Bihar News : राजधानी पटना में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना की घोषणा के बाद जिले के जमीन कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। सरकार द्वारा दनियावां, फतुहा, धनरूआ, मसौढ़ी, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, फुलवारीशरीफ और संपतचक समेत कुल नौ प्रखंडों के 275 मौजा में जमीन की खरीद-बिक्री, एग्रीमेंट और नए निर्माण कार्यों पर 31 मार्च 2027 तक रोक लगाए जाने के बाद रियल एस्टेट बाजार लगभग ठप पड़ गया है।
इस फैसले का असर खासकर पटना सदर निबंधन कार्यालय में साफ दिखाई दे रहा है, जहां रोजाना होने वाली रजिस्ट्री की संख्या में करीब 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां हर कार्यदिवस में औसतन 150 दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती थी, अब यह संख्या घटकर मात्र 35 से 45 के बीच रह गई है।
जमीन कारोबार में अचानक मंदी
सरकारी प्रतिबंध के बाद जमीन कारोबार से जुड़े डीलरों, बिचौलियों और प्रॉपर्टी एजेंटों का कामकाज भी प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में खरीद-बिक्री की रफ्तार लगभग थम सी गई है। निवेशक और खरीदार भी फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपना रहे हैं, क्योंकि उन्हें भविष्य की परियोजना और मुआवजा/लाभ से जुड़ी स्पष्टता का इंतजार है।
हालांकि, वित्तीय वर्ष 2025-26 में पटना जिले ने जमीन रजिस्ट्री और राजस्व संग्रह के मामले में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया था। इस अवधि में कुल 1 लाख 28 हजार 367 रजिस्ट्री दर्ज की गई थीं। जिले का राजस्व लक्ष्य 1361.38 करोड़ रुपये था, जबकि वास्तविक प्राप्ति 1506.38 करोड़ रुपये रही, जो लक्ष्य से लगभग 110.31 प्रतिशत अधिक है। यह राज्य में किसी भी जिले का सबसे बड़ा राजस्व संग्रह माना गया।
प्रमुख प्रखंडों का प्रदर्शन
पटना जिले में दानापुर प्रखंड ने रजिस्ट्री के मामले में सबसे अधिक योगदान दिया था। यहां 12 हजार 633 रजिस्ट्री दर्ज की गईं और 190.68 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 255.72 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं पटना सदर निबंधन कार्यालय ने भी लगभग 190 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार के खाते में जमा कराया था।
सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना का उद्देश्य
सरकार द्वारा प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का उद्देश्य राजधानी पटना में बढ़ती आबादी और अनियंत्रित शहरी विस्तार को नियंत्रित करना है। लगभग 1010 एकड़ के कोर क्षेत्र में इस परियोजना का विकास किया जा रहा है, जिसे भविष्य में 81 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र तक विस्तार देने की योजना है।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के तहत चंडीगढ़ और नोएडा की तर्ज पर आधुनिक शहरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसमें 100 से 140 फीट चौड़ी सड़कें, स्पोर्ट्स सिटी, फिनटेक सिटी और लॉजिस्टिक हब जैसी संरचनाएं शामिल होंगी।
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
जिला प्रशासन के अनुसार, इस परियोजना से जुड़े किसानों और रैयतों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले विकसित भूमि का 55 प्रतिशत हिस्सा वापस दिया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि इस योजना से किसानों को वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में 10 से 20 गुना तक अधिक लाभ मिल सकता है। प्रशासन का यह भी कहना है कि इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही पुराने शहर में जनसंख्या का दबाव भी कम होगा।
फतुहा और पुनपुन क्षेत्र में सबसे बड़ा विस्तार
इस परियोजना का सबसे बड़ा विस्तार फतुहा और पुनपुन प्रखंडों में प्रस्तावित है। दोनों क्षेत्रों के कुल 150 से अधिक मौजा को टाउनशिप योजना में शामिल किया गया है। फतुहा में 70 से अधिक और पुनपुन में लगभग 85 मौजा इस परियोजना का हिस्सा होंगे। इसके अलावा नौबतपुर के 45-50, धनरूआ के लगभग 30, मसौढ़ी के 15 और दनियावां के 8 मौजा भी इसमें शामिल किए गए हैं। फुलवारीशरीफ, संपतचक और पटना ग्रामीण क्षेत्र के अपेक्षाकृत कम मौजा इस योजना में शामिल हैं।
कारोबारियों में चिंता और इंतजार की स्थिति
जमीन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि रोक के कारण बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। खरीदार और विक्रेता दोनों ही फिलहाल किसी बड़े सौदे से बच रहे हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यह रोक अस्थायी है और इससे भविष्य में क्षेत्र का विकास कई गुना तेजी से होगा। पटना सदर निबंधन कार्यालय के सब रजिस्ट्रार रविरंजन ने बताया कि पिछले पखवाड़े में रजिस्ट्री में भारी गिरावट आई है। पहले जहां रोजाना लगभग 150 रजिस्ट्री होती थीं, अब यह संख्या घटकर 35 से 40 रह गई है।
ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना जहां एक ओर पटना के भविष्य के शहरी विकास की बड़ी योजना मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसने मौजूदा जमीन बाजार को लगभग ठप कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह परियोजना वास्तव में किसानों और निवेशकों दोनों के लिए कितना लाभकारी साबित होती है।