पटना: बिहार की राजधानी पटना में गंगा और पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर अब लोगों की चिंता बढ़ाने लगा है। गंगा लगातार ऊपर की ओर बढ़ रही है और कई स्थानों पर पानी ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। वहीं पुनपुन नदी भी कई जगह खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। ऐसे में पटना जिले में गंगा-पुनपुन के दोहरे दबाव ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है।
सबसे ज्यादा चिंता गांधीघाट, हाथीदह और मनेर को लेकर है। गांधीघाट पर गुरुवार को गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर से 19 सेंटीमीटर नीचे था, जो शुक्रवार को घटकर महज 13 सेंटीमीटर नीचे रह गया। शुक्रवार रात आठ बजे यहां जलस्तर 50.39 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि अधिकारियों के अनुसार गंगा के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी हुई है, जिससे अगले दिन पानी में कुछ कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
पुराने बाढ़ रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंचा पानी
पटना जिले में गंगा और पुनपुन दोनों का पानी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि कुछ जगहों पर मौजूदा जलस्तर पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर से कुछ ही सेंटीमीटर नीचे है। हाथीदह में महज 20 सेंटीमीटर, गांधीघाट में 13 सेंटीमीटर और मनेर में 27 सेंटीमीटर का अंतर बचा है। यदि जलस्तर में फिर तेज वृद्धि होती है तो पुराने बाढ़ रिकॉर्ड के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जिले की 31 अतिसंवेदनशील और 181 संवेदनशील जगहों पर निगरानी और बाढ़ सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए हैं। सुरक्षा दीवार के सभी 108 रास्तों और 13 स्लुइस गेट के लीकेज को बंद कराया गया है। संवेदनशील घाटों, तटबंधों और जलनिकासी बिंदुओं पर अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है।
24 घंटे में कहां कितना बढ़ा पानी?
गंगा के जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान अलग-अलग स्थानों पर वृद्धि दर्ज की गई है। हाथीदह में गंगा का जलस्तर 43.14 मीटर से बढ़कर 43.32 मीटर हो गया। यानी 24 घंटे में 18 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 43.52 मीटर है और पानी अब उससे महज 20 सेंटीमीटर नीचे है। दीघा घाट में जलस्तर 51.64 मीटर से बढ़कर 51.75 मीटर हो गया। यहां 11 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। उच्चतम बाढ़ स्तर 52.52 मीटर है। गांधीघाट में 50.33 मीटर से बढ़कर पानी 50.39 मीटर पहुंचा, यानी छह सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर है। मनेर में जलस्तर 53.47 मीटर से बढ़कर 53.52 मीटर हो गया। यहां पानी उच्चतम बाढ़ स्तर 53.79 मीटर से केवल 27 सेंटीमीटर नीचे है।
पुनपुन ने भी बढ़ाई परेशानी
गंगा के साथ पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर भी पटना के निचले इलाकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। श्रीपालपुर में पुनपुन का जलस्तर एक दिन में 52.96 मीटर से बढ़कर 53.23 मीटर हो गया। यानी 24 घंटे में 27 सेंटीमीटर की तेज वृद्धि दर्ज की गई।
यहां पुनपुन का पानी खतरे के निशान से करीब 2.63 मीटर ऊपर बह रहा है। हालांकि उच्चतम बाढ़ स्तर 53.91 मीटर से अभी करीब 68 सेंटीमीटर नीचे है। पुनपुन के बढ़ते पानी का असर सबसे पहले निचले इलाकों में दिखाई देता है। कई गांवों में सड़क, घर और खेत पानी की चपेट में आ चुके हैं।
दनियावां में तटबंध क्षतिग्रस्त, सैकड़ों एकड़ फसल डूबी
बाढ़ का असर पटना जिले के ग्रामीण इलाकों में भी गंभीर दिखाई दे रहा है। फल्गु की सहायक महतमाइन और लोकाइन समेत अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से दनियावां प्रखंड में जमींदारी बांध और तटबंध के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।किसमिरिया गांव के पास तटबंध टूटने से किसमिरिया, चकरजा, मुड़ेरा, मकसूदपुर, बांकीपुर और मछरियावां समेत कई गांवों के खेतों में पानी फैल गया है। करीब चार सौ एकड़ में लगी धान की फसल डूबने की सूचना है।
बांध टूटने के बाद ग्रामीणों और किसानों ने लगभग डेढ़ घंटे तक बिहटा-सरमेरा एसएच-78 को जाम कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने टूटे बांध की युद्धस्तर पर मरम्मत कराने का निर्देश दिया है। पानी का बहाव तेज होने के कारण बोरियां डालकर पानी रोकने का प्रयास भी सफल नहीं हो सका।
दानापुर के दियारा इलाके में भी पानी की दस्तक
दानापुर के देवनानाला में जलस्तर खतरे के निशान से करीब चार फीट ऊपर पहुंच गया है। दियारा क्षेत्र की छह पंचायतों और सारण की एक पंचायत के गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। कई जगह मंदिर, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र भी पानी से प्रभावित हुए हैं।राहत शिविर में करीब 500 लोगों ने भोजन किया, जबकि 70 प्रभावित परिवार और 178 मवेशियों के प्रभावित होने की जानकारी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।
मोकामा में गंगा का फैलाव, नदी स्नान पर रोक
मोकामा में भी गंगा का पानी निचले इलाकों में फैलने लगा है। जंजीरा दियारा, कसहा दियारा, रामपुर-डूमरा, ताजपुर, शेरपुर और पचमहला के निचले क्षेत्रों में पानी पहुंच गया है। मोकामा नगर का तपस्वी गंगा मार्ग भी जलमग्न हो गया है।बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मोकामा में नदी स्नान पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। प्रशासन लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील कर रहा है।
खतरे के निशान से कितना ऊपर है पानी?
गांधीघाट: 1.79 मीटर ऊपर
हाथीदह: 1.56 मीटर ऊपर
मनेर: 1.52 मीटर ऊपर
दीघा घाट: 1.30 मीटर ऊपर
श्रीपालपुर: 2.63 मीटर ऊपर
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि गंगा के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार धीमी होने के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से काफी ऊपर है और कई जगह पुराने बाढ़ रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुका है। ऐसे में पटना में अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता अभी कम नहीं हुई है।