Patna High Court: पटना में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। न्यायाधीश राजीव रॉय की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदूषण नियंत्रण में पूरी तरह विफल रहा है।


हाई कोर्ट में बोर्ड की ओर से सीनियर एडवोकेट शिवेंद्र किशोर ने कार्रवाई रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि मैरिज हॉलों को नोटिस जारी किए गए हैं और निर्माण स्थलों पर ‘ग्रीन नेट’ लगाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि न्यायालय मित्र अजय ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निकायों को भेजे गए पत्रों का कोई ठोस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।


सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यशैली भी कटघरे में आ गई। रूपसपुर थाना ने देरी से सूचना मिलने की बात कही, जबकि कदमकुआं थाना ने स्वीकार किया कि डीजे के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन वाहन पंजीकृत नहीं था। इस पर कोर्ट ने दोनों थानों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। राज्य सरकार के वकील प्रशांत प्रताप के अनुरोध पर अदालत ने अंतिम मौका दे दिया।


कोर्ट ने कंकड़बाग, पीरबहोर, आलमगंज, रूपसपुर, गांधी मैदान और बुद्धा कॉलोनी थानों की रिपोर्ट को असंतोषजनक बताते हुए संबंधित एसएचओ की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि लाउडस्पीकर अधिनियम, 1955 और शोर प्रदूषण नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए।


अदालत ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि बारात या जुलूस को रोके बिना डीजे और लाउडस्पीकर की वीडियोग्राफी की जाए और कार्यक्रम समाप्त होते ही कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी छह थानाध्यक्षों को 19 जून को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है। 


इसके अलावा, प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए “रन फॉर पॉल्यूशन” आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया। कोर्ट ने राजीव नगर और छपरा सदर क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण के उल्लंघन पर भी संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। बता दें कि लाउडस्पीकर अधिनियम, 1955 के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाना प्रतिबंधित है, और उल्लंघन करने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।