Bihar News : पटना में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। गंगा समेत सोन, पुनपुन और दरधा नदियों के जलस्तर में उफान का असर अब ग्रामीण इलाकों से निकलकर पटना शहर तक पहुंचने लगा है। दीघा के बिंद टोली समेत कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है। वहीं दानापुर से मोकामा तक कई गांवों में लोगों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की मजबूरी खड़ी हो गई है।


पटना जिले में बाढ़ का संकट अब सिर्फ दियारा इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है। गंगा और दक्षिण बिहार की दूसरी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने हालात को चिंताजनक बना दिया है। कई जगह खेत पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, कच्चे मकान गिरने लगे हैं और ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई हैं।


सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिनके घर निचले इलाकों में हैं। पानी बढ़ने के साथ लोगों को अपना सामान समेटकर ऊंचे स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। कई परिवार रेलवे स्टेशन, सड़क किनारे, स्कूल और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।


दीघा में घर डूबे, जेपी गंगा पथ पर टेंट बना सहारा

पटना शहर के दीघा इलाके की बिंद टोली में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। कई घर पानी में डूब गए हैं। हालात ऐसे हैं कि करीब 1500 परिवारों ने जेपी गंगा पथ के आसपास प्लास्टिक के टेंट लगाकर शरण ली है।


बाढ़ के बीच इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीने के साफ पानी और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की है। घरों में पानी भर जाने के कारण बड़ी संख्या में लोग खुले या अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं।


यह स्थिति इस बात का संकेत है कि गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब पटना के शहरी इलाकों पर भी साफ दिखाई देने लगा है।


मनेर का इस्लामगंज बना टापू

मनेर का इस्लामगंज गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। गंगा और सोन के बीच बसे इस गांव में पानी फैलने के बाद लोगों की आवाजाही बेहद मुश्किल हो गई है।


गांव से बाहर निकलने के लिए अब नाव ही मुख्य सहारा रह गई है। बाढ़ के पानी ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। खाना बनाने, पीने के पानी और शौच जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


मोकामा में दियारा के गांवों में पानी, 150 से ज्यादा लोगों ने ली शरण

मोकामा के दियारा इलाके में भी गंगा का पानी लगातार फैल रहा है। शिवनार पंचायत के जंजीरा दियारा और कसहा दियारा के कई गांव इसकी चपेट में आ गए हैं।


जंजीरा दियारा से 150 से अधिक लोग अपने मवेशियों के साथ मोकामा प्रखंड कार्यालय पहुंच गए हैं। यहां उन्होंने सुरक्षित स्थान पर शरण ली है। कसहा दियारा के पांच गांवों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। नई कसहा और शिवनगर के लोगों ने भी सुरक्षित स्थानों पर जाना शुरू कर दिया है।


लोगों का कहना है कि बाढ़ से बचने के लिए घर छोड़ना तो पड़ा, लेकिन राहत और जरूरी सुविधाओं को लेकर अभी भी कई तरह की परेशानियां बनी हुई हैं।


बख्तियारपुर में कच्चे मकानों पर आफत

बख्तियारपुर के दियारा इलाके में बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ कच्चे और झोपड़ीनुमा मकानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। चिरैया निवासी चनर राय का घर बाढ़ के पानी के कारण गिर गया।


घर गिरने के बाद परिवार के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। दियारा क्षेत्रों में ऐसे कई परिवार हैं जिनके मकान बाढ़ के पानी के बीच कमजोर पड़ने लगे हैं।


दानापुर की छह पंचायतें बाढ़ से घिरीं

दानापुर दियारा क्षेत्र की सभी छह पंचायतों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों और मवेशियों के साथ बलदेव इंटर स्कूल में बनाए गए राहत शिविर में पहुंच रहे हैं।


हालांकि कुछ परिवार अब भी गांव में अपने घर और सामान की निगरानी के लिए रुके हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि पानी जल्द कम होगा और वे वापस अपने घर लौट सकेंगे।


धनरूआ में तटबंध टूटा, 30 घरों में घुसा पानी

धनरूआ प्रखंड में दरधा नदी के उफान ने संकट और बढ़ा दिया है। बीर के महुआतड़ के पास बुधवार रात तटबंध करीब 20 से 25 फीट तक टूट गया। इसके बाद बाढ़ का पानी आसपास के इलाकों में तेजी से फैल गया और करीब 30 घरों में पानी प्रवेश कर गया।


पानी घरों में पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने रात से ही तटबंध पर शरण ले रखी है। बीर अस्पताल के गेट तक भी पानी पहुंच गया है। देवधा, लक्ष्मीचक, मुस्तफापुर और सदीसोपुर समेत आसपास के कई गांवों के खेतों में लगी फसलें पानी में डूब गई हैं।


ग्रामीणों के मुताबिक दरधा नदी में कई वर्षों के बाद इस तरह का उफान देखने को मिला है।


दानापुर से मोकामा तक बढ़ी चिंता

पटना जिले में मौजूदा हालात को देखें तो बाढ़ का असर एक बड़े इलाके में फैल चुका है। मनेर, दानापुर, दीघा, धनरूआ, बख्तियारपुर और मोकामा के कई इलाकों में लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है।


कहीं लोग नाव के सहारे गांव से बाहर निकल रहे हैं तो कहीं सड़क और ऊंचे स्थानों पर अस्थायी ठिकाने बना रहे हैं। खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, जबकि कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल सुरक्षित रहने का है।


गंगा समेत दूसरी नदियों का जलस्तर अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो पटना के और इलाकों में भी बाढ़ का असर बढ़ने की आशंका है। फिलहाल प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सुविधाएं मिलने का इंतजार है।