Patna Elevated Road : पटना में ट्रैफिक की रफ्तार बढ़ाने और शहर के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए लगातार एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। राजधानी में कई एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर पहले से वाहनों के लिए चालू हैं। इसी कड़ी में मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर भी पटना के दक्षिणी हिस्से की तस्वीर बदलने वाला है। इस कॉरिडोर के अलग-अलग हिस्सों का निर्माण तेजी से पूरा किया गया है। इसके शुरू होने से मीठापुर से पुनपुन की दूरी कम समय में तय की जा सकेगी।

11.67 किलोमीटर लंबा होगा फोर लेन कॉरिडोर

मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 11.67 किलोमीटर लंबा फोर लेन मार्ग है। इसका उद्देश्य मीठापुर, सिपारा, महुली और पुनपुन को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ना है। कॉरिडोर के निर्माण पर करीब 1467.72 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

इस परियोजना का पहला प्रमुख हिस्सा मीठापुर से रामगोविंद सिंह महुली हाल्ट तक करीब 8.86 किलोमीटर लंबा है। वहीं दूसरे चरण में मीठापुर-सिपारा-महुली-पुनपुन रेलवे लाइन के पूरब मीठापुर से सिपारा तक फोर लेन एलिवेटेड रोड का निर्माण किया गया है। सिपारा के पास टू-वे आरओबी भी इस परियोजना का हिस्सा है।

महुली हाल्ट से पुनपुन के लक्ष्मण झूला तक करीब 2.20 किलोमीटर लंबा फोर लेन एलिवेटेड रोड भी तैयार किया गया है। यानी पूरा कॉरिडोर पटना के दक्षिणी हिस्से को पुनपुन और आगे दक्षिण बिहार के जिलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।

15 मिनट में मीठापुर से पुनपुन पहुंचने का दावा

कॉरिडोर चालू होने के बाद मीठापुर से पुनपुन तक का सफर काफी आसान हो जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में वाहन चालक करीब 10 से 15 मिनट में इस दूरी को तय कर सकेंगे। एलिवेटेड रोड पर वाहनों की अधिकतम निर्धारित गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है।

इससे सिर्फ पुनपुन जाने वाले लोगों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि जहानाबाद, गया और दक्षिण बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों को भी वैकल्पिक और तेज रास्ता मिलेगा। पटना से गया जाने में लगने वाला समय भी कम होने की उम्मीद है।

UHPFRC तकनीक से तैयार हुआ कॉरिडोर

मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर की एक बड़ी खासियत इसकी निर्माण तकनीक है। परियोजना में बिहार में पहली बार अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रिइंफोर्स्ड कंक्रीट यानी UHPFRC तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक की मदद से 64 मीटर तक लंबे स्पैन तैयार किए गए हैं। कॉरिडोर का एलाइनमेंट रेलवे ट्रैक के समानांतर रखा गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों तरफ ऊंचे गार्ड लगाए गए हैं। इसके अलावा साउंड बैरियर, स्ट्रीट लाइट, एक्सपेंशन ज्वाइंट और रोड मार्किंग जैसे काम भी परियोजना का हिस्सा हैं।

गया, जहानाबाद और दक्षिण बिहार के लिए बड़ा फायदा

मीठापुर-महुली कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा पटना के दक्षिणी हिस्से में रहने वाले लोगों के साथ-साथ गया, जहानाबाद, औरंगाबाद और आसपास के जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों को मिलेगा। अभी इन इलाकों की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के कई व्यस्त और जाम वाले हिस्सों से होकर गुजरना पड़ता है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद लंबी दूरी के ट्रैफिक को शहर के भीतरी हिस्सों से अलग रास्ता मिल सकेगा। इससे समय की बचत के साथ-साथ पटना की सड़कों पर दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी नजर

पटना में एलिवेटेड कनेक्टिविटी का दायरा यहीं खत्म नहीं होता। दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर भी शहर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। करीब 25 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण दानापुर रेलवे स्टेशन से बिहटा और कोइलवर की दिशा में किया जा रहा है। परियोजना में दानापुर के पास आरओबी और डबल डेकर ब्रिज जैसे स्ट्रक्चर प्रस्तावित हैं। दानापुर स्टेशन के पास चार, नेऊरागंज में दो और बिहटा एयरपोर्ट से कोइलवर की ओर एक रैंप का निर्माण किया जा रहा है।

इस कॉरिडोर पर करीब 1969 करोड़ रुपये खर्च होने हैं और इसमें 389 पीलर बनाए जा रहे हैं। निर्माण पूरा होने के बाद एम्स, आईआईटी, एनआईटी सहित पटना के कई प्रमुख संस्थानों और पश्चिमी इलाकों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो मीठापुर-महुली और दानापुर-बिहटा जैसी परियोजनाएं पटना की सड़क व्यवस्था को नया स्वरूप देने वाली हैं। इन एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने के बाद पटना से गया, जहानाबाद, बिहटा, कोइलवर और दक्षिण बिहार की ओर सफर ज्यादा तेज और सुविधाजनक हो सकता है।