Patna Durga Puja : पटना के इतवारपुर में इस बार दुर्गा पूजा के लिए तैयार किया गया भव्य पंडाल अपनी विशालता और लागत के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी बन गया है। करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार इस पंडाल को बनाने में लगभग 150 मुस्लिम कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की है। झारखंड से आए ये कारीगर पिछले करीब 9 वर्षों से इतवारपुर में दुर्गा पूजा के लिए पंडाल तैयार करते आ रहे हैं।
एक करोड़ से ज्यादा की लागत, डेढ़ महीने की मेहनत
इतवारपुर में इस बार दुर्गा पूजा को खास बनाने के लिए आयोजकों ने पंडाल निर्माण पर बड़ा खर्च किया है। जानकारी के मुताबिक, पंडाल को तैयार करने में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है। इसे भव्य रूप देने के लिए कारीगरों की बड़ी टीम को लगाया गया था।
करीब 150 कारीगर लगातार डेढ़ महीने से अधिक समय तक पंडाल बनाने में जुटे रहे। कारीगरों के मुताबिक, काम इतना बड़ा था कि दिन-रात मेहनत करनी पड़ी। पंडाल के ढांचे से लेकर उसकी सजावट और बारीक नक्काशी तक, हर काम को बेहद सावधानी से पूरा किया गया है।
अब पंडाल पूरी तरह बनकर तैयार है। शाम होते ही जब पंडाल पर रंग-बिरंगी रोशनी पड़ेगी तो इसकी भव्यता और भी ज्यादा दिखाई देगी। इतनी बड़ी लागत और लंबे समय की मेहनत के बाद तैयार यह पंडाल इस बार पटना में आकर्षण का बड़ा केंद्र बनने वाला है।
150 कारीगर, सभी मुस्लिम समुदाय से
इस पंडाल की सबसे खास बात सिर्फ इसकी कीमत या इसकी भव्यता नहीं है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसे तैयार करने वाले करीब 150 कारीगर मुस्लिम समुदाय से आते हैं।ये सभी कारीगर झारखंड के रहने वाले हैं। कई वर्षों से वे दुर्गा पूजा के दौरान पटना आते हैं और यहां पंडाल निर्माण का काम करते हैं। पिछले करीब 9 वर्षों से इतवारपुर की दुर्गा पूजा से इन कारीगरों का जुड़ाव बना हुआ है।कारीगरों का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ रोजी-रोटी का काम नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही एक जिम्मेदारी और जुड़ाव भी है। हर साल वे नई थीम और नई कल्पना के साथ पंडाल तैयार करने की कोशिश करते हैं।इस बार भी करीब डेढ़ महीने से ज्यादा समय तक उन्होंने लगातार मेहनत की। पंडाल की विशाल संरचना को तैयार करने के बाद उसकी सजावट और थीम को अंतिम रूप दिया गया।
राम मंदिर और बाहुबली के बाद इस बार जगन्नाथ मंदिर
इन कारीगरों के लिए यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक थीम पर पंडाल तैयार किया हो। इससे पहले वे राम मंदिर और बाहुबली की थीम पर भी पंडाल बना चुके हैं।इस बार उन्होंने जगन्नाथ मंदिर की थीम को चुना है। इसी थीम के आधार पर पूरे पंडाल को आकार दिया गया है। पंडाल की बनावट और सजावट में मंदिर की भव्यता को उभारने की कोशिश की गई है।
कारीगरों के मुताबिक, किसी भी थीम को जमीन पर उतारना आसान नहीं होता। पहले डिजाइन तैयार किया जाता है, फिर उसके मुताबिक ढांचा खड़ा किया जाता है और इसके बाद सजावट का काम शुरू होता है। इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में कारीगरों की जरूरत पड़ती है।
पंडाल से ज्यादा चर्चा में इसकी कहानी
इतवारपुर का यह पंडाल इस बार इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से तैयार इस भव्य दुर्गा पूजा पंडाल के पीछे 150 मुस्लिम कारीगरों की मेहनत है। दुर्गा पूजा हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है, लेकिन इस पूजा के लिए पंडाल तैयार करने वाले कारीगरों की टीम में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। वे पिछले कई वर्षों से इसी तरह अपनी कला और मेहनत के जरिए दुर्गा पूजा की तैयारियों का हिस्सा बनते रहे हैं।
पटना के इतवारपुर का यह पंडाल इसलिए सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि मेहनत, कला और आपसी भाईचारे की कहानी भी सामने ला रहा है। एक तरफ जहां पंडाल पर करोड़ों की भव्यता दिखाई देगी, वहीं दूसरी तरफ इसके पीछे उन 150 कारीगरों की मेहनत होगी, जिन्होंने डेढ़ महीने से ज्यादा समय तक दिन-रात काम करके इसे तैयार किया है।
शाम के समय जब रोशनी से पंडाल जगमगाएगा और श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे, तब इसकी भव्यता के साथ-साथ इसकी कहानी भी लोगों का ध्यान खींचेगी। एक करोड़ से ज्यादा की लागत, डेढ़ महीने की मेहनत और 150 मुस्लिम कारीगरों की कला से तैयार इतवारपुर का यह दुर्गा पूजा पंडाल इस बार पटना में आकर्षण का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।