Bihar News : पटना में चल रहे Patna Metro निर्माण कार्य के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, भूतनाथ मेट्रो स्टेशन के निर्माण के दौरान एक मजदूर स्लैब के नीचे फंस गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।


यह घटना पटना के भूतनाथ मेट्रो स्टेशन परिसर में हुई, जहां इन दिनों तेज़ी से निर्माण कार्य चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्रेन के जरिए भारी स्लैब को सेट करने का काम किया जा रहा था। उसी दौरान एक मजदूर, जो नीचे काम कर रहा था, अचानक मशीनरी के बीच इस तरह फंस गया कि वह खुद को बाहर नहीं निकाल सका।


घायल मजदूर की पहचान सिवान जिले के निवासी सतीश कुमार के रूप में हुई है, जो मेट्रो परियोजना में कार्यरत था। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और अन्य मजदूर घटनास्थल पर जुट गए। बताया जा रहा है कि शुरुआती कुछ मिनटों तक स्थिति बेहद गंभीर बनी रही क्योंकि मजदूर पूरी तरह मलबे और स्लैब के दबाव में फंसा हुआ था।


स्थानीय लोगों और सहकर्मियों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद मजदूर को बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे तुरंत नजदीकी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।


प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि हादसे के वक्त मौके पर मौजूद कुछ कर्मी तत्काल मदद करने के बजाय वीडियो बनाने में व्यस्त थे। ऐसे में स्थानीय लोगों ने ही साहस दिखाते हुए मजदूर को बचाने की पहल की। इस आरोप ने निर्माण स्थल पर कार्यरत एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


इस घटना के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना बेहद जरूरी है। मजदूरों के लिए उचित सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और निगरानी की व्यवस्था अनिवार्य होती है, लेकिन इस हादसे ने इन व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है।


वहीं दूसरी ओर, पटना मेट्रो परियोजना का काम लगातार आगे बढ़ रहा है। शहर का पहला भूमिगत स्टेशन मोइन-उल-हक़ भूमिगत मेट्रो स्टेशन लगभग तैयार हो चुका है। यह स्टेशन जमीन से करीब 22 मीटर नीचे बनाया गया है और इसका सिविल कार्य लगभग पूरा हो गया है। यहां से टनलिंग का काम भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।


पटना मेट्रो को शहर के ट्रैफिक जाम और परिवहन की समस्याओं का बड़ा समाधान माना जा रहा है। लेकिन इस तरह की घटनाएं परियोजना की गति के साथ-साथ उसकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे सुरक्षा मानकों की पुनः समीक्षा करें और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। फिलहाल सभी की नजर घायल मजदूर की हालत पर टिकी हुई है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी तेज हो गई है।