की दूरी करीब एक घंटे में पूरी करने की संभावना है।


फिलहाल सड़क या सामान्य रेल मार्ग से पटना और मुजफ्फरपुर के बीच सफर में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग जाता है। रैपिड रेल सेवा शुरू होने के बाद यात्रा समय में बड़ी कमी आ सकती है। इससे रोजाना पटना आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, कारोबारियों और अन्य यात्रियों को खास फायदा मिलने की उम्मीद है।


परियोजना की योजना में केवल रेल नेटवर्क तैयार करना ही शामिल नहीं है। यात्रियों को एकीकृत परिवहन सुविधा देने के लिए आरआरटीएस को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पटना मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है। इससे यात्रियों को एक माध्यम से दूसरे माध्यम तक पहुंचने में आसानी होगी और शहरों के भीतर तथा शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हो सकती है।


रूट तय करने के दौरान जमीन की जरूरत, निर्माण की तकनीक, संभावित लागत और दूसरे तकनीकी पहलुओं का भी आकलन किया जाएगा। AAR में अलग-अलग संभावित विकल्पों की तुलना के बाद सबसे उपयोगी मार्ग सामने लाने की कोशिश होगी। इसके बाद DPR में परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।


बिहार कैबिनेट ने जुलाई में मुजफ्फरपुर-हाजीपुर-पटना समेत राज्य में आरआरटीएस के चार कॉरिडोर के लिए AAR और DPR तैयार कराने को मंजूरी दी थी। इसके लिए 31.59 करोड़ रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी गई है। अब NCRTC को तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी मिलने के बाद परियोजना की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।


यह कॉरिडोर बिहार के तीन बड़े औद्योगिक और जनसांख्यिकीय केंद्रों—पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर—को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण परिवहन नेटवर्क बन सकता है। प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट को भी भविष्य में इस कॉरिडोर से जोड़ने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। अगर योजना तय समय के साथ आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में पटना से मुजफ्फरपुर का सफर तेज, आसान और अधिक सुविधाजनक हो सकता है।