Greenfield Township : पटना हाई कोर्ट में ग्रीनफील्ड सैटलाइट टाउनशिप के नाम पर जमीन की खरीद-बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, जिला निबंधन कार्यालय को भी जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े नियम और पूरी प्रक्रिया अदालत के सामने रखने को कहा गया है।

जमीन पर रोक से परेशान मालिक, हाई कोर्ट पहुंचा मामला

मामला सीतामढ़ी जिले से जुड़ा है, जहां ग्रीनफील्ड सैटलाइट टाउनशिप के प्रस्ताव के बाद कुछ जमीनों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक लगाए जाने को चुनौती दी गई है। सीतामढ़ी के बैद्यनाथ हाथी और पांच अन्य लोगों ने इसको लेकर पटना हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है।

याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता बसंत चौधरी ने अदालत के सामने जमीन मालिकों की परेशानियों को रखा। उनका कहना था कि विकास परियोजना के नाम पर जमीन को प्रतिबंधित जोन घोषित कर दिया गया, लेकिन इसके लिए जमीन मालिकों की स्थिति और उनकी समस्याओं का विस्तृत आकलन नहीं किया गया।

वकील ने कोर्ट को बताया कि जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाए जाने के कारण जमीन मालिक अपनी संपत्ति का वैध तरीके से हस्तांतरण तक नहीं कर पा रहे हैं। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज पहले ही सीतामढ़ी के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा किए जा चुके हैं, इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।

विकास के नाम पर प्रतिबंध, लेकिन जमीन मालिकों का क्या?

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में सबसे अहम सवाल यही उठाया गया कि अगर किसी इलाके में सरकार भविष्य की बड़ी परियोजना के लिए जमीन को चिन्हित करती है तो क्या उसके आधार पर जमीन मालिकों को अपनी संपत्ति बेचने या उसका वैध हस्तांतरण करने से पूरी तरह रोका जा सकता है?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जमीन उनके लिए सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक जरूरतों का बड़ा आधार है। खासकर सीतामढ़ी जैसे कृषि प्रधान इलाके में बड़ी संख्या में परिवार खेती और जमीन पर निर्भर हैं। ऐसे में अचानक खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक लगने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी शिकायत की प्रकृति को गंभीरता से लिया। अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि जमीन मालिकों की ओर से उठाई गई शिकायतों के समाधान के लिए क्या व्यवस्था या तौर-तरीके प्रस्तावित हैं।

कोर्ट ने मांगी रजिस्ट्री की पूरी ‘मॉडेलिटी’

अदालत ने जिला निबंधन से जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित प्रक्रिया और प्रावधान यानी मॉडेलिटी पेश करने को कहा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में जमीन की वैध खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री को लेकर सरकार ने क्या व्यवस्था बनाई है।

अदालत की टिप्पणी से यह संकेत मिला कि सिर्फ प्रतिबंध लगाना ही पर्याप्त नहीं है। यदि किसी जमीन मालिक को अपनी संपत्ति की कानूनी रूप से रजिस्ट्री कराने की जरूरत है तो उसके लिए नियमों के दायरे में कोई व्यावहारिक रास्ता होना चाहिए। कोर्ट ने जिला निबंधन से अपेक्षा जताई कि वह ऐसी मॉडेलिटी अदालत के सामने रखे, जिससे जमीन मालिकों को कानूनी तरीके से अपनी जमीन की रजिस्ट्री कराने का रास्ता मिल सके।

खेती पर निर्भर परिवारों की चिंता भी उठी

याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया है कि संबंधित क्षेत्र कृषि प्रधान है। यहां कई ऐसे परिवार हैं जिनकी रोजी-रोटी सीधे खेती और जमीन से जुड़ी है। जमीन की बिक्री पर लंबे समय तक रोक रहने की स्थिति में उन्हें आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में परेशानी हो सकती है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि व्यक्तिगत जमीन मालिकों की परिस्थितियों पर अलग-अलग तरीके से विचार नहीं किया गया। किसी को इलाज, शिक्षा, शादी या दूसरी जरूरी आर्थिक जरूरत के लिए जमीन बेचनी हो सकती है, लेकिन प्रतिबंध के कारण वह अपनी ही संपत्ति का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है।

यही वजह है कि अब इस मामले में सरकार का जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार को अदालत के सामने यह बताना होगा कि ग्रीनफील्ड सैटलाइट टाउनशिप के लिए जमीन को प्रतिबंधित करने का आधार क्या है और प्रभावित जमीन मालिकों की शिकायतों के समाधान के लिए क्या व्यवस्था की गई है।

12 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही जिला निबंधन की ओर से जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित मॉडेलिटी भी अदालत में पेश की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार जमीन की खरीद-बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर अदालत के सामने क्या पक्ष रखती है और जमीन मालिकों को रजिस्ट्री की अनुमति देने के लिए किस तरह की व्यवस्था प्रस्तावित करती है।

फिलहाल, मामला सिर्फ कुछ जमीन मालिकों की रजिस्ट्री रुकने तक सीमित नहीं दिख रहा है। इसके केंद्र में विकास परियोजना, जमीन के इस्तेमाल पर सरकारी नियंत्रण और जमीन मालिकों के संपत्ति संबंधी अधिकार—तीनों बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।