PATNA: पटना हाई कोर्ट में बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को अदालत में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। राज्य सरकार के वकीलों की ओर से बिना रिकॉर्ड के दलील दिए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद राज्य के महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग, वन विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिवों को शुक्रवार, 11 सितंबर को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। तीनों सचिवों को एकीकृत कार्ययोजना और निर्धारित समय-सीमा के साथ कोर्ट में आने को कहा गया है।
बिना रिकॉर्ड के दी गई दलील पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता-3 पी.के. वर्मा ने दावा किया कि महात्मा गांधी सेतु के नीचे के क्षेत्र के विकास को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्रमंडल की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया है। इस पर पीठ ने उन्हें रिकॉर्ड दिखाने को कहा।जब रिकॉर्ड की जांच की गई तो पूरी फाइल खंगालने के बावजूद ऐसा कोई हलफनामा नहीं मिला। बिना रिकॉर्ड के दलील दिए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई। इसी दौरान महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने खुद को मामले से अलग करने का निर्णय लिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिहार न्यायिक अकादमी और न्याय व्यवस्था से जुड़े इतने संवेदनशील मामले में बिना हलफनामे या रिकॉर्ड के दलील दिया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने कहा कि जब दलीलों का रिकॉर्ड से मिलान करने को कहा गया तो महाधिवक्ता ने खुद को मामले से अलग कर लिया।
महात्मा गांधी सेतु के नीचे विकास कार्य में देरी पर भी नाराजगी
अदालत ने अपने 3 जून 2026 के पूर्व आदेश का भी हवाला दिया। कोर्ट ने बताया कि उस आदेश में महात्मा गांधी सेतु के नीचे घेराबंदी और पौधारोपण का काम 30 जून 2026 तक पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ।
वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना पार्क डिवीजन की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि अतिक्रमण हटाए गए स्थान पर पार्क निर्माण का प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग को प्रशासनिक स्वीकृति और फंड के लिए भेजा गया है।वहीं, पथ निर्माण विभाग की ओर से बताया गया कि बाउंड्री वॉल के निर्माण के लिए री-टेंडर जारी किया गया है और काम दो महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
याचिकाकर्ता ने विभागों के बीच समन्वय पर उठाए सवाल
बिहार न्यायिक अकादमी की ओर से अधिवक्ता पीयूष लाल ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे मुख्य रूप से उत्तरी दीवार से संबंधित हैं। पूर्वी हिस्से और महात्मा गांधी सेतु के नीचे के क्षेत्र के विकास को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यह याचिका किसी प्रतिद्वंद्वी मुकदमेबाजी का हिस्सा नहीं है, बल्कि न्याय प्रशासन की सुरक्षा और उसके बेहतर वातावरण से जुड़ी है।
पूर्व आदेशों का पालन नहीं होने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने पथ निर्माण विभाग, वन विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिवों को शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। अदालत ने तीनों सचिवों से एकीकृत कार्ययोजना, स्पष्ट समय-सीमा और कार्यों की प्रगति के संबंध में जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।