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03-Feb-2026 12:19 PM
By First Bihar
Bihar council news : बिहार विधान परिषद के दूसरे दिन आज राजनीतिक हलचल बढ़ गई। जेडीयू MLC नीरज कुमार ने विधानसभा में खुद की सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नीरज कुमार ने कहा कि पटना के गार्डिनर रोड अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा पिछले एक साल से बंद है, लेकिन इस गंभीर समस्या पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नीरज कुमार ने विधान परिषद में कहा कि गार्डिनर रोड अस्पताल शहर के बीचो-बीच स्थित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है. यहाँ अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत जांच सुविधा का बंद रहना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल किया कि इतने लंबे समय तक स्वास्थ्य विभाग इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहा और मरीजों को क्यों परेशान किया जा रहा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रहने का कारण रेडियोलॉजिस्ट की कमी बतायी जा रही है. नीरज कुमार ने इसे "घोर आश्चर्य का विषय" करार देते हुए कहा कि मरीजों की जाँच में किसी तरह की कमी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि अल्ट्रासाउंड मशीन केवल उपकरण नहीं, बल्कि यह चिकित्सकों के मार्गदर्शन के बिना मरीजों के लिए पूरी तरह से उपयोगी नहीं है। इसलिए प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट की मौजूदगी जरूरी है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया लगातार जारी रही है। उन्होंने बताया कि विभाग लगातार प्रयास करता रहा है कि विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जा सके, लेकिन जितने पद खाली हैं, उतने ही आवेदन नहीं आते। मंत्री ने कहा, “अगर आवेदन देने के लिए लोग आते ही नहीं हैं तो फिर नियुक्ति कैसे कर सकते हैं?”
मंत्री ने यह भी कहा कि गार्डिनरअस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रहना “काफी दुर्भाग्यपूर्ण विषय” है और इसके समाधान के लिए विभाग तुरंत कदम उठाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले कुछ सप्ताह में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी और मरीजों को जल्द ही अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
नीरज कुमार की आलोचना और मंत्री के जवाब से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सेवा के सुधार और डॉक्टरों की नियुक्ति में गंभीर अंतराल है। पटना जैसे बड़े शहर में मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाना चिंता का विषय है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण शहर के अस्पतालों में मरीजों को दूसरी जगहों पर जाना पड़ रहा है।