Bihar Flood : बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच पटना के लोगों के लिए थोड़ी राहत की खबर सामने आई है। गंगा के जलस्तर में अब गिरावट दर्ज की जाने लगी है। पिछले 24 घंटे में दीघा घाट पर गंगा का पानी 24 सेंटीमीटर और गांधी घाट पर 15 सेंटीमीटर नीचे आया है। हालांकि, राहत अभी पूरी तरह नहीं मिली है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, गंगा को खतरे के निशान से नीचे आने और हालात सामान्य होने में अभी करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है।

मंगलवार को दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.01 मीटर ऊपर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 50.45 मीटर है। वहीं गांधी घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से 1.61 मीटर ऊपर रहा। गांधी घाट का खतरे का निशान 48.60 मीटर निर्धारित है।

पुनपुन नदी की रफ्तार धीमी, दक्षिणी पटना में परेशानी कायम

गंगा के जलस्तर में कमी जरूर आई है, लेकिन पुनपुन नदी अभी भी दक्षिणी पटना के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। श्रीपालपुर गेज प्वाइंट पर पिछले 24 घंटे में जलस्तर सिर्फ 3 सेंटीमीटर कम हुआ है। यहां पानी अभी भी खतरे के निशान से करीब 2.90 मीटर ऊपर है। पुनपुन के पानी से दक्षिणी पटना के कई इलाकों में रिहायशी बस्तियों से लेकर खेत-खलिहान तक प्रभावित हैं। पानी घटने की धीमी रफ्तार के कारण लोगों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है।

201 नावों से राहत और बचाव अभियान

बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को 22 अतिरिक्त नावें राहत कार्य में लगाई गईं। अब मनेर, दानापुर, पाटलिपुत्र, पुनपुन, बख्तियारपुर और मोकामा समेत कई अंचलों में कुल 201 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। इसके अलावा एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की 10 टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। डीएम कुंदन कुमार ने अधिकारियों को खास तौर पर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।

34 सामुदायिक रसोई केंद्र, बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 34 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के जरिए प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध की व्यवस्था भी की गई है। वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित प्रसव और जरूरी चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

13 साल पुराना सवाल: जमींदारी बांधों की मरम्मत क्यों नहीं हुई?

पुनपुन के पानी से पैदा हुए संकट ने जमींदारी बांधों की स्थिति पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि करीब 13 साल पहले जिम्मेदारी मिलने के बावजूद इन बांधों की ऊंचाई बढ़ाने और उनकी पक्की मरम्मत का काम अपेक्षित तरीके से नहीं हुआ।

नवंबर 2013 में राज्य सरकार ने 1163 जमींदारी बांध राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से लेकर जल संसाधन विभाग को सौंपे थे। उद्देश्य था कि इन बांधों की ऊंचाई बढ़ाई जाए और उनकी मरम्मत कर ग्रामीण इलाकों को बार-बार आने वाली बाढ़ से सुरक्षा दी जाए।

लेकिन मौजूदा बाढ़ के दौरान कई जगह इन बांधों में रिसाव, टूटने और ओवरफ्लो की स्थिति सामने आई। इसके बाद प्रभावित इलाकों में बालू की बोरियां डालकर पानी को रोकने की कोशिश की गई। हालांकि, तब तक दक्षिणी पटना के कई हिस्सों में पानी फैल चुका था।

बिहार के कई जिलों में जमींदारी और रिंग बांध

राज्य के कई जिलों में जमींदारी और रिंग बांध बाढ़ से सुरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और वैशाली में बूढ़ी गंडक, बागमती और बाया नदी से जुड़े क्षेत्र प्रभावित होते हैं। दरभंगा और मधुबनी में कमला-बलान, बागमती और अधवारा समूह की नदियों का प्रभाव रहता है।

पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में गंडक और सिकरहना, जबकि सहरसा, सुपौल और मधेपुरा में कोसी का प्रभाव रहता है। खगड़िया और बेगूसराय में गंगा, गंडक और कोसी के संगम क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं। कटिहार, पूर्णिया और अररिया में महानंदा और उसकी सहायक नदियां अहम हैं। वहीं गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, नालंदा और पटना में पुनपुन, फल्गु, दरधा और लोकाइन जैसी नदियां बाढ़ का कारण बनती हैं।

उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, राज्य में वैज्ञानिक तरीके से करीब 3800 किलोमीटर तटबंध बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ जगह पुराने जमींदारी या लघु बांध क्षतिग्रस्त हुए हैं और उनसे उत्पन्न बाढ़ की समस्या पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं।

पटना-गया रेलखंड पर आज से ट्रेन सेवा बहाल

बाढ़ के कारण पटना-गया रेलखंड पर बाधित ट्रेन परिचालन भी बुधवार से बहाल किया जा रहा है। पुनपुन और परसा बाजार के बीच पुल संख्या-21 पर पानी खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बाद डाउन लाइन पर परिचालन निलंबित किया गया था।इसके चलते रोजाना चलने वाली 10 मेमू ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था। अब जलस्तर में कमी आने के बाद रेल परिचालन को दोबारा शुरू किया जा रहा है।

यानी पटना के लिए तस्वीर में सुधार के संकेत जरूर हैं—गंगा घट रही है, ट्रेनें पटरी पर लौट रही हैं और राहत अभियान जारी है। लेकिन पुनपुन नदी और जलमग्न इलाकों की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। प्रशासन की चुनौती अब पानी घटने तक प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना और उन्हें लगातार राहत पहुंचाना है।